नई दिल्ली: चीनी सामान के बारे में हिंदुस्तान में एक कहावत है- ‘चले तो चांद तक, न चले तो रात तक.’ कुछ ऐसा ही हाल चीन में बने सैन्य साजो सामान (Chinese Military Equipments) खरीदने वाले देशों का हो चुका है, क्योंकि पिछले कुछ सालों में चीन से इन देशों ने जितने भी सैन्य साजो सामान खरीदे हैं, उनमें से अधिकतर कबाड़ बन चुके हैं. इस तरह के आधा दर्जन से अधिक देश चीन से सैन्य साजो सामान खरीदकर परेशान हैं.
बांग्लादेश, म्यांमार की नेवी परेशान
भारत के पड़ोसी बांग्लादेश (Bangladesh) ने हाल के समय में चीन के साथ पींगे खूब बढ़ाई हैं. ऐसे में कुछ चीनी सैन्य सामान भी खरीदे, जिसमें 1970 के दशक की मिंग क्लास टाइप 035जी सबमरीन (Submarines) भी शामिल हैं. बांग्लादेश ने दो सौ मिलियन डॉलर में दो सबमरीन खरीदे तो हैं, लेकिन ये कभी पानी में ढंग से उतर तक न पाईं. साल 2017 में बांग्लादेश ने इन्हें खरीदकर बीएनएस नोबोजात्रा और बीएनएस जोयजात्रा का नाम दिया था. लेकिन दोनों ही सबमरीन बांग्लादेश के समुद्री तट पर खड़ी हैं, क्योंकि पानी में उतरने लायक उनकी हालत ही नहीं है.
यही नहीं, इसी साल बांग्लादेश ने चीन से दो 053एच3 फ्रिगेट्स बीएनएस उमर फारूक, बीएनएस अबु उबैदाह को खरीदा है और दोनों के ही नेविगेशन सिस्टम और गन सिस्टम में खराबी है. इनका भी हाल वही है, जो सबमरीन का हुआ था. यानी ये भी समंदर किनारे पड़े पड़े कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं. म्यामांर का भी यही हाल है. म्यांमार सरकार को इसी साल भारत सरकार ने आईएनएस सिंधुघोष (INS Sindhughosh) को बतौर उपहार भेजा और ये बेहतरीन काम कर रहा है. वैसे, भारत की तरह ही म्यांमार में भी चीनी सामानों को लेकर एक कहावत है- “Tayokeset tayet-soke” इसे अंग्रेजी में कहेंगे -“Chinese machine; broken in a day” यानी कि चीनी मशीन एक ही दिन की मेहमान होती हैं.
नेपाल का भी बुरा हाल
नेपाल का हाल भी बांग्लादेश और म्यांमार जैसा ही है. नेपाल ने चीन से 6 वाई12ई और एमए60 एयरक्राफ्ट खरीदे थे. ये सभी एयरक्राफ्ट कभी आसमान में उड़े ही नहीं. खास बात ये है कि इन एयरक्राफ्ट को बांग्लादेश ने एक नजर में ही रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन नेपास ने इन्हें खराद लिया और अंजाम अब सामने है.
केन्या, अल्जीरिया, जॉर्डन और पाकिस्तान भी बेहाल
अफ्रीकी देश केन्या ने वीएन4 नाम के आर्मर्ड वेहिकल खरीदे थे. ये साल 2016़ की बात है. इन्हें चीवी कंपनी चोंगकिंग ने बनाया था. लेकिन इनके ट्रायल के दौरान इनमें चीनी सेल रिप्रेजेंटेटिव ने बैठने तक से इनकार कर दिया और फिर टेस्टिंग के दौरान ही केन्या के कई सैन्यकर्मी इसमें मारे गए. कुछ ऐसा ही हाल अल्जीरिया के खरीदे सीएच-4बी ड्रोन का है. जो 2013 में खरीदे गए और अभी दुर्घटनाग्रस्त होकर सब के सब जमीन पर हैं. वहां, जॉर्डन ने 6 ड्रोन खरीदे थे. जिन्हें उसने परेशान होकर सेल लिस्ट में डाल दिया है. ये ड्रोन 2016 में खरीदे गए थे, लेकिन 2019 से सेल लिस्ट की शोभा बढ़ा रहे हैं. वहीं पाकिस्तान जो चीन का बेहद करीबी दोस्त है, वो भी घटिया चीनी सामानों से परेशान है.

