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diet tips for exam: एग्जाम सीजन में सिर्फ पढ़ाई नहीं बच्चों की डायट का भी रखें पूरा ध्यान – diet tips for children during exam season make your kids eat these foods

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diet tips for exam: एग्जाम सीजन में सिर्फ पढ़ाई नहीं बच्चों की डायट का भी रखें पूरा ध्यान – diet tips for children during exam season make your kids eat these foods

Published By Neha Seth | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

एग्जैम टाइम बच्चे के खाने का रखें पूरा ध्यानएग्जैम टाइम बच्चे के खाने का रखें पूरा ध्यान

नए साल के पहले 3 महीने यानी जनवरी से लेकर मार्च तक का समय एग्जाम सीजन माना जाता है। हर क्लास के फाइनल एग्जाम्स के साथ-साथ 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं भी इसी समय होती हैं। और ये बात तो पैरंट होने के नाते हर माता-पिता मानेंगे कि बच्चों का एग्जाम सिर्फ बच्चों का नहीं होता बल्कि साथ-साथ में माता-पिता का भी एग्जाम होता है। बच्चों की मैराथन पढ़ाई चल रही होती है, उन पर परफॉर्म करने का प्रेशर होता है, मेंटल स्ट्रेस लेवल काफी अधिक होता है। इन सबके साथ-साथ पैरंट्स की बच्चों से अपनी एक्सपेक्टेशन्स भी अलग से होती है।

एग्जाम टाइम पैरंट्स करें बच्चे की मदद

ज्यादातर पैरंट्स इस दौरान बच्चों की पढ़ाई में भी उनकी पूरी मदद करते हैं। उन्हें एक्स्ट्रा क्लास के लिए मदद की जरूरत हो या फिर कोचिंग या अलग टीचर की या फिर सेल्फ रीविजन में पैरंट्स की मदद की…बतौर माता-पिता हम हर तरह से बच्चों की मदद करने की कोशिश करते हैं। लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ एक और बेहद इम्पॉर्टेंट चीज है जिसका आपको ध्यान रखना है और वो है बच्चे की डायट। जी हां अगर आपका बच्चा एग्जाम की वजह से इतने सारे मेंटल स्ट्रेस से गुजर रहा है तो उसकी डायट भी उतनी ही अच्छी होनी चाहिए ताकि वो इन सारी चीजों के साथ cope up कर सके।

बच्चे की डायट का रखें पूरा ध्यान

एग्जाम सीजन में बच्चों की हंगर क्रेविंग्स यानी भूख को शांत करने के लिए आपको उन्हें किस तरह की हेल्दी चीजें खिलानी चाहिए इस बारे में हमने बात की डायटिशन्स से और उनके बताए टिप्स हम आपको यहां बता रहे हैं….

इन superfoods को डायट में करें शामिलइन superfoods को डायट में करें शामिलऐसे बहुत से फूड आइटम्स हैं जिन्हें हम रोज देखते हैं लेकिन हमें उनके फायदों के बारे में पता नहीं होता। ये सुपरफूड्स बेहद हेल्दी हैं और आपको आज ही इन्हें अपनी डायट में शामिल कर लेना चाहिए।

बच्चे को दें हेल्दी मील्स

बच्चे का मन पढ़ाई में लगे इसके लिए आपके ब्रेन को एनर्जी की जरूरत होती है और वो एनर्जी आपको सिर्फ हेल्दी और बैलेंस्ड डायट से ही मिल सकती है। आपके बच्चे के खाने में ऐसी चीजें होनी चाहिए जिससे उसका मेंटल अलर्टनेस बढ़े। साथ साथ में छोटी-छोटी भूख के लिए चिप्स या बिस्किट जैसी अनहेल्दी चीजों की बजाए उन्हें हेल्दी स्नैक्स का ऑप्शन दें जैसे- अखरोट, बादाम या फिर एनर्जी बार आदि।

