Garlic Tea Benefits: लहसुन की बनी चाय डायबिटीज करेगी कंट्रोल, जानें बनाने और पीने का तरीका – how garlic tea is effective in controlling diabetes know how to make and dose

डायबिटीज यानी मधुमेह हमारे देश की सबसे प्रचलित बीमारियों में से एक है। आज-कल हर दूसरा आदमी डायबिटीज या ब्लड में बढ़ी हुई शुगर की मात्रा से परेशान है। ये बीमारी हमारी अनियमित लाइफस्टाइल,खान-पान की गड़बड़ी या फिर जेनेटिक कारणों से किसी भी उम्र में हो सकती है।

आज हम आपको रोजमर्रा के खान-पान से जुड़े एक ऐसे उपचार के बारे में बताएंगे जो आपकी डायबिटीज को कंट्रोल करने में काफी असरदार है। इसके अलावा इसका सेवन न केवल आसान है बल्कि इसके कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं हैं।

गार्लिक-टी कैसे करती है काम?

गार्लिक या लहसुन हर भारतीय किचन में आसानी से मिलने वाली सामग्री है। वैसे तो लहसुन का इस्तेमाल अधिकतर डिशेज में खाने का स्वाद और सुगंध बढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन लहसुन में कई औषधीय गुण और पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। लहसुन हमारी इम्युनिटी बढ़ाने, शरीर को डी-टॉक्स करने और पाचनतंत्र को मजबूत बनाने जैसे कई औषधीय काम भी करता है। इसी कारण लंबे समय से लहसुन का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में होता रहा है।

अब तो आधुनिक चिकित्सा शोधों में भी लहसुन की मेडिसनल क्वालिटीज को स्वीकार किया गया है। इसके साथ ही दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लहसुन में डायबिटीज कंट्रोल करने का भी विशेष गुण मौजूद है। लहसुन हमारे शरीर में पाए जाने वाले ‘अमीनो एसिड होमोसिस्टीन’ को कम करता है जिससे खून में मौजूद शूगर की मात्रा नियंत्रित रहती है। लहसुन की एक कली रोज सुबह सेवन करने से डायबिटीज और हाई-ब्लड प्रेशर की समस्या को आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं। इसके इस्तमाल का और असर का कारगर तरीका है ‘गार्लिक-टी’ या ‘लहसुन की चाय’।

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कैसे बनाएं गार्लिक-टी

लहसुन की एक या दो कलियों को छीलकर हल्का सा कुचल लें और इसे थोड़ी सी दालचीनी के साथ एक कप पानी में उबालें। पानी को तब तक उबालें जब तक कि पानी आधा न हो जाए । गर्मा गरम गार्लिक-टी तैयार है।

इसको नियमित तौर पर रोज सुबह पिएं। गार्लिक-टी को रोजाना पीने से न केवल ब्लड शुगर और डायबिटीज बल्कि कई और भी बीमारियों को काबू किया जा सकता है। हालांकि, सर्दियों के मौसम में इसको पीना ज्यादा फायदेमंद है।

गार्लिक-टी पीने से होने वीले फायदे

  • माइक्रोबायोटिक न्यूट्रिशनिस्ट ने गार्लिक-टी की मेडिसनल प्रापर्टी पर शोध कर निष्कर्ष निकाला है कि गार्लिक-टी में मौजूद लहसुन और दालचीनी दोनों ही डायबिटीज को कंट्रोल करने में असरदार हैं। इसके साथ ही इन दोनों में कई अन्य औषधीय गुण भी पाए जाते हैं, जो कई दूसरी बीमारियों को दूर करने में लाभदायक हैं।
  • लहसुन का नियमित सेवन अमीनो एसिड होमोसिस्टीन को कम करता जिससे ब्लड-शूगर नियंत्रित रहती है। इस कारण हृदय रोग में लाभ होता है।
  • लहसुन में पाया जाने वाला सल्फर, ट्यूमर कोशिकाओं से लड़ने का काम करता है।
  • लहसुन एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर है जो हमारी इम्युनिटी बढ़ाने का काम करता है।

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दालचीनी भी कई औषधीय गुणों सो भरपूर

दालचीनी रोग-प्रतिरोधकता बढ़ाने , श्वसन तंत्र को मजबूत करने का कम करती है।
दालचीनी शरीर में होने वाली सूजन और वजन को कम करने में भी कारगर है।
इसके साथ ही फर्टिलिटी एंड स्टेरिलिटी जर्नल की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दालचीनी महिलाओं में विशेषतौर पर इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने कारगर है।
इसके साथ ही गार्लिक-टी के बारे में एक और ध्यान रखने वाली बात ये है कि ये डायबिटीज का त्वरित इलाज नहीं है। यह नियमित सेवन से ब्लड-शुगर को नियंत्रित करने में मदद करती है। जिससे डायबिटीज कंट्रोल में रहती है। इसे हमें अपनी डेली डायट में शामिल कर लेना फायदेमंद रहता है।

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गार्लिक-टी के सेवन में रखें ये सावधानियां

गार्लिक-टी को बनाने वाली दोनों ही सामग्रियां लहसुन और दालचीनी शरीर में गर्मी पैदा करते हैं। इसलिए गर्मियों में रोज इसे पीने की सलाह नहीं दी जाती है। ब्लड-शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने के लिए गर्मियों में इसे सप्ताह में दो बार इसका सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा गार्लिक-टी के दूसरे और कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं। बल्कि सर्दियों के मौसम में इसका सेवन विशेष रूप से फायदेमंद है। सर्दियों में शरीर की रोग प्रतिरोधकता बढ़ाने,सर्दी-खांसी दूर करने, ठण्ड से बचाव करने के लिए कोई भी इसका सेवन कर सकता है।


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