EXCLUSIVE: CHINA CONTINUES TO INTIMIDATE US AMIDST COVID, TAIWAN’S TOP DIPLOMAT IN INDIA | EXCLUSIVE: चीन के कुटिलता और भारत के साथ संबंधों पर खुलकर बोले ताइवान के राजदूत

नई दिल्ली: चीन (China) भारत (India) सहित पूरी दुनिया के लिए परेशानी बना हुआ है. कोरोना (Coronavirus) महामारी के दौर में भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया है. भारत में ताइवान के शीर्ष राजनयिक ने ZEE NEWS के सहयोगी चैनल WION के साथ विशेष बातचीत में कहा कि ऐसे वक्त में जब पूरी दुनिया कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रही है, चीन ने ताइवान को परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड़ा. 

ताइवान के कार्यवाहक राजदूत जैक सीएच चेन (Jack C.H. Chen) ने कहा, ‘चीन ने महामारी को भी दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में अपनी सैन्य उपस्थिति के विस्तार करने के अवसर के रूप में देखा है’. भारत, ताइवान संबंधों पर बोलते हुए राजनयिक ने कहा कि महामारी से लड़ाई में ताइवान और भारत के संयुक्त प्रयास के चलते दोनों इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मजबूत साझेदार बनेंगे.

ताइवान की डब्ल्यूएचओ की सदस्यता पर चेन ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि डब्ल्यूएचओ के कार्यकारी बोर्ड के नए अध्यक्ष के रूप में भारत यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि डब्ल्यूएचओ सचिवालय ताइवान की भागीदारी से संबंधित मुद्दों पर विचार करते समय एक पेशेवर, तटस्थ रुख बनाए रखे’.

WION: चीन ने COVID-19 महामारी के बीच, ताइवान के हवाई और समुद्री क्षेत्र में अपने सैन्य विमान और जहाजों को भेजकर मौजूदा स्थिति को बदलने का प्रयास किया है. आप इसे किस नजरिये से देखते हैं? 

जैक सीएच चेन: ताइवान को डराने की चीनी कोशिशें कभी बंद नहीं हुईं. वह ताइवान को घेरने के लिए सैन्य विमानों और जहाजों को भेजना और हमें उकसाना जारी रखे हुए है. हालांकि, कोरोना महामारी के दौर में स्थिति कुछ ज्यादा खराब हुई है. चीनी जंगी विमान और पोतों की सक्रियता काफी बढ़ गई है. इसके अलावा, जब अमेरिका सहित संपूर्ण दुनिया महामारी से निपटने पर ध्यान केंद्रित किये हुए है, चीन दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है. उसके लड़ाकू विमान और तटरक्षक जहाज क्षेत्र में चक्कर लगा रहे हैं. बीजिंग के इस कदम से क्षेत्र में तनाव बढ़ा है. चीन की कार्रवाई केवल क्रॉस-स्ट्रेट संबंधों के सकारात्मक विकास के लिए ही हानिकारक नहीं है, बल्कि ताइवान स्ट्रेट और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए भी गंभीर खतरा बन गई है. 

वैश्विक महामारी को ध्यान में रखते हुए चीन को अधिक पारदर्शी होना चाहिए. उसे स्वतंत्र, अंतरराष्ट्रीय जांच पर सहमति जतानी चाहिए और वायरस की उत्पत्ति को समझने एवं उससे निपटने में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करना चाहिए. ताइवान लोकतंत्र और स्वतंत्रता जैसे मूल्यों की रक्षा के लिए प्रयास करता है और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता की दिशा में काम करता है. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इसके लिए हमारी सराहना भी की है. ताइवान कभी दबाव में नहीं आएगा.  हम अपनी संप्रभुता की रक्षा करने, अपने राष्ट्रीय हितों को सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुंचने के लिए और अधिक प्रयास करेंगे. हम समान विचारधारा वाले देशों के साथ संबंध मजबूत करेंगे, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का हिस्सा बनेंगे, ताकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में अधिक ठोस योगदान दे सकें. 