दूध और डेयरी प्रॉडक्ट्स

बच्चे की डायट में दूध और दूध से बने डेयरी प्रॉडक्ट्स को शामिल करें। इसके अलावा स्प्राउट्स, टोफू, अंडा, चिकन, फिश, हेल्दी नट्स के अलावा दलिया, कीन्वा और होल वीट प्रॉडक्ट्स भी बच्चे को खिलाएं जिससे उन्हें अलर्ट रहने और पढ़ाई में फोकस करने में मदद मिले।

ब्रेन को बूस्ट करने वाली चीजें खिलाएं

अखरोट, फिश, फ्लैक्स सीड्स यानी अलसी, केला, काबुली चना, पालक और ब्रॉकली- ये कुछ ऐसे फूड आइटम्स हैं जिन्हें खाने से याददाश्त बढ़ती है, कॉन्सनट्रेट करने में मदद मिलती है और आपका ब्रेन भी बेहतर तरीके से फंक्शन करने लगता है। साथ ही साथ फास्ट फूड और जंक फूड का सेवन बिलकुल न करें क्योंकि इन चीजों को पचने में काफी ज्यादा समय लगता है।

परीक्षा के लिए एक्सपर्ट्स की राय

  • परीक्षा के लिए एक्सपर्ट्स की राय

    बोर्ड एग्जाम के समय बच्चे तरह-तरह की उलझनों में फंसे होते हैं। पढ़ाई का दबाव, परीक्षा की चिंता और परिवार वालों की उम्मीदों से घिरे बच्चों को परीक्षा के दिनों में क्या करना चाहिए, इसके लिए एनबीटी आपको बता रहा है एक्सपर्ट्स की राय।

  • बढ़ेगी बेचैनी, तो बिगड़ेगी दिनचर्या

    अक्सर देखने को मिलता है कि परीक्षा के दिनों में स्टूडेंट्स घंटों पढ़ाई करने के बाद भी परेशान रहते हैं। इससे न केवल उनकी बेचैनी बढ़ती है, बल्कि उनकी दिनचर्या भी प्रभावित होती है। प्रतिष्ठित मनोचिकित्सक डॉ. मुंदड़ा बताते हैं, ‘परीक्षा करीब आते ही हमारे पास ऐसे स्टूडेंट्स काफी आने लगते हैं, जिन्हें बैचैनी महसूस होती है। एक बार यह समस्या शुरू होने के बाद न सिर्फ पढ़ाई, बल्कि उनकी नींद और खानपान भी प्रभावित होता है। इसकी मुख्य वजह परीक्षा से पहले उसके परिणाम के बारे में सोचना होता है। इससे बचने के लिए नींद बेहद जरूरी है। स्टूडेंट्स कोशिश करें कि परीक्षा के दिनों में वे पर्याप्त नींद ले सकें। 6 से 8 घंटे की नींद लेने से वे परीक्षा हॉल में तरोताजा महसूस करेंगे।’

  • ग्रुप स्टडी करें, बशर्ते...

    परीक्षा की तैयारी के समय कई बार ग्रुप स्टडी काफी महत्वपूर्ण होती है, लेकिन किसके साथ ग्रुप स्टडी कर रहे हैं, यह देखा जाना भी जरूरी होता है। डॉ. सागर के मुताबिक, ग्रुप स्टडी उनके साथ ही करें, जिनकी तैयारी कमोबेश आप जितनी ही हो। ऐसा भी होता है जब ग्रुप में कुछ बच्चों की अधिक पढ़ाई हुई हो और कुछ की कम। ऐसे में कम पढ़ाई करने वालों को अधिक पढ़ लिए बच्चों के साथ सामंजस्य बैठाने में दिक्कत होती है। परीक्षा के दौरान ऐसे लोगों से भी दूर रहें, जो आपकी तैयारी के दौरान नीचा दिखाने की कोशिश करें।

