hormones and neurotransmitters: Mental Health And Hormones: हॉर्मोन्स और न्यूरोट्रांसमीटर्स में होता है यह अंतर, मेंटल हेल्थ के लिए हैं जरूरी – mental health and hormones difference between hormones and neurotransmitters

NBT

हॉर्मोन्स और न्यूरोट्रांसमीटर्स हमारे मूड और फीलिंग्स को बहुत गहराई तक प्रभावित करते हैं, इतना कि हम अच्छा फील कर रहे हैं या बुरा यह भी हमारे हॉर्मोन्स पर निर्भर करता है। हमारे ब्रेन में कुछ पर्टिकुलर नर्व्स हैं, जो खुशी और दुख जैसी भावनाओं की अनुभूति कराती हैं और इसी फील पर हमारा मूड डिपेंड करता है कि हम हैपीनेस फील करेंगे या सेडनेस…

हॉर्मोन्स और न्यूरोट्रांसमीटर्स में क्या अंतर होता है?

-हमारी बॉडी के किसी भी पार्ट में रिलीज होनेवाले हॉर्मोन्स हमारी पूरी बॉडी को इफेक्ट करते हैं। लेकिन न्यूरॉट्रांसमीटर्स हमारी बॉडी के जिस एरिया में रिलीज होते हैं, उसी एरिया के बॉडी सेल्स पर काम करते हैं। इसलिए इन्हें लोकल हॉर्मोन के रूप में भी जाना जाता है।

-जब बात हमारी खुशी की आती है या मेंटल हेल्थ की आती है तो हमारे ब्रेन के तीन खास न्यूरोट्रांसमीटर्स हैं, जो हमें प्रभावित करते हैं। इनका नाम है डोपामाइन और इंडोर्फिन और सेरॉटोनिन।

Diet For Healthy Heart: दिल कभी बीमार होगा ही नहीं, अपनाएं ये टिप्स

सेरॉटोनिन है मूड बूस्टर

-एक्सर्साइज से इंडोर्फिन निकलता है और मनपसंद खाने, गाना सुनने या कोई पसंद का काम करने से डोपामाइन रिलीज होता है। इंडोर्फिन मन को शांत रखने का काम करता है तो डोपामाइन हमें आनंद की अनुभूति देता है। यानी प्लेजर फील कराता है।

NBT

हॉर्मोन्स कैसे मूड को प्रभावित करते हैं?

– वहीं सेरॉटोनिन मूड बूस्टर की तरह काम करता है। यह ऐंटीडिप्रेसेंट भी है। यानी हमें डिप्रेशन में जाने से बचाने का काम करता है। ये तीनों ही न्यूरोट्रांसमीटर्स हमारे मूड को सही रखने और हमें मेंटली हेल्दी रखने में मदद करते हैं।

डोपामाइन है प्लेजर हॉर्मोन

-डोपामाइन को प्लेजर हॉर्मोन इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि सेक्शुअल ऐक्टिविटी के दौरान भी हमारे शरीर में डोपामाइन रिलीज होता है। जब मनुष्य किसी भी चीज या घटना के कारण बहुत अधिक एक्साइटमेंट फील करता है तब भी डोपामाइन का सीक्रेशन शरीर में बढ़ता है।

-वहीं जब हम कोई ऐसा काम करते हैं, जिसे करके हमें खुशी मिलती है तब भी बॉडी में डोपामाइन रिलीज होता है। इसलिए कहा जाता है कि अपनी पसंद को वरीयता देनी चाहिए। ताकि आप खुश रह सकें। आप खुद खुश होंगे तभी दूसरों को खुशियां बांट सकेंगे।

Diet For Healthy Heart: दिल कभी बीमार होगा ही नहीं, अपनाएं ये टिप्स

ऑक्सीटोसिन है लव हॉर्मोन

-ऑक्सीटोसिन को लव हॉर्मोन के नाम से भी जाना जाता है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार ऑक्सिटोसिन एक ऐसा हॉर्मोन है, जो हमारे अंदर संतुष्टि का भाव पैदा करता है।

-जिन लोगों को हम बहुत प्यार करते हैं और जिनका अपने आस-पास होना हमें अच्छा लगता है, उन लोगों के साथ वक्त बिताने पर ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन रिलीज होता है।

Kleptomania: रईसजादों को भी चोर बना देता है ये मेनिया

एंग्जाइटी से बचाता है एस्ट्रोजन

-एस्ट्रोजन हॉर्मोन हमें एंग्जाइटी जैसी मानसिक बीमारी से बचाने का काम करता है। जिन लोगों में एस्ट्रोजन की कमी होती है, उनका मूड हर समय खराब रहता है और वे बहुत चिड़चिड़े हो जाते हैं।

NBT

हॉर्मोन्स और हैपीनेस

– खासतौर पर महिलाओं में मेनॉपॉज के समय एस्ट्रोजन की कमी हो जाती है, इस कारण उनका मूड अधिकतर नेगेटिव और चिढ़चिढ़ा रहता है। साथ ही जल्दी-जल्दी स्विंग भी करता रहता है। यानी मूड लगातार बदलता रहता है।

मूड स्विंग्स से बचाता है प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन

प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन हमें चिंता, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स से बचाता है। महिलाओं में आमतौर पर 35 साल से 40 साल की उम्र के बीच यह हॉर्मोन प्राकृतिक रूप से कम होने लगता है। क्योंकि यह उम्र महिलाओं में प्रीमेनॉपॉज ऐज कहलाती है। यानी रजोनिवृत्ति से पहले का वक्त।

How To Relieve Stress: तेल से दूर होगा लॉकडाउन का तनाव, जो चाहे अपना लें

-प्रीमेनॉपॉज के दौरान ज्यादातर महिलाओं को स्ट्रेस यानी तनाव का सामना करना पड़ता है। क्योंकि उनके शरीर में प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन की कमी हो जाती है।

– लेकिन हेल्दी डायट, योग, नियमित वॉक और खुशी देनेवाले कामों के करके इस हॉर्मोन का स्तर बनाकर रखा जा सकता है। इसलिए हर दिन ऐसी ऐक्टिविटीज करें, जो आपको खुशी दें।


Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here