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how to detox body: बॉडी डिटॉक्स करने का सबसे आसान तरीका, मिलेगी नई एनर्जी – easiest tips for body detoxification and how to detox body in hindi

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how to detox body: बॉडी डिटॉक्स करने का सबसे आसान तरीका, मिलेगी नई एनर्जी – easiest tips for body detoxification and how to detox body in hindi

Edited By Garima Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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हम यहां आपको यह बताने जा रहे हैं कि जब आप कुछ ही समय का उपवास करते हैं तो किस तरह आपके शरीर में बदलाव होते हैं और कितने समय में विषैले तत्व आपके शरीर से बाहर निकल जाते हैं। साथ ही आप इस आर्टिकल में यह भी जान पाएंगे कि कुछ समय भूखा रहने के बाद किस तरह हमारे शरीर को नई ऊर्जा मिलती है…

जब हम भूख को बर्दाश्त करते हैं और कुछ खाते नहीं हैं तो ऐसी स्थिति में हमारा पाचनतंत्र शरीर में जमा ग्लूकोज को ईंधन की तरह उपयोग करने लगता है। इससे तैयार एनर्जी से बॉडी के सभी फंक्शंस को जारी रखता है। सामान्य तौर पर हमारे शरीर में जमा ग्लूकोज को उपयोग करने में बॉडी को 24 से 48 घंटे का वक्त लगता है। उसके बाद शरीर में जमा फैट बर्न होना शुरू होता है और कीटोन बॉडीज बनना शुरू होती हैं…

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बॉडी डिटॉक्स करना क्या होता है?

कम होती है बूढ़ा होने की रफ्तार

-कीटोन बॉडीज हमारे शरीर में ऐंटिऑक्सीडेशन बढ़ाती हैं। यानी शरीर में लगातार चल रही ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया को धीमा करती हैं। ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया हमारे शरीर में प्रोटीन्स और सेल मैंब्रेन्स के स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाती है। दरअसल, शरीर में बढ़ी हुई ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया हमें तेजी से बुढ़ापे की तरफ धकेलने का काम करती है। साथ ही ब्रेन स्ट्रोक, नीरो-डी-जनरेशन की प्रॉसेस को तेज करती है।

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WBC काउंट के लिए जरूरी


-ही शरीर में ब्लड के साथ प्रवाहित हो रही डैमेज White Blood Cells (WBC) या श्वेत रक्त कोशिकाओं को भी पूरी तरह खत्म होने में 24 से 48 घंटे का समय लगता है। जब डैमेज सेल्स पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं, तभी शरीर में नई और एनर्जेटिक सेल्स के निर्माण की प्रक्रिया तेज होती है।

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इम्यून से सेल्स पर असर

-यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया द्वारा की गई एक स्टडी के मुताबिक किसी व्यक्ति द्वारा लगातार 3 दिन तक किया गया उपवास उस व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। क्योंकि फास्टिंग के दौरान हमारा शरीर एनर्जी को सेव करने की कोशिश करता है। इस दौरान शरीर में होनेवाले बदलावों से इम्यून सेल्स रिसाइकल होते हैं। इसका असर खासतौर पर उन इम्यून सेल्स पर पड़ता है, जो डैमेज हो चुके होते हैं।

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शरीर में बनती हैं नई कोशिकाएं

ब्रेन को ऐसे होता है फायदा

-लंबे समय की फास्टिंग के दौरान हमारा शरीर पहले से संरक्षित (स्टोर किए गए) ग्लूकोज का उपयोग करता है। इसके बाद शरीर में जमा फैट टूटने लगता है और कीटोन बॉडीज (एक प्रकार की ऊर्जा) बनाने लगता है। यह एनर्जी हमारे ब्रेन के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है। दरअसल, कीटोन बॉडीज हमारे दिमाग में नंबर ऑफ माइटोकॉन्ड्रिया (इन्हें एनर्जी फैक्ट्री भी कहा जाता है) बढ़ाती हैं।

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ब्रेन में एनर्जी का प्रोडक्शन

-एक ताजा स्टडी के मुताबिक, कीटोन बॉडीज हमारे हिपोकैंपस में एनर्जी मेटाबॉलिज़म बढ़ाती हैं। हिपोकैंपस हमारे दिमाग का वह हिस्सा होता है, जो हमारी यादाश्त को बनाए रखने और नई चीजों को सीखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

न्यूरॉलॉजिकल डिजीज से गुजर रहे ज्यादातर लोगों में एक कॉमन बात जो देखने को मिलती है, वह यह है कि उनके ब्रेन में एनर्जी का प्रोडक्शन कम होता है या यह प्रॉसेस बहुत स्लो होती है।

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शरीर को जवान बनाए रखने का तरीका

ऐसे बढ़ती है इम्यूनिटी

-तीन दिन की फास्टिंग के दौरान शरीर में नए WBC का काउंट तेजी से बढ़ता है। वाइट ब्लड सेल्स हमारे इम्यून सिस्टम का वो पार्ट हैं ,जो शरीर में बाहर से शरीर में आए हानिकारक वायरस और बैक्टीरिया को किल करने का काम करती हैं। फास्टिंग के दौरान हमारी बॉडी डैमेज हो चुकी WBC को फ्लश आउट करने का काम आसानी से कर पाती है। क्योंकि इस दौरान हमारा शरीर एनर्जी सेव करना चाहता है, ऐसे में गैर उपयोगी सेल्स और टॉक्सिन्स को हटा देता है।

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ये लोग ट्राई ना करें ऐसी फास्टिंग

-जो लोग डायबीटीज, बीपी, अस्थमा या अन्य किसी क्रॉनिग डिजीज से गुजर रहे उन्हें इस तरह की फास्टिंग के बारे में बिल्कुल नहीं सोचना चाहिए। साथ ही जो लोग किसी भी तरह का मेडिकल ट्रीटमेंट ले रहे हैं या हाल-फिलहाल किसी लंबी बीमारी से उबरे हैं, ऐसे लोग बिना अपने डॉक्टर की सलाह के ऐसे व्रत को ना करें। क्योंकि इस कंप्लीट फास्टिंग के दौरान व्रती केवल और केवल पानी का सेवन करता है।


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