  • जितना पढ़ें, ठोस पढ़ें

    विशेषज्ञों ने बताया कि कई बार परीक्षा पास आते ही स्टूडेंट्स अचानक से 10-17 घंटे पढ़ना शुरू करे देते हैं। घबराहट में कम समय में अधिक से अधिक सिलेबस को कवर करने के चक्कर में स्टूडेंट्स जो पढ़ते हैं, वह उन्हें ठीक से याद नहीं होता। मनोज मिश्र ने कहा, ‘स्टूडेंट्स को परीक्षा के आखिरी समय में पढ़ते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह जो पढ़े, ठोस पढ़े। सिलेबस खत्म करने के चक्कर में सब कुछ न पढ़ डाले। इससे तैयारी ठीक से नहीं हो पाती। बेहतर होगा कि स्टूडेंट्स पहले से ही थोड़ा-थोड़ा पढ़ते रहें।’

  • उम्मीदों का पहाड़, न लादे परिवार

    डॉ. सागर मुंदड़ा ने बताया कि हमारे देश में परीक्षा को अकैडमिक न मानकर, जीवन मान लिया जाता है। दूसरे बच्चों से तुलना करना और अच्छे नंबरों की चाह में अभिभावक कई बार अपने बच्चों पर उम्मीदों का पहाड़ लाद देते हैं। इससे बच्चा तनाव में आ जाता है। हर बच्चे की अलग तरह की खासियत होती है। उसके पढ़ने के तरीके से लेकर काम करने का ढंग अलग होता है। ऐसे में घर वालों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उनका बच्चा कैसे और किस माहौल में पढ़ सकता है। उसे बेहतर करने के लिए प्रेरित करें, लेकिन बहुत अधिक उम्मीद न पालें।

  • 12वीं के छात्र रहें सतर्क

    देवेंद्र शुक्ल ने कहा कि बारहवीं के स्टूडेंट्स को इस बार थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। शिक्षा विभाग ने इस बार साइंस के परीक्षा पैटर्न में बदलाव किया है। बदलाव की सभी जानकारियां बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। परीक्षा में उत्तर लिखने के लिए पहले बच्चों को अधिक ऑप्शन मिलते थे, जो इस साल कम हुए हैं। लेकिन स्टूडेंट्स को नए पैटर्न को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सिलेबस वही है, केवल पैटर्न में बदलाव किया गया है। बोर्ड की टेक्स्ट बुक के जरिए अच्छे से प्रैक्टिस करें, परिणाम बेहतर होंगे। साइंस में ध्वनि, लाइट, हीट इत्यादि चैप्टरों को अच्छे से तैयार कर लें। वहीं, बायलॉजी में डायग्राम ठीक से तैयार कर लेना बेहतर होगा।

  • मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से बचें

    तैयारी में ब्रेक लेना बेहद जरूरी है। लगातार पढ़ाई करते रहने से कई बार दिमाग में नई चीजें या कॉन्सेप्ट बैठते नहीं। इसके लिए बेहतर होगा कि हर दो घंटे पर एक ब्रेक जरूर लें। इस दौरान अपना पसंदीदा खेल खेल सकते हैं। आजकल ब्रेक मिलते ही बच्चे मोबाइल के इस्तेमाल में लग जाते हैं। इससे समय बर्बाद होने के अलावा ऊर्जा भी खत्म होती है। स्टूडेंट्स को चाहिए की तैयारी के दौरान किसी भी तरह के स्क्रीन ऐडिक्शन या उसके बहुत अधिक इस्तेमाल से बचें।

लिक्विड डायट पर भी रखें फोकस

पानी बेहद जरूरी है क्योंकि ये हमारे शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। इसलिए सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा हर दिन कम से 8-10 गिलास पानी पिए। पानी के साथ-साथ लिक्विड डायट भी बच्चे को दें जिसमें आप उन्हें मिल्कशेक, फ्रेश सूप, नींबू पानी, लस्सी, नारियल पानी जैसी चीजें भी दे सकती हैं। अगर आपका बच्चा बोर्ड एग्जाम की तैयारियां कर रहा है तो आप उन्हें 1 कप कॉफी या डार्क हॉट चॉकलेट भी बनाकर दे सकती हैं क्योंकि डायट में कैफीन ऐड करने से ऐक्टिव और अलर्ट रहने में मदद मिलती है।

