नई दिल्ली: आपने इंसानों की भूख के किस्से तो कई बार सुने होंगे. लेकिन क्या आपने कभी जानवरों की भूख और कुपोषण की कहानी देखी है. पूरी दुनिया में हर रात करीब 69 करोड़ लोग भूखे पेट सोते हैं. लेकिन करोड़ों जंगली जानवरों की भी यही कहानी है. दुनिया में इस समय बड़े आकार के क़रीब 130 करोड़ जंगली जानवर हैं. लेकिन इंसानों के लालच ने इन जानवरों को भूखा मरने पर मजबूर कर दिया है.
कूड़ा और प्लास्टिक खाकर मर रहे हाथी
ऐसी ही कुछ तस्वीरें श्रीलंका (Srilanka) से आई हैं, जहां हाथियों (Elephants) का एक बड़ा दल कूड़े के ढेर में रोज़ अपने लिए खाना ढूंढता है. जिस जगह पर बड़ी मात्रा में कूड़ा जमा किया जाता है उसे लैंडफिल कहते हैं. श्रीलंका में एक ऐसा ही लैंडफिल है, जिसका नाम है अमपारा (Ampara Landfill). इस लैंडफिल के आस पास जंगल है जहां 200 से 300 हाथी रहते हैं और भूख से परेशान ये हाथी अक्सर इस कूड़े के ढेर में खाना ढूंढने आ जाते हैं और कई हाथी कूड़ा और प्लास्टिक खाकर मर भी जाते हैं. इन तस्वीरों ने पूरी दुनिया को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जो हाथी इंसानों से भी पहले से इस पृथ्वी का हिस्सा रहे हैं और जिन्हें कभी प्रकृति ने भूखा नहीं रहने दिया वो हाथी आज इतने मजबूर कैसे हो गए कि उन्हें इंसानों द्वारा फेंके गए कूड़े में अपना खाना ढूंढना पड़ रहा है. अब हाथियों को इस लैंडफिल (Landfill) से दूर रखने के लिए यहां एक खाई का निर्माण किया जा रहा है. लेकिन इंसानों ने जंगलों की ज़मीनों पर कब्ज़ा करके प्रकृति और अपने बीच एक ऐसी खाई का निर्माण कर लिया है, जिसमें एक ना एक दिन इंसानों का गिरना तय है.
ये इंसानों के इलाके में क्यों आते हैं?
पृथ्वी पर इंसानों का अस्तित्व 3 लाख वर्ष पुराना है जबकि हाथी यहां 6 करोड़ वर्षों से रह रहे हैं. हाथी शुद्ध शाकाहारी होते हैं. लेकिन अब इंसानों की भूख ने इन हाथियों के लिए वो वनस्पतियां छोड़ी ही नहीं हैं जिन्हें खाकर ये अपनी भूख मिटा सकें. करीब 200 वर्ष पहले तक 50 प्रतिशत पृथ्वी पर जंगल थे. लेकिन अब ये घटते घटते सिर्फ़ 31 प्रतिशत रह गए हैं और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इंसानों ने बड़े पैमाने पर जंगलों को काटकर ख़त्म कर दिया और जंगली जानवरों को अपना घर छोड़ना पड़ा. लेकिन आप सोच रहे होंगे कि श्रीलंका के ये हाथी तो जंगलों में रहते हैं और जंगलों में तो अब भी इनके लिए भरपूर खाना पीना होना चाहिए, फिर ये हाथी इंसानों के इलाके में क्यों आते हैं.
Heat Stroke का भी हो रहे शिकार
इसकी वजह ये है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से जंगलों में उगने वाले पेड़ पौधे और घास धीरे धीरे अपनी गुणवत्ता खोने लगे हैं. इनमें अब उतना प्रोटीन नहीं बचा है जो शाकाहारी जानवरों को पर्याप्त पोषण दे सके. उदाहरण के लिए एक हाथी एक दिन में औसतन 130 किलो भोजन करता है और दिन का 80 प्रतिशत समय हाथी अपने लिए खाना ढूंढते हुए ही बिताते हैं. एक हाथी को एक दिन में पीने के लिए 200 लीटर पानी की ज़रूरत होती है. लेकिन अब जंगलों में न तो पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त पेड़ पौधे बचे हैं और न ही तालाब और पोखर जिनसे हाथी अपनी भूख और प्यास मिटाते हैं. जो हाथी जंगलों से बाहर नहीं आ पाते उन्हें कई बार गर्मी के दिनों में पानी की कमी हो जाने की वजह से Heat Stroke हो जाता है और इससे कई बार हाथी मर भी जाते हैं.
ऐसे में ये हाथी परेशान होकर जंगलों से बाहर आ जाते हैं और इंसानों की बस्तियों में अपने लिए भोजन ढूंढने लगते हैं और यहीं से इंसानों और जानवरों के बीच एक द्वंद की शुरुआत हो जाती है.
श्रीलंका से आए वीडियो में जंगल के बीच सड़क पर एक हाथी खड़ा है, ये हाथी भूखा है और इस भूख की वजह ये हाथी यहां से आने जाने वाली गाड़ियों को रोककर उनमें सवार लोगों से इशारे से खाना मांगता है, जो लोग खाना दे देते हैं उन्हें हाथी आगे बढ़ने देता है.

