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धीरेंद्र शास़्त्री की बढ़ी मुश्किलें, कलचुरी समाज अब करेगा बड़ी लड़ाई

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भोपाल। हैहयवंशीय भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन पर अर्नगल टिप्पणी करने वाले धीरेंद्र अब समस्याओं में घिरते दिख रहे हैं। शनिवार को भोपाल के एकता पार्क स्थित कल्चुरि भवन में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर के खिलाफ हैहयवंशी क्षत्रिय कलचुरि-कलार समाज ने धरना दिया। समाजजनों ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर एफआईआर और उनकी गिरफ्तारी की मांग के पोस्टर लेकर धरना देकर प्रदर्शन किया। मध्य प्रदेश कलचुरि सेना के अध्यक्ष कौशल राय ने बताया कि धीरेंद्र शास्त्री ने परशुराम जंयती के दिन भगवान सहस्रबाहु पर गलत टिप्पणी की है। वे माफी मांगें, सरकार उनपर एफआईआर करवाए और जेल भेजे। कलचुरी सेना का कहना है कि वे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलकर अपनी मांग रखेंगे। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

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kalchuri Samaj Protest Against Dhirendra Shastri


क्यों मचा है हंगामा
आपको बता दें कि पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी एक कथा में बयान दिया है कि क्षत्रिय अचानक से प्रकट कहां से हो जाते थे। इस पर थोड़ी सी चर्चा करते हैं, सहस्त्रबाहु जिस वंश से था, उस वंश का नाम था हैहय वंश, हैहय वंश के विनाश के लिए भगवान परशुराम ने फरसा अपने हाथ में उठाया। हैहय वंश का राजा बड़ा ही कुकर्मी, साधुओं पर अत्याचार करने वाला, स्त्रियों पर बलात करने वाला था। यह बयान सामने आते ही ताम्रकार, कलचुरी कलार समाज ने तीव्र विरोध जताया।
कौन हैं सहस्रार्जुन
गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के सुंदरकांड में दोहा क्रमांक 21 के बाद एक चौपाई है। जब हनुमान को बंदी बनाकर लंकेश की सभा में उपस्थित किया जाता है, तब हनुमान दशानन रावण की सभा में रावण का गर्वहरण करते हुए कहते हैं-
जानउँ मैं तुम्हारि प्रभुताई। सहसबाहु सन परी लराई॥
समर बालि सन करि जसु पावा। सुनि कपि बचन बिहसि बिहरावा॥

जिसका भावार्थ इस प्रकार है- मैं तुम्हारी प्रभुता को खूब जानता हूं सहस्रबाहु से तुम्हारी लड़ाई हुई थी और बालि से युद्ध करके तुमने यश प्राप्त किया था। हनुमान जी के (मार्मिक) वचन सुनकर रावण ने हंसकर बात टाल दी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार एक बार सहस्त्रबाहु अर्जुन ने रावण को युद्ध में बुरी तरह से परास्त कर दिया और बंदी बना लिया था। रावण के दादा ऋषि पुलस्त्य के कहने पर सहस्त्रबाहु ने रावण को मुक्त कर दिया था। महेश्वर, मंडला और जबलपुर में इसके साक्ष्य भी हैं। जबलपुर का त्रिपुरी कालांतर में कलचुरियों की राजधानी भी बनी थी।

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