WION: क्या COVID-19 संकट के बीच ताइवान और भारत के बीच सहयोग में वृद्धि की संभावना है?

जैक सीएच चेन: वैश्विक महामारी ने उन खतरों को उजागर किया है, जो महत्वपूर्ण घटकों के एक या बस कुछ स्रोतों पर निर्भरता के साथ आते हैं. महामारी के बाद के युग में हम संभवतः वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का पुनर्गठन देखेंगे. क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के अलावा, ताइवान और भारत को महामारी के बाद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हमारी स्थिति का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए और मजबूत साझेदारी की योजना तैयार करनी चाहिए.
ताइवान और भारत प्राकृतिक व्यवसाय और औद्योगिक साझेदार हैं. ताइवान हार्डवेयर विनिर्माण में उत्कृष्टता प्राप्त करता है, जबकि भारत का शौर्य सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में निहित है. दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सहयोग की काफी संभावनाएं हैं. महामारी को ध्यान में रखते हुए भारत ने अर्थव्यवस्था में सुधार और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए अपनी मेक इन इंडिया मुहिम को तेज कर दिया है. इसके तहत भारत ने ताइवान के व्यवसायों को आकर्षित करने की दिशा में बड़ा प्रयास किया है. हमें यह देखकर खुशी हो रही है कि भारत अपने निवेश के माहौल में सुधार जारी रखे हुए है, इससे ताइवान के कारोबारियों को भारत में निवेश विस्तार का फायदा मिल रहा है. ताइवान और भारत दोनों लोकतांत्रिक देश हैं और स्वतंत्रता, लोकतंत्र, कानून का शासन और मानवाधिकारों की रक्षा जैसे मूल्यों को साझा करते हैं. पिछले कुछ वर्षों में, हमारे राष्ट्रों ने व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग की दिशा में काफी प्रगति की है. इस बीच, महामारी ने हमें ई-कॉमर्स, ऑनलाइन इंटरैक्शन, और जैव रासायनिक प्रौद्योगिकी सहित भविष्य के सहयोग के लिए नए क्षेत्रों की पहचान करने में मदद की है. हमें उम्मीद है कि महामारी के बाद एक संयुक्त प्रयास के माध्यम से, ताइवान और भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मजबूत भागीदार बन जाएंगे.

WION: भारत अब WHO के कार्यकारी बोर्ड की अध्यक्षता करेगा. क्या ताइवान को भारत की नई भूमिका से कोई उम्मीद है?

जैक सीएच चेन: सबसे पहले, ताइवान डब्ल्यूएचओ के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में नई भूमिका के लिए भारत को बधाई देता है. दूसरी बात मैं यह कहना चाहूंगा कि महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संगठन के रूप में WHO को ताइवान सहित सभी हितधारकों की भागीदारी का स्वागत करना चाहिए. हमें उम्मीद है कि भारत WHO के कार्यकारी बोर्ड के नए अध्यक्ष के रूप में, यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि WHO सचिवालय ताइवान की भागीदारी से संबंधित मुद्दों पर विचार करते समय एक पेशेवर, तटस्थ रुख अपनाये. जैसे कि वर्ल्ड हेल्थ असेंबली (World Health Assembly) में ताइवान को पर्यवेक्षक का दर्जा देना और साथ ही डब्ल्यूएचओ की बैठकों, मेकेनिज्म और गतिविधियों में उसकी भागीदारी सुनिश्चित करना. इससे ताइवान और दुनियाभर में लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.

WION: क्या आपको पूरा विश्वास है कि ताइवान एक दिन WHO का सदस्य बनेगा?

