-सीरो पॉजिटिविटी या सीरो इम्युनिटी एक ही पदार्थ और प्रक्रिया के दो नाम हैं। दरअसल, हमारे शरीर में रक्त के साथ ही एक अन्य तरल पदार्थ भी लगातार प्रवाहित होता रहता है। इस तरल पदार्थ यानी फ्लूइड को सीरम कहते हैं।
-सीरो इम्युनिटी की जांच करने के लिए रक्त से इस फ्लूइड यानी सीरम को अलग कर लिया जाता है और फिर इस सीरम में मौजूद अन्य पदार्थों और सूक्ष्म तत्वों की जांच की जाती है। यदि इस सीरम में ऐंटिबॉडीज पाई जाती हैं, जो वायरस को खत्म करने में प्रभावी होती हैं तो इसी सीरो इम्युनिटी कहते हैं।
सीरो इम्युनिटी क्या है?
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सीरम के अंदर क्या होता है?
-ब्लड के अंदर प्रवाहित हो रहे सीरम में ऐंटिबॉडीज, ऐंटिजन, हॉर्मोन्स, प्रोटीन और माइक्रोब्स हो सकते हैं। सीरम में आरबीसी (लाल रक्त कोशिकाएं) और डब्लूबीसी (श्वेत रक्त कोशिकाएं) नहीं होती हैं।
ऐंटिबॉडीज और इम्यून सेल्स
-शरीर में ऐंटिबॉडीज और इम्यून सेल्स बहुत ही बारीक अंतर के साथ दो अलग चीजें होती हैं। लेकिन दोनों का मकसद एक ही होता है कि शरीर को स्वस्थ रखा जाए और शरीर में बाहर से प्रवेश करनेवाले हानिकारक पैथोजन्स यानी बैक्टीरिया और वायरस को जल्दी से जल्दी खत्म किया जाए। ऐंटिबॉडीज हमारे शरीर में मौजूद सीरम के अंदर होती हैं और इम्यून सेल्स ब्लड के अंदर। ध्यान रहे कि सीरम ब्लड का ही पार्ट है।
इम्यून सेल्स
रक्त के साथ ही शरीर में बहता है सीरम
-इम्यून सेल्स को टी-सेल्स भी कहते हैं। ये वाइट ब्लड सेल्स यानी डब्लूबीसी से ही संबंधित होती हैं। इन सेल्स का काम शरीर में प्रवेश करनेवाले पैथोजेन्स को पहचानकर उन्हें मारने के लिए ऐंटिबॉडीज तैयार करना होता है। साथ ही ऐंटिबॉडीज के निर्मित होने तक ये सेल्स बैक्टीरिया और वायरस को शरीर में फैलने से रोकने का कार्य करती हैं।
-यानी अपनी सामर्थ्य के अनुसार, बैक्टीरिया और वायरस से लड़ती रहती हैं। इसके साथ ही वाइट ब्लड सेल्स उन संक्रमित सेल्स को खत्म करने का काम भी करती हैं, जिन्हें वायरस ने इंफेक्टेड कर दिया हो। ताकि ये सेल्स अन्य सेल्स में इस इंफेक्शन को ना फैलाएं।
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