नई दिल्ली: अब हम दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक, U.F.O. यानी उड़न तश्तरियों का एक संक्षिप्त विश्लेषण करेंगे. वैज्ञानिकों की भाषा में इसका पूरा नाम Un-Identified Flying Objects है. यानी हवा में उड़ने वाली ऐसी वस्तु जिसे पहचाना ना जा सके. दुनिया में एलियंस और UFO के बारे में लगातार चर्चा होती रहती है और अब पहली बार अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर UFO के तीन वीडियो जारी किए हैं.
ये वीडियो यूएस नेवी के F-18 फाइटर जेट्स में लगे Infrared कैमरे की मदद से रिकॉर्ड किए गए थे.
इन वीडियोज में ये UFOs ऐसे हवाई करतब कर रहे हैं, जो दुनिया में मौजूद किसी भी एविएशन टेक्नोलॉजी से संभव नहीं हैं. इन तस्वीरों को रिकॉर्ड करते समय यूएस नेवी के पायलट्स इन UFOs की तेज़ रफ्तार से भी हैरान हो गए.
इनमें से एक वीडियो की रिकॉर्डिंग नवंबर 2004 में प्रशांत महासागर के इलाके में हुई थी और बाकी दो वीडियोज को जनवरी 2015 में यूएस नेवी के पायलट्स ने रिकॉर्ड किया था.
ये तीनों वीडियोज वर्ष 2007 और वर्ष 2017 में Leak हुए थे. तब अमेरिका के एक अखबार और UFOs के बारे में रिसर्च करने वाली एक संस्था ने इन्हें रिलीज किया था.
पिछले वर्ष सितंबर में यूएस नेवी ने इन वीडियोज के सच होने की बात मानी थी और अब इन्हें आधिकारिक तौर पर जारी करके वो इस वीडियो के असली होने को लेकर किसी भी भ्रम को दूर करना चाहती है यानी जो तस्वीरें इस समय आप अपनी स्क्रीन पर देख रहे हैं वो किसी Special Effect से नहीं बनाए गए हैं.
हालांकि इसका ये मतलब नहीं है कि अब अमेरिका की सरकार एलियंस के अस्तित्व पर भरोसा कर रही है. अमेरिका के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इन वीडियोज में दिखे UFOs के बारे में उन्हें भी ज्यादा जानकारी नहीं है.
एलियंस और UFOs के बारे में आपने भी कोई फिल्म देखी होगी या फिर कोई Novel पढ़ा होगा. आज आप US Navy के Fighter Jets के उन पायलटों की बातचीत सुनिए, जिन्होंने इन Videos को रिकॉर्ड किया था । और ये बातचीत किसी फिल्म या Novel से भी ज्यादा हैरान करने वाली है।
लेकिन अमेरिका का रक्षा मंत्रालय इन वीडियोज में दिख रही आकृतियों को UFO नहीं, बल्कि UAP कह रहा है. UAP का अर्थ है, Un-Identified Aerial Phenomenon यानी अज्ञात हवाई घटना. अबतक दुनिया के कई देशों में सैकड़ों बार उड़न तश्तरियों के दिखाई देने का दावा किया जा चुका है. लेकिन किसी देश ने पहली बार UFO के Videos को आधिकारिक तौर पर जारी किया है.
आप सोच रहे होंगे कि अमेरिका ने ये Videos अब क्यों रिलीज किए हैं?
अमेरिका के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इन Videos से उनकी सेना के किसी संवेदनशील क्षमता या सिस्टम के बारे में जानकारी का खुलासा नहीं हो रहा है. और इस समय ये वीडियो किसी जांच का हिस्सा भी नहीं है.
ऐसी घटनाओं की जांच के लिए अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2007 से 2012 तक एक सीक्रेट कार्यक्रम भी चलाया था. और इस कार्यक्रम पर कुल मिलाकर करीब 166 करोड़ रुपए खर्च हुए थे. यानी अमेरिका के पास UFOs के बारे में ज्यादा जानकारी हो सकती है. ये भी संभव है कि अब अमेरिका भी इन UFOs के अस्तित्व पर भरोसा करता हो.
विशेषज्ञों के मुताबिक इन वीडियोज से ये साबित हो गया है कि इस ब्रह्मांड में हम अकेले नहीं है. यानी पृथ्वी के अलावा किसी और ग्रह पर भी जीवन मौजूद है। संभव है कि वो सभ्यता हमारे मुकाबले बहुत आधुनिक हो. क्योंकि हमारी सभ्यता इतने वर्षों में किसी Alien की तलाश नहीं कर पाई है, लेकिन ऐसे UFOs हमारी पृथ्वी पर दिखाई दे चुके हैं, जिनके किसी और ग्रह से आने का दावा किया जाता है.
वर्ष 1973 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने भी दावा किया था कि उन्होंने एक UFO देखा है. वो इतने महत्वपूर्ण पद पर रह चुके थे, इसलिए उनकी बातों को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.
दुनियाभर में UFO और Aliens की मौजूदगी पर चर्चा और रिसर्च करने के लिए हर वर्ष 2 जुलाई को World UFO Day भी मनाया जाता है. अब आपको UFO या उड़न तश्तरी के इतिहास के बारे में भी जानना चाहिए.
24 जून 1947 को बिजनेसमैन Kenneth Arnold (केनेथ अर्नोल्ड) ने पहली बार अमेरिका की राजधानी Washington D.C. में अजीबोगरीब 9 आकृतियों को हवा में उड़ते हुए देखा था. उस वक्त Arnold ने कहा था कि ये आकृतियां उसी तरह हिल रही थीं, जैसे समुद्र की लहरों में कोई तश्तरी हिलती है.
इसके बाद 2 जुलाई 1947 को अमेरिका के Roswell(रॉसवेल) इलाके में एक Space Craft का मलबा मिला था. वहां मौजूद लोगों ने एलियंस के शवों को भी देखने का दावा किया। हालांकि US Air Force ने वर्ष 1994 में अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि ये मलबा Weather Balloon का था यानी ये मौसम की जानकारी देनेवाले गुब्बारे थे. और जिन्हें Aliens का शव कहा जा रहा था, वो वास्तव में Dummies(डमीज) थे. हालांकि 73 वर्षों के बाद भी इस घटना पर विवाद बना हुआ है.
इस तरह की घटनाओं के बाद वर्ष 1948 में US Air Force ने जांच के लिए Project Sign(प्रोजेक्ट साइन) शुरू किया था. इसके बाद वर्ष 1952 से लेकर वर्ष 1969 तक Project Blue Book के तहत इस तरह की 12 हजार घटनाओं पर एक रिपोर्ट तैयार की गई थी. यानी अमेरिका में UFOs के दिखाई देने की हज़ारों घटनाएं सामने आ चुकी हैं.
भारत में भी कई जगहों पर UFO देखे जाने की खबरें आती रही हैं, लेकिन ऐसी किसी घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
अब अमेरिका के इन वीडियोज को जारी करने के बाद ये तय है कि UFO या एलियंस के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता है. अब लोगों को इंतजार उस वक्त का है, जब दूसरी दुनिया के कुछ और राज सबके सामने आएंगे.
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