बेरुत: लेबनान की राजधानी बेरूत में पिछले दिनों हुए भीषण विस्फोट ने लोगों की जिंदगी ओर मुश्किल बना दी है. वहां के लोग पहले से ही कोरोना महामारी से जूझ रहे थे. इस विस्फोट ने अब उनके जीने का रहा- सहा सहारा भी छीन लिया है.
बता दें कि दिनो बंदरगाह पर बने अमोनियम नाइट्रेट के गोदाम में हुए विस्फोट में करीब 181 लोग मारे गए थे और हजारों लोग घायल हो गए थे. विस्फोट की वजह से आसपास की दर्जनों इमारतें तहस नहस हो गई थी. विस्फोट की आवाज इतनी तेज थी कि करीब 200 किमी दूर भी उसे सुना गया.
लेबनान के लोग हो रहे दोहरी चुनौती का शिकार
कोरोना वायरस के कारण पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे लोगों के लिए यह विस्फोट दोहरी चुनौती लेकर आया है. इन दोहरी समस्याओं के चलते वहां के लोग अब मानसिक परेशानी का शिकार बनने लगे हैं.
चिकित्सा विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे कि लेबनान धीरे- धीरे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य आपातकाल की ओर बढ़ रहा है. विस्फोट के बाद से लोगों में रात में बुरे सपने आने. अचानक रोने, चिंता, क्रोध और थकावट के संकेत आ रहे हैं
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लेबनानी टीवी और सोशल मीडिया पर लगातार विस्फोट से जुड़ी तस्वीरें दिखाई जा रही है. इससे भी लोगों में मानसिक समस्या ओर बढ़ रही है.
निराशा का शिकार हो चुके हैं लेबनान के लोग
लेबनान में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े एनजीओ आलिंगन के वॉलिंटियर जैद दाओ ने कहा कि हर बार जब हम कहते हैं कि लेबनान में इससे खराब नहीं हो सकता तो यह किसी भी तरह से होता है. लेबनान में बहुत सारे लोग हालात को लेकर निराशा महसूस कर रहे हैं.
बेरूत के अस्पतालों के आंकड़ों के मुताबिक कम से कम 400 लोगों को आंख संबंधी चोट लगी है. जिनमें से 50 से ज्यादा लोगों को तुरंत सर्जरी की जरूरत है. इनमें से करीब 15 लोगों की एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई है.
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बताते चलें कि लेबनान में कोरोना भी लगातार कहर ढा रहा है. पिछले कई हफ्तों में लेबनान में कोरोना के मामलों में बढ़ोत्तरी देखी गई है. बेरूत विस्फोट के बाद कोरोना संक्रमण ने एक नया रिकॉर्ड बनाया.
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