China is losing the trade war. Here’s how | ट्रेड वॉर में बीजिंग के उखड़ रहे पैर, कई विदेशी कंपनियां चीन छोड़ने को तैयार

बीजिंग: चीन को वर्षों से मैन्युफैक्चरिंग हब कहा जाता रहा है, लेकिन अब स्थिति बहुत तेजी से बदल रही है. कोरोना महामारी (Corona Virus) और भारत से बेवजह सीमा विवाद को हवा देने के चलते दुनिया भर में न केवल उसकी छवि खराब हुई है बल्कि उसकी आर्थिक सेहत भी इससे प्रभावित हो रही है. 

पिछले कुछ वक्त में बदले हालातों के बीच विदेशी कंपनियां अब चीन छोड़ना चाहती हैं. कॉर्पोरेट लीडर्स का बीजिंग में विश्वास कम हो रहा है और यह बात एक सर्वेक्षण में सामने आई है. 260 ग्लोबल सप्लाई चेन लीडर्स के एक सर्वेक्षण के मुताबिक, तीन में से एक कंपनी चीन छोड़ने के लिए तैयार है. वे सोर्सिंग और मैन्युफैक्चरिंग को चीन से बाहर ले जाना चाहते हैं, यदि तुरंत नहीं, तो अगले दो से तीन वर्षों में.

कोरोना महामारी को लेकर अमेरिका (America) का चीन (China) से बढ़ता टकराव और बीजिंग के गैर-जिम्मेदाराना रुख के चलते विदेशी कंपनियों को अब यहां से बाहर निकलने में ही समझदारी नजर आ रही है. उन्हें अहसास हो गया है कि चीन पर बहुत अधिक निर्भरता नुकसानदायक साबित हो सकती है और आने वाले समय में यहां कारखानों का संचालन सस्ता नहीं रहेगा. 

अमेरिका का कड़ा रुख 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने जब 370 बिलियन डॉलर के चीनी सामान पर टैरिफ की घोषणा की थी, तो कुछ कंपनियों के लिए लागत 100 मिलियन डॉलर बढ़ गई थी. कंपनियां जानती हैं कि जिस तरह से चीन का रुख रहा है, उससे आने वाले समय में स्थिति और खराब होगी, इसलिए वे यहां से अपना कारोबार समेटकर जाना चाहती हैं. अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के चलते 50 से अधिक कंपनियों ने पहले ही चीन छोड़ दिया है.

नए प्रतिबंधों का खतरा
कोरोना संकट ने हालात और भी बदतर बना दिए हैं, ट्रंप इसके लिए सीधे तौर पर चीन को दोषी मानते हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया है कि उइगर (Uighurs) मुस्लिमों पर चीन के अत्याचार को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी कंपनियों को चीन के शिनजियांग प्रांत (Xinjiang) में काम नहीं करना चाहिए. शिनजियांग में मानवाधिकारों के उल्लंघन की कई रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं, ऐसे में चीन पर कई नए प्रतिबंध लगाये जा सकते हैं. 

कई विकल्प हैं मौजूद
उद्योगपति अमेरिका-चीन की इस वॉर में नहीं फंसना चाहते, इसलिए वे चीन छोड़ने की योजना बना रहे हैं. हालांकि, उनके पास विकल्पों की कमी नहीं है. अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनी Nike अपने कारखानों को दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका में स्थानांतरित चुकी है. वियतनाम में श्रम लागत 60 प्रतिशत सस्ती है और वह तेजी से एक अग्रणी वैश्विक निर्माता के रूप में उभर रहा है. यहां तक कि आईफोन निर्माता ताइवान के फॉक्सकॉन (Taiwan’s Foxconn) का चीन के बाहर वियतनाम में सबसे बड़ा हब है. 




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