आगर-मालवा जिला मुख्यालय पर किसानों का आंदोलन देर शाम तक जारी रहा। कलेक्टोरेट के मुख्य गेट के बाहर किसान धरने पर बैठे रहे और वहीं सड़क पर कंडे-लकड़ी जलाकर दाल-बाटी बनाई गई। यानी किसान सिर्फ नारेबाजी और धरने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि कलेक्टोरेट के बाहर ही भोजन बनाने का इंतजाम कर लिया। किसानों का कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे धरना खत्म नहीं करेंगे।
फसल बीमा, स्थानीय कलेक्टर को हटाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर किसान संघ ने प्रदर्शन किया। कृषि उपज मंडी से बड़ी संख्या में किसान और महिलाएं रैली के रूप में कलेक्टोरेट पहुंचे और जमकर नारेबाजी की। इसके बाद किसान मुख्य गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने सुरक्षा के लिए मुख्य द्वार पर बैरिकेडिंग की।
वहीं किसानों को समझाइश देने एडीएम समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे। किसान नेताओं ने अधिकारियों से वन-टू-वन जवाब मांगा। इस दौरान एडीएम और किसान नेताओं के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। किसान सिर्फ मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं थे। उनकी मांग थी कि प्रशासन उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन दे।
बात नहीं बनी तो देर शाम तक धरना जारी रहा। कलेक्टोरेट के गेट के बाहर चूल्हा जला, दाल-बाटी बनी और किसान वहीं भोजन करते नजर आए।आंदोलन के बीच सड़क पर बना ये चूल्हा किसानों के लंबे धरने की तस्वीर पेश कर रहा था। देर शाम किसान नारेबाजी करते हुए मुख्य गेट की ओर बढ़े और बैरिकेड हटाने की कोशिश की। पुलिस ने मौके पर स्थिति संभाली।


