dna analysis fake followers racket on social media | DNA ANALYSIS: सोशल मीडिया पर नकली फॉलोअर्स का ‘गोरखधंधा’

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर आप अक्सर लोगों का महत्व, उनकी लोकप्रियता और उनके प्रभाव को इससे आंकते हैं कि उनके फॉलोअर्स की संख्या कितनी है. जिनके ज्यादा फॉलोअर्स होते हैं उनकी बातों को आप ज्यादा महत्व देते होंगे और जिनके कम फॉलोअर्स होते हैं उन्हें आप कम लोकप्रिय मानते होंगे. लेकिन अगर आपको ये पता चले कि जिन बड़े-बड़े स्टार्स और सेलिब्रिटीज को आप फॉलो करते हैं, जिनकी बातें आपके मन पर गहरा प्रभाव डालती हैं, उनके फॉलोअर्स नकली और खरीदे हुए हैं तो आपको बहुत निराशा होगी.

इसलिए अब हम आपको सोशल मीडिया के उस बड़े घोटाले के बारे में बताएंगे जिसका पर्दाफाश मुंबई पुलिस ने किया है. इस घोटाले के तहत सोशल मीडिया के बड़े-बड़े प्रभावशाली लोग दूसरों पर अपना रौब डालने के लिए बड़ी संख्या में नकली फॉलोअर्स खरीद रहे थे. ये एक बिजनेस मॉडल है जिसके तहत जिस व्यक्ति के जितने ज्यादा फॉलोअर्स होंगे वो व्यक्ति किसी प्रोडक्ट के प्रचार या किसी के पक्ष में बात कहने के लिए उतने ही ज्यादा पैसे लेगा. ये लालच कैसे दुनिया के 396 करोड़ लोगों को ठगने वाले घोटाले में बदल गया? ये कैसे हुआ? इसकी शुरूआत कब हुई? और इसका पर्दाफाश कैसे हुआ? ये आपको जानना चाहिए.

महाराष्ट्र पुलिस ने इस घोटाले का पर्दाफाश करते हुए दावा किया है कि सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स से लेकर, लाइक्स, कमेंट्स, सब्सक्राइबर्स, रीट्वीट्स और व्यूज तक को खरीदा जा रहा है.

दावा तो ये भी है कि बॉलीवुड समेत कई बड़ी हस्तियों ने सोशल मीडिया पर अपनी लोकप्रियता और प्रभाव बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में नकली फॉलोअर्स खरीदे हैं. इतना ही नहीं सोशल ​मीडिया पर दुष्प्रचार करने के लिए Bots का भी इस्तेमाल हो रहा है. ये एक तरह के इंटरनेट रोबोट्स होते हैं जो किसी ऐसी खबर या कंटेंट को आपकी न्यूज फीड में सबसे ऊपर प्रमोट करने में सक्षम होते हैं जिनका मकसद किसी विषय या व्यक्ति के खिलाफ दुष्प्रचार करना होता है. यानी अब सिर्फ इंसानों के जरिए ही नहीं, बल्कि रोबोट्स के जरिए भी फेक न्यूज फैलाई जा सकती है.

फॉलोअर्स का बिजनेस
अब आप ये समझिए कि इस पूरे घोटाले का खुलासा कैसे हुआ. 11 जुलाई को बॉलीवुड की एक सिंगर जिनका नाम है, भूमि त्रिवेदी, उन्होंने मुंबई पुलिस से ये शिकायत की थी कि उनके नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल करके इंस्टाग्राम पर एक नकली अकाउंट बनाया गया है और ये नकली अकाउंट बनाने वाला ये दावा कर रहा है कि यही भूमि त्रिवेदी का ऑफिशियल अकाउंट है. पुलिस ने जब इस मामले की जांच की तो पता चला कि भूमि त्रिवेदी के नाम पर नकली अकाउंट बनाकर एक व्यक्ति न सिर्फ फॉलोअर्स की संख्या बढ़ा रहा था बल्कि इस सिंगर के नाम पर कई तरह की बिजनेस डील भी कर रहा था.

