Corona virus has seen more than 7 thousand changes In India, scientists warn – कोरोना वायरस में 7 हजार से ज्यादा बार बदलाव देखा गया, भारतीय वैज्ञानिकों ने किया आगाह 

कोरोना वायरस में 7 हजार से ज्यादा बार बदलाव देखा गया, भारतीय वैज्ञानिकों ने किया आगाह 

नई दिल्ली:

भारत में कोरोना वायरस 7 हजार से ज्यादा बार बदलाव देखा गया है. वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि अगर ढिलाई बरती गई तो वायरस ज्यादा संक्रामक फैलाने वाला रूप (वैरिएंट) तेजी से संक्रमण फैला सकता है. 

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एक अध्ययन के अनुसार, भारत में कोरोना के 7684 वैरिएंट मिले हैं. वैज्ञानिकों ने वायरस में बदलाव और नए स्वरूप के बीच अंतर साफ करते हुए कहा कि कुछ राज्यों में कोरोना को लेकर उचित तौरतरीका नहीं अपनाने के कारण शायद मामले बढ़ रहे हैं. वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि अगर सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन नहीं किया गया तो ज्यादा संक्रामक स्ट्रेन का प्रसार हो सकता है या फिर वायरस के यह मूल स्वरूप की जगह ले सकता है. 

हैदराबाद स्थित सीएसआईआर-कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र (Cellular and Molecular Biology) ने यह अध्ययन पेश किया है. संस्थान के निदेशक और अध्ययन के सह लेखक राकेश मिश्रा ने कहा कि 6017 जीनोम बदलाव के डाटा विश्लेषण से कोरोना वायरस के 7,684 बदलावों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है. मिश्रा ने कहा कि इसका ये मतलब नहीं है कि देश में कोरोना वायरस के 7,000 स्वरूप हैं.

इसका बस ये मतलब है कि अपेक्षा के अनुरूप वायरस के स्वरूप में बदलाव हुआ है और हमने इन बदलावों का दस्तावेजीकरण किया है.अभी यह कह पाना कठिन है कि देश में वायरस के कितने स्वरूप हैं. विषाणु विज्ञानी उपासना रे ने बताया कि वायरस के स्वरूप में बदलाव का मतलब न्यूक्लिक एसिड बेस या अमीनो एसिड कण में बदलाव से है. इसमें परिवर्तन को स्वरूप बदलना कहते हैं।

रे ने कहा कि बदलाव वाले सभी वायरस हमेशा कायम नहीं रह पाते. उनमें से कुछ खत्म हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि कोविड-19 में बदलाव कोई नयी बात नहीं है। आबादी के बीच वायरस जितने लंबे समय तक रहता है और जितना इसका प्रसार होता है, इसमें उतना ही बदलाव होता है और स्वरूप भी परिवर्तित होता है. CCMB के अध्ययन में पाया गया कि कई देशों में खौफ पैदा करने वाले नए स्वरूप के मामले भारत में बहुत कम आए हैं. इसमें ‘ई484 के’ और ‘एन501वाई’ वैरिएंट भी हैं.

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नए वैरिएंट की कम मौजूदगी का एक कारण यह भी हो सकता है कि पर्याप्त सीक्वेंसिंग नहीं हुई है. वायरस के नए स्वरूप का सटीक ढंग से पता लगाने के लिए देश में कोरोना वायरस के जीनोम अनुक्रमण का और ज्यादा काम करने की जरूरत है.विषाणु विज्ञानी शाहिद जमील ने कहा कि ‘जीआईएसएआईडी’ डाटाबेस में भारत से कोविड-19 के 5261 अनुक्रमण को दर्ज कराया गया है. ‘जीआईएसएआईडी’ विज्ञान क्षेत्र की एक पहल है जिसमें कोविड-19 महामारी के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस के अनुक्रमण का डाटा मुहैया कराया जाता है.

अशोक विश्वविद्यालय में त्रिवेदी स्कूल ऑफ बायोसाइंसेज के निदेशक जमील ने कहा कि 1.1 करोड़ मामलों की पुष्टि के साथ अनुक्रमण दर 0.05 प्रतिशत है. इसे देखते हुए कहा जा सकता है बदलाव पर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है.

 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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