स्मार्ट होना चाहिए बच्चे का स्नैक्स

सिर्फ ब्रेकफस्ट, लंच और डिनर ही नहीं बल्कि बच्चे का स्नैक्स भी हेल्दी होना चाहिए। इसलिए आप चाहें तो बच्चे को स्नैक्स के तौर पर फ्रेश फ्रूट्स, प्रोटीन बार, भुनी हुई मूंगफली, मखाना, रोस्ट किया हुआ चना या मूंगदाल भी खाने के लिए दे सकती हैं। अगर आपका बच्चा देर रात तक पढ़ाई करता है तो ये सारी चीजें उसके पास जरूर रखें ताकि भूख लगने पर वह मैगी या चिप्स जैसी जंक वाली चीजें खाने की बजाए इन हेल्दी स्नैक्स का सेवन करे।

बच्चा जाता है स्कूल तो यूं बनें जिम्मेदार पैरंट

  • बच्चा जाता है स्कूल तो यूं बनें जिम्मेदार पैरंट

    स्कूल में अपने बच्चे की गतिविधियों और उसके प्रदर्शन के बारे में जानना पैरंट्स की जिम्मेदारी होती है। बहुत से पैरंट्स इस जिम्मेदारी को समझने के बावजूद भी इसे सही से निभा नहीं पाते हैं। स्लाइडशो में जानें, कुछ खास टिप्स जो बना सकते हैं आपको जिम्मेदार पैरंट….

  • अपने बच्चे के टीचर्स से मिलें

    नियमित तौर पर अपने बच्चे के टीचर्स से मिलते रहें। इससे आपको बच्चे के प्रदर्शन, उसकी क्षमताओं के साथ-साथ उसकी कमजोरियों के बारे में भी पता चलेगा।

  • बच्चे के स्कूल से लौटने पर करें उससे बातचीत

    बच्चे के स्कूल से घर लौटने के बाद उससे बातचीत करें। उससे पूछें कि आज स्कूल में क्या खास हुआ। इसके साथ ही यह जानने की कोशिश भी करें कि स्कूल में बच्चे को किसी तरह की परेशानी का सामना तो नहीं करना पड़ रहा।

  • चेक करें बच्चे का स्कूल बैग

    बच्चे का स्कूल बैग रोज चेक करें, देखें कि जो किताबें और नोट्स वह स्कूल ले गया था, वो मौजूद हैं कि नहीं। बच्चा अगर लंचबॉक्स ले जाता है तो देखें कि उसने पूरा खाना खाया कि नहीं।

  • बच्चे की पढ़ाई का वक्त करें तय

    बच्चे की पढ़ाई का समय इस तरह से तय करें कि उसे खेलने और अन्य गतिविधियों के लिए भी समय मिल सके। इसके साथ ही बच्चे की पढ़ाई के समय को टुकड़ों में बांटने की कोशिश करें।

  • बच्चे को सिखाएं व्यवस्थित तरीके से रहना

    अपने बच्चे को व्यवस्थित तरीके से काम करना सिखाएं। उसे स्कूल बैग में चीजों को रखने से लेकर रोजमर्रा के कामों तक में व्यवस्थित तरीका अपनाने के लिए प्रेरित करें।

  • दूसरे पैरंट्स के साथ टच में रहें

    अपने बच्चे के साथ पढ़ने वाले बच्चों के पैरंट्स से नियमित तौर पर बातचीत करते रहें। इससे आपको बच्चे से जुड़ी और उसके स्कूल में होने वाली चीजों के बारे में पता चलता रहेगा।


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