covid oxygen level: COVID-19: डॉक्टर्स के इन टिप्स से आप घर बैठे करें शरीर में ऑक्सीजन लेवल और लंग्स की देखभाल – lung or breathing involvement in covid doctor warns people to not to panic due to oxygen

कोरोनावायरस के इनफेक्शन (coronavirus infection) की शुरुआत से ही इसका असर हमारे फेफड़ों पर होता है। उसी वजह से डॉक्टर मरीजों को ऑक्सीमीटर (oxymeter) की मदद से अपने ऑक्सीजन लेवल (oxygen levels) पर निगरानी रखने की सलाह देते आए हैं, ताकि किसी भी गंभीर स्थिति को वक्त रहते नोटिस किया जाए और उसका उपचार हो सके। लेकिन जब हमें सांस लेने में दिक्कत आने लगती हैं तो ये लड़ाई जीतना किसी के लिए भी आसान नहीं होता है। सांस लेना हम सभी के लिए हर क्षण अनिवार्य है और कोविड-19 की दूसरी वेव में ऑक्सीजन ही ज्यादातर मौत की वजह बनती जा रही है। कोरोना काल में सांसें सबसे महंगी हो चुकी हैं और यही कारण है कि ज्यादातर लोगों ने ऑक्सीजन सिलेंडर का स्टॉक तक करना शुरू कर दिया है, क्योंकि अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडरों की भारी कमी देखने को मिल रही है।

बहरहाल, यहां हम आपको एक सही जानकारी देते हैं जिसमें आपको ऑक्सीजन को लेकर इतना परेशान होने की जरूरत नहीं होगी। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान एम्स (AIIMS) के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने लोगों को नहीं घबराने की सलाह दी है। उन्होंने कहा, ‘भले ही आपका ऑक्सीजन सैचुरेशन 90 और उससे अधिक हो, लेकिन आपको इसे 98-99 तक नहीं ले जाना होगा। यदि आप इसे 92-93 तक मैनेज करते हैं तो यह काफी अच्छा है।’
(फोटो साभार: istock by getty images)

​घर पर इस तरह से करें सांसों की देखभाल

कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में पल्मोनरी मेडिसिन एंड स्लीप मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. एस.पी. राय का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को घबराना नहीं चाहिए और इस संकट की घड़ी में उन्हें अपने spo2 यानी ऑक्सीजन लेवल की निगारनी करनी चाहिए।

आमतौर पर पहले 4-5 दिनों में किसी को बुखार, खांसी, कमजोरी, हल्की सांस फूलने के अलावा कोई और समस्या नहीं होती है। ऐसे में हर किसी को दिन में दो से तीन बार अपना SpO2 लेवल जांचना चाहिए। यदि SpO2 लेवल 95% से कम हो जाता है, तो यह माइल्ड यानी हल्के निमोनिया (pneumonia) के लक्षण होने का इशारा करता है। ऐसे में आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

​ऑक्सीजन लेवल की जांच के बाद करें वॉक

डॉक्टर के मुताबिक, जब भी आप अपने ऑक्सीजन लेवल की जांच करते हैं तो इसके बाद आपको 6 मिनट की वॉक भी करनी चाहिए, ताकि बाद में फिर से SpO2 की जांच की जा सके। टहलने के पहले यदि आपका ऑक्सीजन लेवल 96 था और वॉक करने के बाद ये 90% तक चला गया तो इसका मतलब है आपके फेफड़ सही से काम नहीं कर रहे और अगर ऐसा होता है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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​किन्हें है अस्पताल में भर्ती होने की ज्यादा जरूरत

यदि spo2 लेवल 90-95% के बीच है तो इसका मतलब है कि आपको COVID निमोनिया दोनों के लक्षण हैं। ऐसे मामलों में उन लोगों को बहुत ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है जो मधुमेह, लंग्स इशूज, अस्थमा, आईएलडी या हृदय (cardiac), गुर्दे (kidney issues) की समस्याओं से पीड़ित हैं। विशेष रूप से 60 वर्ष की आयु वाले लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। ऐसे लोगों को अगर जरा सी भी कोई गंभीर समस्या होती है तो उन्हें अस्पताल में भर्ती करना चाहिए।

