छतरपुर। बागेश्वर धाम पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सानिध्य में दक्षिण भारत के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल तिरुपति में तीन दिवसीय ऊर्जा संचयन समागम शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर का शुभारंभ करते हुए महाराज श्री ने कहा कि यह शिविर शरीर की नहीं, मन की यात्रा का अनुभव करने के लिए है। इस ऊर्जा संचय समागम का मुख्य उद्देश्य मन और बुद्धि की शुद्धि कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना तथा मानसिक तनाव, नकारात्मक विचारों और विकारों से मुक्ति दिलाना है।तिरुपति बालाजी की नगरी में बागेश्वर सरकार के तीन दिवसीय छठे राष्ट्रीय ऊर्जा संचयन समागम के प्रथम दिवस का शुभारंभ ब्रह्ममुहूर्त में सीताराम दरबार की आरती, पुष्प अर्पण एवं सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के साथ हुआ। समागम में शामिल देश-विदेश से आए साधकों को बागेश्वर सरकार ने आशीर्वचन देते हुए बागेश्वर महाराज ने इसके उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। पूज्य सरकार ने बताया कि यह केवल तीन दिनों का शिविर नहीं बल्कि जीवन को नई दिशा देने वाली एक आध्यात्मिक साधना है जिसके लाभ साधकों को जीवनभर प्राप्त हो सकते हैं।बागेश्वर सरकार ने कहा कि यह समागम शरीर की नहीं, बल्कि मन की यात्रा करवाता है। व्यक्ति एक ही स्थान पर रहते हुए आत्मचिंतन, आत्ममंथन और आत्मविकास की अनेक यात्राएं कर सकता है, उन्होंने कहा कि मन की शुद्धि और विचारों की सकारात्मकता से व्यक्ति को आंतरिक सुख, मानसिक शांति और आत्मविश्वास की अनुभूति होती है, आगे कहा कि ऊर्जा संचयन समागम वर्तमान में जीने की कला सिखाता है, भविष्य के लिए सही दिशा निर्धारित करने की प्रेरणा देता है तथा जीवन में हुई ज्ञात-अज्ञात गलतियों का आत्ममंथन कर उन्हें सुधारने का अवसर प्रदान करता है। उल्लेखनीय है कि बागेश्वर सरकार का यह छठा राष्ट्रीय ऊर्जा संचयन समागम है। इससे पूर्व देश के विभिन्न स्थानों पर आयोजित समागमों में शामिल हजारों साधक आज भी इसके सकारात्मक परिणामों का अनुभव कर रहे हैं।
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