प्रेग्नेंसी से बचने के लिए गर्भ निरोधक गोलियां लेती हैं तो पहले ये जान लीजिए कि ये दवाएं किस हद तक आपकी सेहत को प्रभावित कर रही हैं।
Edited By Parul Rohatagi | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

कई महिलाओं को पीरियड्स से पहले चिड़चिड़ापन या उदासी महसूस होती है। ये प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम यानी पीएमस के लक्षण हो सकते हैं। लेकिन गर्भ निरोधक गोलियां और अन्य हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव भी आपके मूड को इस तरह प्रभावित कर सकती हैं।
इस लेख में हम कुछ रिसर्च के जरिए इसी बात पर चर्चा करने जा रहे हैं कि गर्भ निरोधक गोलियों का महिलाओं के भावनात्मक पहलुओं और मूड पर क्या प्रभाव पड़ता है।
गर्भ निरोधक गोलियों को इमोशंस से संबंध
साल 1960 में गर्भ निरोधक गोलियां आई थीं और तभी से इन्हें लेने वाली महिलाएं मूड से संबंधित बदलाव जैसे कि डिप्रेशन और एंग्जायटी होने की शिकायत करने लगी हैं। आज जो गोलियां आती हैं उनमें हार्मोंस की कम खुराक होती है। वहीं इन गर्भ निरोधक गोलियों के साइड इफेक्ट की वजह से कम महिलाएं ही इसका सेवन करती हैं।
गर्भ निरोधक गोलियों के प्रकार
क्या कहती है रिसर्च
एक अध्ययन में 90 महिलाओं को शामिल किया गया जिनमें से 44 महिलाएं गर्भ निरोधक गोलियां ले रही थीं। शोधकर्ताओं ने पाया कि ये पिल्स मस्तिष्क को प्रभावित कर महिलाओं की मानसिक स्थिति पर असर डालती हैं। पिल लेने वाली महिलाओं के मस्तिष्क के दो हिस्सों – पोस्टीरियर सिंगुलेट कोर्टेक्स और लेटरल ऑर्बिटोफ्रंटल कोर्टेक्स को पतला देखा गया।
पोस्टीरियर सिंगुलेट कोर्टेक्स का संबंध खुद को देखने की भावनात्मक उत्तेजना से होता है जबकि लेटरल ऑर्बिटोफ्रंटल कोर्टेक्स का संबंध बाहरी उत्तेजनाओं से इमोशन और बिहेवियर से होता है।
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इन दो हिस्सों के पतला होने से महिलाओं में असामान्य रूप से भावनात्मक कार्य बिगड़ जाते हैं। मस्तिष्क के इन दो महत्वपूर्ण हिस्सों में बदलाव आने से महिलाओं का सिर्फ बाहरी परस्थितियों को देखने का नजरिया ही नहीं बदलता बल्कि वो खुद को भी अलग ढंग से देखने लगती हैं। गर्भ निरोधक गोलियों की वजह से महिलाओं के व्यवहार में बदलाव आ सकता है और उनमें डिप्रेशन एवं एंग्जायटी का खतरा अधिक रहता है। ये सब पिल्स के द्वारा मस्तिष्क के दो हिस्सों में किए गए असामान्य बदलाव के कारण होता है।
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गर्भ निरोधक गोलियों से मूड स्विंग्स
कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स शुरू करने पर भावनात्मक बदलाव होने का शुरुआती संकेत मूड स्विंग्स हो सकते हैं। इसमें गुस्सा, अचानक आंसू आना, खुशी महसूस न होना शामिल है। अगर आपको गर्भ निरोधक गोलियां लेने के बाद इस तरह के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से बात करें।
जितना जल्दी आप इन लक्षणों को पहचान पाएंगी, उतना ही आपके लिए बेहतर होगा।
गर्भ निरोधक गोलियों से महिलाओं की इमोशनल हेल्थ में आने वाले बदलावों को लेकर रिसर्च बहुत कम हुई हैं। हालांकि, इन पिल्स को ले रही महिलाओं ने कई बार इस तरह के बदलाव होने, नकारात्मक विचार आने, मूड स्विंग्स, डिप्रेशन और एंग्जायटी की बात कही है।
प्रेग्नेंसी से बचने के लिए गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन किया जाता है। इनके कुछ साइड इफेक्ट भी होते हैं। अब तो यह बात भी सामने आई है कि गर्भ निरोधक गोलियां महिलाओं की इमोशनल हेल्थ को भी प्रभावित करती हैं।
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