इस मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अभिषेक दवड़े नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया जो फॉलोअर्स कार्ट नाम की एक कंपनी के लिए काम करता था.

जांच के दौरान पता चला कि ये कंपनी 80 अलग-अलग श्रेणियों में 700 से ज्यादा सर्विसेज मुहैया कराती थी. ये सर्विसेज यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर, टेलीग्राम, लिंक्डइन, स्पोटिफाई और साउंड क्लाउड समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन गेम्स एप्लीकेशंस जुड़ी थी.

फॉलोअर्स कार्ट नाम की ये कंपनी इन प्लेटफॉर्म्स पर अपने ग्राहकों को नकली लाइक्स, कॉमेंट्स, व्यूज, रीट्वीट्स, सब्सक्राइबर्स और फॉलोअर्स उपलब्ध कराती थीं और इसके बदले में डॉलर्स में फीस वसूली जाती थी.

इस कंपनी का नेटवर्क लगभग पूरी दुनिया में फैला था और भारत के अलावा जिन देशों में ये कंपनी प्रमुखता से काम कर रही थी उनके नाम हैं, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और इजरायल. इसके अलावा भी कई देशों के नाम हैं. जांच में ये भी पता चला है कि ये कंपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सर्वर्स से भी छेड़छाड़ करती थी, जिससे लाइक्स, कॉमेंट्स और फॉलोअर्स की संख्या अचानक बढ़ने लगती थी. मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को पता चला है कि इस पूरे घोटाले के तार फ्रांस से भी जुड़े हुए हैं और अब जांच एजेंसी ने फ्रांस की सरकार को एक चिट्ठी लिखकर इस मामले में मदद मांगी है. इसके अलावा इस मामले में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है जिसका नाम है कासिफ मंसूर, ये शख्स पेशे से एक सिविल इंजीनियर है और वो एक वेबसाइट ऑपरेट करता था जिसका नाम है, WWW.AMVSMM.Com.

पुलिस के सूत्रों का कहना है कि कासिर्फ मंसूर इस घोटाले में एक बड़ा खिलाड़ी है और इसकी कंपनी भी नकली फॉलोअर्स उपलब्ध कराने का काम करती थी और इसके जरिए इसने करोड़ों रुपये की कमाई की थी.

अब बात उन लोगों की जिन पर नकली फॉलोअर्स खरीदने के आरोप लग रहे हैं. इस समय पुलिस के रडार पर 200 से ज्यादा सेलिब्रिटीज हैं. इनमें बॉलीवुड स्टार्स से लेकर, कोरियोग्राफर्स, मशहूर​ टिकटॉक स्टार, बॉ​डी बिल्डर्स और दूसरे सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स शामिल हैं. सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स उन्हें कहते हैं जिनके फॉलोअर्स की संख्या लाखों और करोड़ों में होती है और जिनके द्वारा कही बातों का असर एक बड़ी जनसंख्या पर पड़ता है.

इन सेलि​ब्रिटीज पर आरोप
मुंबई पुलिस की जांच के आधार वर्ष 2019 में आई एक रिपोर्ट भी है जिसे दि इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेपररी म्यूजिक परफॉर्मेंस यानी आईसीएमपी ने तैयार किया था. इस रिपोर्ट में बॉलीवुड के उन 10 सेलिब्रिटीज का जिक्र था जिन पर नकली फॉलोअर्स खरीदने के आरोप हैं. इनमें से दो के नाम हैं, प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण. इस रिपोर्ट का दावा है कि इन दोनों अभिनेत्रियों के 48 प्रतिशत फॉलोअर्स नकली हैं या फिर इंटरनेट बोट्स हैं. हालांकि आईसीएमपी का कहना है कि अब ये रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है, क्योंकि अब ये आउट ऑफ डेट हो चुकी है.

