China Vs US Navy: किम जोंग के जरिए पुतिन ने डॉनल्ड ट्रंप को बातचीत से पहले एक चैलेंज दिया है तो ट्रंप के लिए दूसरा चैलेंज आया है चीन से. ट्रंप की कथित पावर को चीन ने किस तरह चुनौती दी है. इसकी नई और सच्ची घटना के बारे में अब आपको जानना चाहिए.
अमेरिकी नेवी को चीन की नेवी ने लौटाया
चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को अमेरिकी नेवी का एक जहाज चीन की समंदरी सीमा के अंदर आ गया था. इस अमेरिकी जहाज का नाम USS हिगिंस बताया जा रहा है. जहाज की मौजूदगी देखते ही चीन की नेवी फौरन हरकत में आई और चीन की नेवी ने अमेरिकी जहाज को वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया. घटना के बाद चीन की नेवी ने एक बयान भी जारी किया, जिसमें कहा गया है अगर भविष्य में अमेरिकी नेवी ने ऐसी हरकत को अंजाम दिया…तो वो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे.
अमेरिका को दे दिया सख्त संदेश
अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें. ये शब्द बताने के लिए काफी हैं कि जिस अमेरिकी नेवी का दुनिया भर में कथित तौर पर डंका बजता है, उसकी शक्ति को चीन की सेना अपने सामने कम करके आंकती है. या फिर शायद चीन को अमेरिकी नौसैनिक ताकत का कोई डर नहीं. इतने सख्त बयान के बावजूद ट्रंप सरकार ने इस घटना को लेकर कोई बयान या जानकारी साझा नहीं की है , जिससे ये इशारा मिलता है कि ना तो टकराव और ना ही टैरिफ किसी भी मुद्दे पर ट्रंप चीन से तनाव नहीं चाहते. हम ऐसा क्यों कह रहे हैं, ये समझने के लिए आपको चीन को लेकर ट्रंप का वो फैसला जरूर देखना चाहिए,जो चौबीस घंटे पहले ही सामने आया था.
अमेरिका ने चीन के ऊपर लगाए गए टैरिफ को एक बार फिर टाल दिया है. व्हाइट हाउस से आए बयान के मुताबिक, ट्रंप ने दोबारा चीन को टैरिफ पर सहमति के लिए 90 दिन का वक्त दे दिया है. ये तीसरी बार है जब ट्रंप ने चीन पर लगाए गए टैरिफ को आगे बढ़ाया है. सबसे पहले 9 अप्रैल को ट्रंप ने टैरिफ पर बातचीत के लिए समय बढ़ाया था. फिर 12 मई को दोबारा ट्रंप ने समय बढ़ाने का ऐलान किया और अब 11 अगस्त को एक बार फिर ट्रंप ने चीन पर टैरिफ को आगे के लिए टाल दिया है.
ट्रंप बार-बार चीन को दे रहे नई डेडलाइन
सोचने वाली बात है कि टैरिफ की डेडलाइन खत्म भी नहीं होती कि चीन के लिए ट्रंप नई डेडलाइन का ऐलान कर देते हैं, जिससे सीधा इशारा मिलता है कि चीन के साथ ट्रंप किसी किस्म का आर्थिक टकराव नहीं चाहते. दरअसल जितनी बार ट्रंप ने चीन पर बढ़े टैरिफ लगाने का बयान दिया है तो चीन से भी उतना ही टैरिफ अमेरिका पर लगाने का जवाब आया है. ऐसे सख्त जवाब की वजह सिर्फ एक है कि अमेरिका को चीनी उत्पादों की ज्यादा जरूरत है.
आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि चीन और अमेरिका के व्यापार में अमेरिका के मुकाबले चीन को 295 बिलियन डॉलर का फायदा होता है. यही वजह है कि जिनपिंग हर टैरिफ वाले बयान पर ट्रंप को सख्त जवाब दे पाते हैं.
इस खबर की शुरुआत चीन की नौसैनिक ताकत से हुई थी तो हम आपको इस कथित शक्ति की एक तस्वीर भी दिखा देते हैं. भले ही चीन की नेवी अमेरिकी नौसैनिक जहाज को खदेड़ने का दावा करे, लेकिन अपने पड़ोस में चीन को भी चुनौती मिलती रहती है.
फिलीपींस दे रहा चीन को चुनौती
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो बीते दिनों का है. जब दक्षिण चीन सागर के एक विवादित क्षेत्र में फिलीपींस के कोस्ट गार्ड का एक जहाज और चीन की नेवी के दो जहाज आमने सामने आ गए थे. चीन के नौसैनिक जहाजों ने डराने धमकाने के इरादे से फिलीपींस के जहाज को टक्कर मारने की कोशिश की थी, जिसके बाद फिलीपींस के जहाज ने चीनी शिप को ऐसी टक्कर मारी कि दोनों जहाजों का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था.
चीनी जहाजों को नुकसान पहुंचाने के बाद भी फिलीपींस का ये जहाज भागा नहीं बल्कि जहाज पर सवार कोस्ट गार्ड के अफसरों ने तसल्ली से खड़े होकर क्षतिग्रस्त चीनी जहाज के फोटो भी खींचे.
फिलीपींस जैसे छोटे से देश ने मानो जिनपिंग को ये संदेश दे दिया है कि अपनी धमकियां अमेरिका या यूरोप के लिए रखिए. हमारे ऊपर ऐसी धमकी या दबाव का कोई असर नहीं होता.
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