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9 महीने से ‘बेकाम’ है महिला IAS, एक भी फाईल नहीं आई

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भोपाल, ब्यूरो। मध्य प्रदेश की एक महिला आईएएस इन दिनों गुमनामी में जीवन जी रही हैं। उनके पास 9 महीने से कोई काम नहीं है। इस दौरान उनके पास एक फाइल भी नहीं आई है। मप्र की ताकतवर आईएएस लॉबी ने अपनी ही जूनियर बेहद ईमानदार महिला आईएएस नेहा मारव्या (Neha Maravya IAS) के कैरियर को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्हें लगभग 6 वर्ष से लूप लाईन में रखा गया है। पिछले 9 महीने से इस युवा आईएएस के पास एक फाईल नहीं आई है। मप्र 2011 बैच की आईएएस नेहा मारव्या एक समय शिवराज सरकार की शानदार परफॉर्मेंस अफसर मानी जाती थीं। शुरुआती दौर में उन्हें एमडीएम चंदेरी बनाया गया तो माफिया उनसे खौफ खाते थे। चुनाव के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया के वाहन को बिना अनुमति चलने पर जब्त करने पर सरकार ने उनकी पीठ थपथपाई थी। उस समय सिंधिया कांग्रेस में थे। चुनाव के तत्काल बाद जिला पंचायत सीईओ बनाकर जबलपुर भेजा गया। शिवपुरी में वे प्रभारी कलेक्टर भी रहीं। उनकी छवि तेजतर्रार और बेहद ईमानदार अफसर की बनती जा रही थी। बताया जाता है कि 2017 में भोपाल ट्रांसफर के बाद एक वरिष्ठ महिला आईएएस से किसी बात पर उनका विवाद हो गया। इस ताकतवर महिला आईएएस ने नेहा मारव्या को उनका कैरियर चौपट करने और भविष्य में पोस्टिंग न होने देने की धमकी भी दी थी। इसके बाद पंचायत विभाग, कृषि विभाग और अजीविका मिशन में उनकी नियुक्ति हुई। शुरुआत में तो सब कुछ ठीक रहता, लेकिन कुछ दिनों बाद विभाग प्रमुख का व्यवहार बदल जाता है। आशंका है कि ताकतवर महिला आईएएस अपने प्रभाव का उपयोग कर नेहा के खिलाफ माहौल बनाने में सफल रहती हैं। इसी बीच अजीविका मिशन के प्रमुख ललित बेलवाल के कथित भ्रष्टाचार की जांच नेहा मारव्या से कराई गई। नेहा ने दस्तावेजों के आधार पर अपनी जांच में बेलवाल को दोषी करार दे दिया। यह जांच रिपोर्ट उनके लिए इतनी नुकसानदेह होगी, इसकी कल्पना भी नहीं की थी। नेहा को 9 महीने पहले उपसचिव राजस्व बनाया गया। वे ज्वाईन करने पहुंची तो प्रमुख सचिव ने गेट आऊट कहकर कमरे से बाहर निकाल दिया। उन्हें एक छोटे से कमरे में बिठा दिया गया है। जहां एक कम्प्यूटर तो छोड़िए पानी पिलाने के चपरासी भी नहीं दिया गया था। पूरे 9 महीने में उन्हें कोई काम आवंटित नहीं किया गया है। बीते 9 महीने में एक भी फाईल उनके पास नहीं आई है। खास बात यह है कि नेहा मारव्या का कोई राजनीतिक विरोध नहीं है। सत्ताधारी दल के किसी नेता को उनसे कभी शिकायत नहीं हुई। नेहा के प्रति सारी नाराजगी एक वरिष्ठ महिला आईएएस की बताई जा रही है। नेहा के बैच के अधिकार अफसर जिलों में कलेक्टर बन चुके हैं। खास बात यह है कि पिछले तीन वर्ष से नेहा मारव्या के पास कोई महत्वपूर्ण काम नहीं है। फिर भी उनकी सीआर बिगाड़ी जा रही है। उनके विभाग प्रमुख ने यदि अच्छी सीआर लिख दी तो ऊपर पहुंचकर वह सीआर बिगड़ जाती है।

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