नई दिल्ली: चीनी अधिकारियों ने सोमवार को कानून के एक प्रोफेसर जू झानग्रुन (Xu Zhangrun) को हिरासत में लिया है. उनका जुर्म सिर्फ इतना था कि उन्होंने कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी को लेकर राष्ट्रपति शी जिनपिंग (President Xi Jinping) की आलोचना की थी.
जू के दोस्तों के अनुसार, प्रोफेसर ने कोरोना वायरस महामारी और सत्ता को मजबूत करने के प्रयासों को लेकर राष्ट्रपति जिनपिंग की आलोचना करते हुए कुछ आर्टिकल प्रकाशित किए थे.
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बता दें कि चीन में हमेशा से कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party) द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सख्ती से दबाया गया लेकिन शी जिनपिंग के रहते यह सख्ती और बढ़ गई है.
जबकि भारी सेंसरशिप वाले इस देश में जू एक ऐसे दुर्लभ मुखर आलोचक रहे हैं जिन्होंने समय-समय पर कम्युनिस्ट शासन की आलोचना की है. इस बार आलोचना किए जाने के बाद करीब 20 लोगों ने उन्हें उनके घर से उठा लिया. यह जानकारी नाम उजागर न करने की शर्त पर उनके एक मित्र द्वारा दी गई है.
जू ने फरवरी में चीन में कोरोना वायरस के प्रसार के दौरान शी द्वारा धोखे और सेंसरशिप की संस्कृति को बढ़ावा देने की आलोचना करते हुए एक निबंध प्रकाशित किया था.
उन्होंने लिखा था कि चीन का “लीडर सिस्टम स्वयं ही शासन की संरचना को नष्ट कर रहा है”. उन्होंने यह भी कहा कि वायरस के एपिसेंटर हुबेई प्रांत में फैली अराजकता चीनी राज्य में प्रणालीगत समस्याओं को दर्शाती है. जू का यह निबंध कई विदेशी वेबसाइटों पर पोस्ट किया गया था. इससे पहले 2018 में भी उन्होंने अपने एक निबंध में राष्ट्रपति पद की सीमा की समाप्ति के खिलाफ आवाज उठाई थी.
वेश्यावृत्ति का लगाया आरोप
जू Tsinghua University में कानून के प्रोफेसर हैं. इसे चीन की शीर्ष यूनिवर्सिटी में से एक माना जाता है. जू ने पिछली सर्दियों में कई चीनी स्कॉलर्स के साथ दक्षिण-पश्चिमी शहर चेंगदू की यात्रा की थी. सरकार ने उसी यात्रा के दौरान उनके द्वारा वेश्यावृत्ति करने का आरोप लगाकर अभी जेल में डाला है. जू के एक दोस्त ने सोमवार को बताया कि पुलिस ने जू की पत्नी को बुलाकर बताया कि प्रोफेसर को चेंगदू में वेश्यावृत्ति करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.
उनके दोस्त ने कहा कि ये आरोप “हास्यास्पद और बेशरमी भरे” हैं. बता दें कि जू पिछले हफ्ते से ही घर में नजरबंद थे. जू अपने छात्रों के बीच कितने लोकप्रिय हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2019 में जू को कथित तौर पर पढ़ाने से रोके जाने पर दुनिया भर में उनके सैंकड़ों पूर्व छात्रों और शिक्षाविदों ने ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर करने का अभियान चलाया था.