अगर डॉक्टर ऐडिमट होने की सलाह नहीं देता है या फिर ऊपर दी गई कोई भी अन्य बीमारी व्यक्ति को नहीं है, तब भी उसे अपने ऑक्सीजन लेवल को लेकर सावधान रहना चाहिए और Spo2 पर निगरानी रखनी चाहिए।

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​क्या पेट के बल लेटने से फेफड़ों को फायदा होगा?

जांच के अलावा आप अपने ऑक्सीजन लेवल में घर बैठे सुधार भी कर सकते हैं। पेट के बल लेटने को प्रवण स्थिति (Prone position) कहा जाता है, जो फेफड़ों के ऑक्सीजन लेवल को इंप्रूव करने में मददगार बताई जाती है। हालांकि, मोटे लोगों का प्रवण स्थिति का पालन करना मुश्किल होगा, इसलिए ऑक्सीकरण (oxygenation) में सुधार के लिए उन्हें हर दाहिने हाथ की तरफ सोने और दो घंटे में बाएं तरफ इसे बदलने की सलाह दी जाती है। इस पोजिशन में लेटने की उन्हें खासतौर पर सलाह दी जाती है जिनका ऑक्सीजन लेवल 90-95% के बीच हो या फिर उससे नीचे तक जाता हो।

पल्मोनोलॉजी, अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई की कंसल्टेंट डॉ. जयलक्ष्मी टीके का कहना है कि मोटापे से पीड़ित मरीजों को सांस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। ‘मोटे लोगों को ऑक्सीजन लेवल के कम होने से अधिक जोखिम होता है और इसके अलावा उनमें OSA या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया नाम का विकार भी हो सकता है।’ जानकारी के लिए आपको बता दें कि OSA नींद के विकारों में से एक है, जिसमें सोने के दौरान सांस लेने में बार-बार रुकावट होती है।

​COVID रोगी ऐसे करें अपने लंग्स की देखभाल

covid-
  • धूम्रपान यानी स्मोकिंगसे हर कीमत पर बचने की कोशिश करें।
  • ब्रीदिंग एक्सरसाइज और कपालभाति जैसे प्राणायाम को अपने डेली रूटीन में शामिल करें। ये सब चीजें लोग आसानी से इंटरनेट पर देखकर घर पर ही कर सकते हैं।
  • पुरानी बीमारी वाले मरीजों को ठीक होने के बाद COVID, फ्लू 6 – 8 सप्ताह के लिए टीका लगवाना चाहिए।
  • COVID प्रोटोकॉल जैसे मास्क, सैनिटाइजिंग, मास्किंग और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना चाहिए।
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  • फेफड़ों से जुड़ी समस्या से जूझ रहे मरीजों को ज्यादा खतरा?

    फेफड़ों से संबंधित बीमारियां जैसे अस्थमा, सीओपीडी, लंग्स फाइब्रोसिस, लंग्स कैंसर (lung cancer), तपेदिक (tuberculosis) और भी कई तरह के लंग इनफेक्शन्स कोविड संक्रमण के साथ जोखिम भरे हैं। दुनिया भर में तमाम लोग ऐसे हैं जो मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप (Hypertension), हृदय (Cardiac), गुर्दे की बीमारी (Renal disease) कमजोर इम्यूम सिस्टम का शिकार हैं, ये बीमारियां कोविड मरीजों की परेशानी और बढ़ाती हैं। डॉ. जयलक्ष्मी इस बात पर भी जोर देती हैं कि ऑक्सीमीटर में लो Spo2 रीडिंग खतरे का संकेत नहीं हो सकती लेकिन वह व्यक्ति श्वसन या पल्मोनरी की समस्या से ग्रसित हो सकता है।

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