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आइए, जानते हैं कि जिंदगी के 8वें दशक के करीब पहुंच चुके सदी के महानायक ने कैसे अपनी ऊर्जा और काम करने की लगन से खुद डॉक्टर्स को हैरान कर रखा है…अमिताभ और अभिषेक में थे Covid-19 के माइल्ड सिंप्टम्स

उम्मीद की जा रही है कि कोरोना संक्रमण के चलते नानावती अस्पताल में भर्ती हुए अभिषेक बच्चन को जल्द डिस्चार्ज किया जा सकता है। जबकि अमिताभ बच्चन को अभी कुछ समय के लिए डॉक्टर्स अपनी देखरेख में रख सकते हैं। हालांकि दोनों ही ऐक्टर्स किसी भी तरह के खतरे से बाहर हैं। आपको याद दिलाते चलें कि अमिताभ और अभिषेक दोनों में ही Covid-19 के माइल्ड सिंप्टम्स पाए गए थे।
ताकि जल्द स्वस्थ हो सकें बच्चन

-सूत्रों का कहना है कि अमिताभ बच्चन और उनके बेटे अभिषेक दोनों को ही कोविड-19 (Covid-19) के इलाज के साथ ही दूसरी सपॉर्टिव थेरपीज भी दी जा रही हैं। ताकि वे जल्दी स्वस्थ हो सकें। उनकी सेहत को लेकर किसी भी तरह की चिंता करने जैसी कोई बात नहीं है। दोनों को भूख एकदम ठीक लग रही है और दोनों ही बहुत पॉजिटिव हैं।
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जलसा बना ‘कॉन्टेनमेंट जोन’

-अमिताभ बच्चन के 4 बंगलों में से एक जलसा को सेनिटाइज करने के बाद बीएमसी की तरफ से ‘कॉन्टेनमेंट जोन’ बना दिया गया है। यानी ऐसा क्षेत्र जहां एक सीमित समय तक जाने की मनाही है। यह समयावधि क्या होगी, इस बात का निर्णय बीएमसी के अधिकारियों और हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह पर आधारित होगा।
अमिताभ की ऊर्जा का केंद्र

-अक्सर हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि कभी जीवन में कभी सेहत और जिंदगी की सांसों से जुड़ा संकट तो कभी भयंकर आर्थिक संकट का सामना कर चुके अमिताभ बच्चन आखिर इतने सकारात्मक कैसे रहते हैं। ऐसा क्या खाते हैं और क्या करते हैं कि 77 की उम्र में भी यंगस्टर्स से अधिक काम कर पाते हैं?
सकारात्मकता से भरी सोच

-अमिताभ बच्चन की इस ऊर्जा, लगन और काम करने के जुनून से संबंधित सवाल पूछने पर उद्गम मेंटल हेल्थ केयर की क्लीनिकल सायकाइट्रिस्ट इरा गुप्ता कहती हैं, अमिताभजी की इन सभी ऐक्टिविटीज को बल मिलता है उनकी सकारात्मक सोच से। यही वह शक्ति है जो उन्हें लगातार व्यस्त और ऐक्टिव रहने के लिए एनर्जी देती है।
-यदि व्यक्ति सकारात्मक होकर हर समस्या का सामना करे तो समस्या सेहत से जुड़ी हो या जीवन से उसका कुछ ना कुछ हल अवश्य निकल आता है। अमिताभ बच्चन ने जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना करते हुए कभी हार नहीं मानी और बेहतर की उम्मीद नहीं छोड़ी।
पेशंट्स को भी दी जाती है यही सलाह

-काउंसलर इरा आगे कहती हैं कि हम अपने पेशंट्स को भी यही सलाह देते हैं कि अगर आप अंदर से मजबूत रहेंगे, जल्दी स्वस्थ होने की आपकी इच्छा मजबूत होगी तो दवाओं और थेरपीज का असर बहुत शीघ्र और सकारात्मक परिणाम देता है। जिस तरह अमिताभ बच्चन ने अपनी बीमारियों को कभी नहीं छिपाया और जागरूकता अभियान में हमेशा आगे रहे, वे सभी के लिए एक उदाहरण हैं।
करिश्मा कर देती है दृढ़ इच्छा शक्ति

आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर बबलू शर्मा का कहना है कि हमारी मानसिक सेहत पर यह बात बहुत हद तक निर्भर करती है कि हमारी शारीरिक सेहत कैसी रहेगी। या हम किसी बीमारी से कब तक ठीक हो पाएंगे। जब हम सकारात्मक रहते हुए अपनी चिकित्सा कराते हैं तो उसके परिणाम आश्चर्यचकित कर देनेवाले होते हैं।
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असंभव पर संभव की जीत के उदाहरण

-डॉक्टर शर्मा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि दुनियाभर में ऐसे बहुत सारे उदाहरण हैं, जब असंभव जीत को भी लोगों ने अपनी जीवटता के बल पर संभव बनाया है। इसके लिए हम कैंसर जैसी बीमारी को मात देनेवाले लोगों, स्पेशियली ऐबल प्लेयर्स, पैर की उंगलियों से शानदार पेंटिग्स बनानेवाले आर्टिस्ट्स का उदाहरण ले सकते हैं।
-फिर अमिताभ बच्चन तो अपने आपमें एक उदाहरण हैं। विषम परिस्थितियों में भी हार ना मानने की उनकी खूबी और जीवन को शांति और शालीनता से जीने का उनका तरीका उनकी सकारात्मक सोच और इच्छाशक्ति के बारे में बताता है। इसी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर वे जल्द स्वस्थ होकर हमारे बीच आएंगे।
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