जैक सीएच चेन: ताइवान को चीनी हस्तक्षेप और डब्ल्यूएचओ द्वारा पेशेवर एवं निष्पक्ष भूमिका निभाने में विफल रहने के चलते मई में आयोजित हुए 2020 WHA का निमंत्रण नहीं मिला. अन्य देशों ने अंतर्राष्ट्रीय संगठनों पर चीन के अनुचित प्रभाव को देखा है और ताइवान के लिए सार्वजनिक रूप से समर्थन व्यक्त किया है. इस साल WHA में ताइवान की भागीदारी का व्यापक समर्थन देखने को मिला है, जो दर्शाता है कि दुनिया WHO में ताइवान की भागीदारी के महत्व को पहचानती है. यह ताइवान के लिए उत्साहजनक है और हम मानते हैं कि जितना अधिक हम अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त करेंगे, अपने लक्ष्य की ओर हम उतना ही बढ़ते जाएंगे. 

डब्ल्यूएचओ सहित अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में शामिल होने की ताइवान की दावेदारी हमेशा पेशेवर, व्यावहारिक और रचनात्मक सिद्धांतों पर आधारित रही है. वर्तमान समय में हमारा लक्ष्य WHA के पर्यवेक्षक का दर्जा हासिल करना और WHO की बैठकों, गतिविधियों और मेकेनिज्म में पूरी तरह शामिल होना है. COVID-19 से लड़ाई में पूरी दुनिया ने ताइवान मॉडल की प्रशंसा की है. अपनी घरेलू ज़रूरतों को पूरा करने के बाद हमने निःस्वार्थ रूप से 80 से अधिक देशों को आवश्यक चिकित्सा सामग्री प्रदान करना शुरू किया. हमने दुनिया को दिखा दिया है कि ताइवान मदद कर सकता है, और ताइवान मदद कर रहा है.

WION: क्या आपको लगता है कि चीन ने COVID-19 संकट को सही ढंग से नहीं संभाला?

जैक सीएच चेन: चीन के लिए यह कोई नई बात नहीं है. 2003 में चीन ने सार्स के प्रकोप को छिपाया और दुनिया को इसके बारे में सूचना देने में देरी की. पिछले साल दिसंबर में जब वुहान में कोरोना संक्रमण सामने आया, तो वह अंजान बना रहा. यहां तक कि चीन के भीतर भी इस मुद्दे पर पारदर्शिता नहीं बरती गई. नतीजतन दुनिया शुरूआती दौर में इससे निपटने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा पाई. यदि चीन वक्त रहने कोरोना के बारे में जानकारी देता, तो इसे वैश्विक महामारी बनने से रोका जा सकता था.  
चीन के उलट, दिसंबर 2019 के अंत में, ताइवान ने संबंधित मामलों की जानकारी इंटरनेट पर साझा करना शुरू किया और स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कदम उठाये गए. हमारे अधिकारियों ने 31 दिसंबर को डब्ल्यूएचओ के आईएचआर फोकल पॉइंट को इस संबंध में सूचित किया. हमने WHO से इस तथ्य पर ध्यान देने को कहा कि वुहान सिटी में एटिपिकल निमोनिया के लक्षणों वाले रोगियों को इलाज के लिए आइसोलेट किया जा रहा है.  

यदि चीन और डब्ल्यूएचओ ने दुनिया भर की सरकारों को समय रहते अलर्ट किया होता, तो शायद कोरोना को कहर बरपाने से रोका जा सकता था. कोरोना महामारी के चलते जहां चीन ने अन्य देशों का भरोसा खोया है, वहीं दुनिया का ताइवान में विश्वास बढ़ा है. क्योंकि हमने वायरस की भनक लगते ही इस संबंध में तुरंत WHO को सूचित किया और ताइवान में कोरोना के प्रकोप को नियंत्रित किया. हमारा प्रयास यह दर्शाता है कि लोकतांत्रिक देश खुले, ईमानदार और पारदर्शी तरीके से वायरस का मुकाबला करने में सक्षम हैं.

 




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