राजनीति में आने वालों को अमूमन अपना दामन साफ रखना पड़ता है। अगल कभी हवस की आग में दाग लग भी जाये तो कुछ सालों में यह दाग मिट जाते हैं।
भोपाल। राजनीति में आने वालों को अमूमन अपना दामन साफ रखना पड़ता है। अगल कभी हवस की आग में दाग लग भी जाये तो कुछ सालों में यह दाग मिट जाते हैं। ऐसा ही कुछ कुछ दिन पहले हुआ है। मध्य प्रदेश में जारी की गई 39 प्रत्याशियों की सूची में एक नाम सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है। और वह है— ध्रुव नारायण सिंह। पार्टी ने उन्हें भोपाल मध्य सीट से प्रत्याशी बनाया है। वे पूर्व में प्रदेश उपाध्यक्ष थे और 2008 से 2013 तक मध्य सीट से विधायक रह चुके हैं। लेकिन पार्टी ने उन्हें 2013 और 2018 में टिकट नहीं दिया था। पार्टी में उनकी पूछपरख भी कम हो गई थी। हालांकि 2011 के पहले ध्रुव नारायण भाजपा के प्रभावी नेताओं में शुमार रहे हैं, उनके पिता गोविंद नारायण सिंह मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार के पूर्व राज्यपाल रहे हैं। लेकिन साल 2011 के बाद का वक्त उनके लिए सबसे खराब रहा, जबकि ध्रुव नारायण का दामन दागों से भर गया था। 16 अगस्त, 2011 को भोपाल में आरटीआई कार्यकर्ता 38 वर्षीया शहला मसूद की उनके घर के बाहर ही कार में हत्या कर दी गई थी। 19 अगस्त, 2011 को सीबीआई ने जांच शुरू की। सीबीआई जांच में एक अप्रत्याशित प्रेम त्रिकोण सामने आया। त्रिकोण में जाहिदा परवेज, शेहला मसूद और ध्रुवनारायण सिंह का नाम सामने आया। ध्रुवनारायण ने सीबीआई के सामने स्वीकारा था कि जाहिदा परवेज और शेहला मसूद से उनके जिस्मानी संबंध थे, लेकिन हत्या में उनकी भूमिका नहीं है। हालांकि सीबीआई ने ध्रुवनारायण पर कोई केस भी दर्ज नहीं किया था। अमेरिका में पढ़ी लिखी और भोपाल के सबसे अमीर बोहरा परिवारों में से एक में में दुल्हन बनकर आई जाहिदा इंटीरियर डेकोरेशन जैसे कई धंधे पानी करती थी। विधायक ध्रुवनारायण सिंह से जिस्मानी संबंध बनाकर उसने खुदके और परिवार के लिए कई लाभ उठाए। वहीं, आरटीआई एक्टिविस्ट शेहला मसूद इवेंट मैनेजमेंट कंपनी चलाती थी। उसने भी ध्रुव नारायण को अपना जिस्म सौंपकर कई लाभ कमाए। लाभ कमाने के लिए जिस्म सौंपने वाली जाहिदा और शेहला एक दूसरे की जानी—दुश्मन बन गईं। जाहिदा को लगने लगा कि शेहला के कारण उसका वर्चस्व ध्रुवनारायण में कम हो जाएगा। इसलिए भाड़े के गुंडे बुलाकर जाहिदा ने शेहला की हत्या करवा दी। बाद में जांच में यह बात भी सामने आई थी कि जाहिदा, ध्रुवनारायण के प्यार में पागल बन बैठी थी। जबकि ध्रुवनारायण ने यह स्वीकारा था कि उनमें सिर्फ शारीरिक संबंध ही थे।


