covishield booster dose: क्या जरूरी है Covishield वैक्सीन की तीसरी डोज? बूस्टर डोज से क्या होगा फायदा? नए शोध में हुआ खुलासा – study reveals that 3rd dose of astrazeneca covishield covid vaccine raises immunity to peak

​वैक्सीन की इम्यूनिटी को बूस्ट करेगा तीसरा डोज

ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजनेका की कोविड वैक्सीन का निर्माणा भारत स्थित सीरम इंस्टीट्यूट में बनाया जा रहा है जिसे दुनियाभर में कोविशील्ड (Covishield) के नाम से जाना जाता है। पिछले महीनों में किए गए कई अध्ययनों से पता चला था कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन की दूसरी खुराक को देर से लेने पर इम्यून सिस्टम जबरदस्त रिस्पॉन्स देता है और काफी लंबे वक्त तक असरदार होती है। नए क्लीनिकल ऑब्जर्बेशन के अनुसार, तीसरा बूस्टर वैक्सीन की इम्यूनिटी और इसकी प्रभावकारिता दर को बूस्ट करने में मदद करेगी।

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​क्या हमें वैक्सीन के बूस्टर डोज की जरूरत है?

म्यूटेशन के बाद जब आए दिन ही कोविड-19 के नए-नए वेरिएंट सामने आ रहे हैं, तो वायरोलॉजिस्ट और महामारी विज्ञानी (epidemiologists) तेजी से बूस्टर शॉट्स पर जोर दे रहे हैं। ताकि वैक्सीन के जरिए शरीर के अंदर हमेशा एंटीबॉडीज बनी रहे।

अधिक से अधिक लोगों को बूस्टर शॉट्स मिलने से हर्ड इम्यूनिटी भी बनी रहेगी और सभी का इम्यून सिस्टम घातक वायरस के खिलाफ अटैक करने में सक्षम रहेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि बूस्टर डोज से हम कोरोना संक्रमण से लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेंगे।

​क्यों जरूरी होगी तीसरी डोज?

मालूम हो कि कोविशील्ड वैक्सीन को अल्फा वेरिएंट (SARS-COV-2 स्ट्रेन) के खिलाफ 81-90% से अधिक प्रभावी पाया गया है। डेल्टा के खिलाफ वैक्सीन की प्रभावकारिता 64-70% तक है। ऐसे में कुछ स्तरों तक नए वेरिएंट के खिलाफ बूस्टर या तीसरी खुराक की उपलब्धता पर जोर दिया जाएगा।

वैक्सीन के नए शोध के लीड इंवेस्टिगेटर प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि ये सच में महत्वपूर्ण है। स्टडी का ये डेटा दिखाता है कि हम ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजेनेका वैक्सीन की एक और डोज देकर रिस्पॉन्स को और भी बेहतर बना सकते हैं। इससे हम लंबे वक्त तक महामारी से बचे रहेंगे।

​इनके लिए फायदेमंद होगा तीसरा डोज

वैक्सीन का तीसरा डोज उनके लिए एक आशा की किरण साबित हो सकता है जिनका कुछ हेल्थ इशूज़ के चलते पहले से ही इम्यून सिस्टम कमजोर है। ऐसे लोगों के शरीर में वायरस से लड़ने के लिए पर्याप्त एंटीबॉडीज का निर्माण नहीं हो पाता।


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