happy hypoxia covid: Happy hypoxia covid: धीरे से गिराता है ऑक्‍सीजन लेवल, फिर चुपे से सुलाता है मौत की नींद… हैप्पी हाइपोक्सिया ऐसे लेता है मरीज की जान – covid new strain happy hypoxia in youth when oxygen level goes down patients should notice these symptoms

Happy hypoxia: कोरोना महामारी की दूसरी लहर आए दिन ही मरीजों में एक के बाद एक नई बीमारी को जन्म दे रही है। अब तक कोविड की चपेट में आने से सुना था कि इसका लंग्स पर असर पड़ता है लेकिन असल में ये वायरस हमारे पूरे शरीर को खोखला कर रहा है। इस महामारी की चपेट में आने के बाद किसी के शरीर में खून के थक्के बनने शुरू हो गए तो कोई डायबिटीज का मरीज बन गया। किसी में ब्लैक फंगल इंफेक्शन के लक्षण दिखने लगे तो कोई अपनी गंध और स्वाद खो बैठा। अब इस महामारी की एक और लक्षण सामने आया है जिसका नाम है ‘हैप्पी हाइपोक्सिया’ (Happy hypoxia)।

कहने को तो इस बीमारी के नाम के आगे हैप्पी लगा है लेकिन ये इतनी खतरनाक है कि किसी भी व्यक्ति की जान सकती है। दूसरी लहर के वायरस से संक्रमित तमाम युवाओं में कोविड घातक बीमारी हैप्पी हाइपोक्सिया की वजन भी बन चुका है। आइए जानते हैं, क्या है हैप्पी हाइपोक्सिया और क्या है इसके सिम्टम्स और क्यों कहा जाता है इसे साइलेंट किलर।
(फोटो साभार: istock by getty images)

​क्यों कहते हैं इसे ‘साइलेंट किलर’

हैप्पी हाइपोक्सिया कोरोना की खतरनाक स्टेजों में से एक है। ये बीमारी कोविड मरीज को हार्ट अटैक जैसा झटका देती है और उसे मौत में मुंह में ढकेल देती है।

खास बात ये है कि कोविड मरीज को इस बात का आभास नहीं होता कि वो कब इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ गया। कोरोना मरीजों में शुरुआती स्तर पर कोई लक्षण नहीं दिखता। यही वजह है कि हैप्पी हाइपोक्सिया को ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जा रहा है।

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​युवाओं को क्यों नहीं चलता हैप्पी हाइपोक्सिया का पता

हैप्पी हाइपोक्सिया की चपेट में मरीज तब आता है जब उसके खून में ऑक्सीजन के स्तर का बहुत कम हो जाता है। इसमें मरीज का ऑक्सीजन लेवल 30 से 50 फीसदी तक या इससे भी ज्यादा नीचे गिर जाता है लेकिन पीड़ित को इसका पता भी नहीं चल पाता।

जानकारों का कहना है कि युवाओं की इम्यूनिटी काफी स्ट्रांग होती है, ऐसे में उनका ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल नीचे भी आ जाता तो उन्हें कुछ महसूस नहीं होता है कि वे साइलेंट किलर हाइपोक्सिया की चपेट में आ चुके हैं।

क्योंकि कोरोना मरीज रहते हुए भी उनमें शुरुआती स्तर पर कोई लक्षण नहीं दिखते या फिर माइल्ड सिम्टम्स होते हैं। वे एक दम हैप्पी नजर आते हैं लेकिन अचानक से उनका ऑक्सीजन सेचुरेशन कम होने लगता है, जो जानलेवा साबित होने लगता है।

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​हैप्पी हाइपोक्सिया होने की वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक, हैप्पी हाइपोक्सिया का प्रमुख कारण फेफड़ों में खून की नसों में थक्के जम जम जाते हैं। इस कारण फेफड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है, जिसके चलते ब्लड में ऑक्सीजन सेचुरेशन की मात्रा कम हो जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाइपोक्सिया के कारण दिल, दिमाग, किडनी जैसे शरीर के प्रमुख अंग काम करना बंद कर सकते हैं।

​हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण (Hypoxia covid symptoms)

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हैप्पी हाइपोक्सिया से पीड़त व्यक्ति के होठों का रंग बदलने लगता है, वो लाल से नीले पड़ने लगते हैं। इसके अलावा त्वचा का रंग भी लाल या पर्पल दिखने लगता है। यहीं नहीं पसीने में भी पीड़ित व्यक्ति का रंग बदला हुआ नजर आता है। ऑक्सीजन का स्तर काफी कम होने पर सांस लेने में परेशानी लगती है।

मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी से कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं और दिमाग भी चिड़चिड़ा होने लगता है। इसलिए लक्षणों पर लगातार ध्यान देना पड़ता है और जरूरत पड़ने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। क्योंकि अगर आपने इस तरह सिम्टम्स को नजरअंदाज किया तो जान का जोखिम लेना पड़ सकता है।


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