Children should go back to school even if studies show they spread coronavirus: White House । कोरोना के प्रकोप के बावजूद ट्रंप जल्द से जल्द स्कूल क्यों खुलवाना चाहते हैं?

वॉशिंगटन: कोरोना वायरस (Coronavirus) के बढ़ते प्रकोप के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द से जल्द स्कूल खोलने पर अमादा हैं. ट्रंप ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा है कि था महामारी  के बीच वह अपने 14 वर्षीय बेटे बैरन (Barron) और अपने 10 पोते-पोतियों को स्‍कूल भेजने को लेकर सहज हैं. अब व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कायले मैकनी (Kayleigh McEnany) ने अजीब बयान दिया है. 

मैकनी ने शुक्रवार को कहा कि बच्चों को स्कूल भेजा जाना चाहिए, भले ही उनके संक्रमण फैलाने की आशंका हो. प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘हमें लगता है कि बच्चों को अब स्कूल जाना चाहिए. क्योंकि हम जानते हैं कि बच्चे वैज्ञानिक रूप से वयस्क लोगों के समान कोरोना से प्रभावित नहीं होते. दरअसल, व्हाइट हाउस की कोरोना वायरस टास्क फोर्स की सदस्य डॉ. देबोराह ब्रिक्स ने छोटे बच्चों में कोरोना के प्रभाव को लेकर एक बयान दिया था. उसी के सिलसिले में कायले मैकनी से सवाल पूछा गया था. 

ब्रिक्स ने एक टेलीविजन कार्यक्रम ‘टुडे’ में कहा था कि यह सवाल अभी भी कायम है कि 10 साल से कम उम्र के बच्चे कितनी तेजी से वायरस फैला सकते हैं. हालांकि उन्होंने एक दक्षिण कोरियाई अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चे वायरस के प्रसार में ज्यादा योगदान नहीं देते, जबकि उससे बड़े बच्चों में वायरस के प्रसार की दर वयस्कों के समान है. बिर्क्स ने यह भी कहा कि यदि बच्चों को पहले से कोई बीमारी है और वह कोरोना संक्रमण की चपेट नें आते हैं, तो स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है.

इससे पहले, ट्रंप ने स्कूल खोलने पर कहा था कि ‘मैं इसके साथ सहज हूं. हमारे पास एक राष्ट्रीय रणनीति है, लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि अंततः यह राज्यों के गर्वनर्स के ऊपर है’. उन्होंने कहा कि वह इस सत्र में सभी स्कूलों को फिर से खुलते हुए देखना चाहते हैं. यदि स्‍कूल नहीं खुलते तो वह दिए जाने वाले कुछ फंड पर भी पुनर्विचार करेंगे.”

ट्रंप चाहते हैं कि देशभर के स्कूल एक साथ खुल जाएं ताकि नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले जनता तक ये संदेश पहुंच सके कि उनके नेतृत्व में कोरोना के खिलाफ लड़ाई निर्णायक साबित हुई और देश के हालात अब सामान्य हो चुके हैं. कई राज्यों में कोरोना की विकराल स्थिति के बावजूद वो टोटल अनलॉक के पक्षधर रहे हैं. जबकि हकीकत ये है कि कोरोना संक्रमण से दुनियाभर में सबसे ज्यादा मौत यहीं पर हुईं और मरने वालों का आंकड़ा 1 लाख 44 हजार के पार पहुंच चुका है.




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