family going home from the bullock cart sold the bull and bought ration for food, administration gives support – बैलगाड़ी से घर जा रहे परिवार ने बैल को बेच कर खरीद लिया खाने के लिए राशन, गाड़ी को कंधा लगा कर पहुंचा घर

बैलगाड़ी से घर जा रहे परिवार ने बैल को बेच कर खरीद लिया खाने के लिए राशन, गाड़ी को कंधा लगा कर पहुंचा घर

परिवार को प्रशासन की तरफ से मिली सहायता

इंदौर:

इंदौर में एक परिवार महुं से बैलगाड़ी से आ रहा था. उसी दौरान एक शख्स ने इनका वीडियो बना लिया था और वायरल कर दिया था. वीडियो में बड़ा भाई, उसकी पत्नी और छोटा भाई मौजूद थे,पैसे खत्म हो गए थे इसलिए इन्होंने अपने बैल बेच दिया था उन पैसों से राशन खरीद लिया था और बेचे गए बैल की जगह खुद ही बैल गाड़ी को कंधा लगा कर धकेल रहे थे. कभी बड़ा भाई, कभी उसकी पत्नी तो कभी चोट भाई बैल धक्का लगा रहे थे. जिसके बाद इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने अधिकारियों की टीम बनाई इसमे जोनल अधिकारी वैभव देवलास उन्हें ढूंढने के लिए निकल गए.

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प्रशासन ने इस परिवार को ढूंढ निकाला, यह परिवार महूं से दतोदर गांव पहुंच गया था जहां पर इनका अस्थाई ठिकाना था . नगर निगम के जोनल अधिकारी ने इनको ढूंढ निकाला और इसकी सूचना उन्होंने इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह को दी. कलेक्टर ने इस परिवार को अपने ऑफिस बुलाया और तत्काल 20,000 की सहायता राशि दी साथ ही इन्हें राशन उपलब्ध कराया और इनके खाने का बंदोबस्त किया.  बैलगाड़ी को खींच रहें राहुल और उसकी भाभी ने बताया कि हमारे पास पैसे खत्म हो गए थे इसलिए हमने अपना बैल बेच दिया और खुद ही बैल बन गए.

 राहुल ने यह भी बताया कि इंदौर कलेक्टर के यहां से हमे लेने के लिए प्रशासन के अधिकारी आये थे, उन्होंने हमारी मदद की ,हमे राशन दिलाया और हमे 20000 की आर्थिक राशि देकर सहायता की. राहुल ने यह भी बताया कि हमारा काम बैल बेचने और खरीदने का है . भाई राहुल की भाभी ने बताया कि मैं और मेरे देवर दोनों ने ही बैलगाड़ी में धक्का लगाया है बैल की जगह , हम लोगों को यहां तक पहुंचने में बड़ी मुसीबत आई . अब जो पैसे हमें सरकार से मिले हैं इससे हम बेल खरीद लेंगे और आगे से ऐसा नहीं करेंगे हम खुश हैं जो प्रशासन ने मदद की उससे.


 


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