लेकिन इसी रिपोर्ट का दावा था कि दीपिका पादुकोण सोशल ​मीडिया पर एक पोस्ट करने के लिए 1 लाख 90 हजार डॉलर यानी करीब 1 करोड़ 42 लाख रुपये लिया करती थीं जबकि प्रियंका चोपड़ा को एक पोस्ट करने के लिए 2 करोड़ रुपये से ज्यादा मिलते थे. इस समय ट्विटर और इंस्टाग्राम पर मिलाकर प्रियंका चोपड़ा के 7 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स फॉलोवर्स हैं जबकि इन दोनों प्लेटफॉर्म्स पर दीपिका पादुकोण के फॉलोअर्स की संख्या भी करीब करीब 7 करोड़ ही है.

करोड़ों रुपए की कमाई
अब अगर नकली फॉलोअर्स की बात सच है तो ये अपने आप में एक बिजनेस मॉडल है जिसके तहत कुछ सेलिब्रिटीज अपने फॉ​लोअर्स की संख्या को बढ़ा चढ़ा कर दिखाते हैं और फिर किसी प्रोडक्ट या कंटेट को प्रमोट करने के नाम पर या किसी के पक्ष में कुछ लिखने के नाम पर करोड़ों रुपये कमाते हैं. हालांकि इस मामले में हमने प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण को भी मेल भेजकर उनसे उनका पक्ष पूछा है. 

प्रियंका चोपड़ा के मैनेजर ने हमसे कहा कि वो हमें वो ई मेल आईडी देंगे जिस पर मेल करके हम उनकी प्रतिक्रिया जान सकते हैं. लेकिन अभी तक हमें प्रियंका चोपड़ा की टीम ने कोई ई मेल आईडी नहीं दी है. जबकि दीपिका पादुकोण के मैनेजर ने हमसे कहा कि वो हमारा शो देखकर इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे. कुल मिलाकर मुंबई पुलिस अब ऐसी 60 से ज्यादा कंपनियों की जांच कर रही है जिन पर नकली फॉलोअर्स बेचने के आरोप हैं.

इसे आप इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला भी कह सकते हैं क्योंकि इस घोटाले के शिकार होने वालों की संख्या हजार या लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में है. सरल शब्दों में कहें तो इस घोटाले का शिकार पूरी दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी हो चुकी है. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों की संख्या अब 396 करोड़ है. ये 750 करोड़ आबादी वाली दुनिया का 52 प्रतिशत है. लेकिन इन 396 करोड़ लोगों के साथ पिछले लंबे समय से एक धोखा किया जा रहा है.

सेलिब्रिटीज से भी पूछताछ
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच अब तक 21 लोगों से पूछताछ कर चुकी है. और आने वाले दिनों में पुलिस उन बाकी सेलिब्रिटीज से भी पूछताछ कर सकती है जिन पर नकली फॉलोअर्स खरीदने के आरोप है. मुंबई पुलिस ने इस पूरी जांच को दो हिस्सों में बांटा है. पहले हिस्से में उन कंपनियों की जांच की जाएगी जो नकली फॉलोअर्स उपलब्ध कराती हैं और दूसरे हिस्से में उन सेलिब्रिटीज और इंफ्लूएंसर्स की जांच होगी जो इन नकली फॉलोअर्स के दम पर सोशल मीडिया पर अपना प्रभाव बढ़ाते थे.

मुंबई पुलिस एक और ऐसी कंपनी के अधिकारियों से पूछताछ कर रही है जिस पर इसी तरह के आरोप लगे हैं. इस कंपनी का नाम है Chtrbox. ये कंपनी सोशल ​मीडिया के इंफ्लूएंसर्स की मार्केटिंग का काम करती है. आज मुंबई पुलिस ने इस कंपनी के सीईओ प्रणय स्वरूप और उनकी पत्नी से भी पूछताछ की है. हालांकि इस कंपनी के सीईओ का दावा है कि पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए नहीं, बल्कि जांच में तकनीकी सहायता देने के लिए बुलाया है. लेकिन क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने Zee News को बताया कि इन लोगों से सीआरपीसी की धारा 160 के तहत पूछताछ की गई है.

इस कंपनी पर पिछले साल इंस्टाग्राम के 5 करोड़ यूजर्स का डेटा लीक करने का भी आरोप लगा था. इसके अलावा मुंबई पुलिस बॉलीवुड की एक ऐसी पीआर एजेंसी की भी जांच कर रही है जिस पर नकली फॉलोअर्स उपलब्ध कराने के आरोप है. मुंबई पुलिस कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से डेटा मंगाकर इस बात की जांच कर रही है इन सेलिब्रिटीज के कितने फॉलोअर्स नकली और कितने असली हैं.

इसलिए किया जाता है नकली फॉलोअर्स का इस्तेमाल
अब एक बार फिर संक्षेप में समझ लीजिए कि आखिर इन नकली फॉलोअर्स  का इस्तेमाल किया क्यों जाता है. असल में कोई भी कंपनी अपने ब्रांड्स को उन सेलिब्रिटीज और इंफ्लूएंसर्स से प्रमोट कराना चाहती हैं जिनके फॉलोअर्स  की संख्या ज्यादा होती है. ऐसे में ये विज्ञापन या कंटेंट करोड़ों लोगों तक पहुंचता है और इसके बदले में मिलने वाली मोटी फीस के लालच में ही ये सेलिब्रिटी, फेक फॉलोअर्स खरीदते हैं. जब हमने इस मामले पर और रिसर्च की तो हमें इन कंपनियों का वो रेट कार्ड भी मिल गया जिससे पता चलता है कि नकली फॉलोअर्स और नकली लाइक्स और कॉमेंट्स के लिए कितने पैसे लिए जाते थे.

उदाहरण के लिए फॉलोअर्स कार्ट नाम की कंपनी, एक नकली फॉलोअर के लिए 187 रुपये लेती थी, जबकि एक लाइक की कीमत है 117 रुपये. इसी तरह इंस्टाग्राम पर 190 रुपये में एक कॉमेंट खरीदा जा सकता था. लिंक्डइन पर एक नकली फॉलोअर हासिल करने की कीमत 700 रुपये रखी गई थी तो यू ट्यूब का एक नकली सब्सक्राइबर करीब 4 हजार रुपये में पड़ता था और इसी प्लेटफॉर्म पर एक नकली लाइक की कीमत रखी गई थी 209 रुपये. फेसबुक पर एक लाइक की कीमत 133 रुपये और ट्विटर पर एक नकली फॉलोअर हासिल करने की कीमत रखी गई थी 243 रुपये, जबकि इस कंपनी के जरिए ट्विटर पर 3 हजार रुपये खर्च करके एक नकली कॉमेंट हासिल किया जा सकता था.

लोकप्रियता का अर्ध सत्य
लेकिन हैरानी की बात ये है कि ज्यादातर मामलों में ये नकली फॉलोअर्स इंसान नहीं बल्कि बोट्स होते हैं और जब ये आपको फॉलो करते हैं तो उसके बाद आप इन्हें फॉलो बैक नहीं कर सकते. इसके अलावा घोस्ट फॉलोअर्स का भी इस्तेमाल किया जाता है. ये वो सोशल मीडिया अकाउंट होते हैं जो लंबे समय से सक्रिय नहीं होते और इनका इस्तेमाल सिर्फ फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाने के लिए किया जाता है. इन्हीं नकली फॉलोअर्स  का इस्तेमाल करके फेक न्यूज फैलाई जाती है, लोगों को ट्रोल किया जाता है और दुष्प्रचार किया जाता है.

इसलिए अब आप समझ गए होंगे कि सोशल मीडिया पर जो आप देखते हैं, जिन्हें आप फॉलो करते हैं जिनकी बातों को आप लाइक करते हैं जिनके अकाउंट्स और यू ट्यूब चैनल्स को आप सब्सक्राइब करते हैं, उनमें से कई लोग आपको अपनी लोकप्रियता का अर्ध सत्य दिखा रहे होते हैं और आप इसी अर्ध सत्य को पूर्ण सत्य मानकर इस घोटाले का शिकार हो जाते हैं.

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