how to keep body cool in summer naturally: 3 things ayurveda suggests to follow exclusively during summers to avoid sunstrokes – Summer tips: चुभती जलती गर्मी से बचने के लिए हर रोज करें ये 4 उपाय, आयुर्वेद एक्सपर्ट ने बताया शरीर रहेगा अंदर से कूल

गर्मी के मौसम में लू लगना, शरीर में पानी की कमी, घमौरी जैसी कई सारी बीमारियों से लोग परेशान रहते हैं। बेशक आप इन समस्याओं से बचने के लिए तरह-तरह के प्रोडक्ट्स और तरीके इस्तेमाल करते होंगे लेकिन क्या आप गर्मी के मौसम में खुद को सेहतमंद रखने में कामयाब हो पाते हैं? नहीं, क्योंकि आपके उपाय बॉडी को बहुत कम समय तक ही सूरज की रोशनी से बचा पाते है। इसलिए प्राकृतिक रूप से ठंडे पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है।

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर दीक्षा भावसार ने गर्मी के चुभती जलते मौसम से खुद को बचाने के लिए कुछ आयुर्वेदिक तरीकों को शेयर किया है। इसमें उन्होंने सोने के समय और दिशा से लेकर खान-पान के तरीकों को समझाया है। जिसे फॉलो करके आप समर सीजन को बिना डरे इजॉय कर सकते हैं।

गर्मी में इन आयुर्वेदिक उपायों से खुद को रखें सेहतमंद

​दिन की नींद है जरूरी

विशेषज्ञ बताती हैं कि आयुर्वेद में गर्मियों को छोड़कर हर मौसम में दिन में सोने की मनाही है। ग्रीष्म ऋतु (गर्मी) के लिए ठंडे स्थानों (घर के अंदर) में दोपहर में झपकी लेने की सलाह दी जाती है। क्योंकि मौसम गर्म होता है और सूरज हमारी अधिकांश ऊर्जा को सोख लेता है। गर्मियों के दिनों में झपकी लेने से ऊर्जा बहाल होती है (मानसिक और शारीरिक थकान से राहत मिलती है) और यह शरीर में कफ (नमी / स्नेहन) को भी बढ़ाता है जो गर्मियों में शुष्क और गर्म मौसम के कारण कम हो जाता है।

​गर्मी के दिनों कब और कैसे सोना है फायदेमंद

आयुर्वेद विशेषज्ञ बताती हैं कि झपकी लेने का सबसे अच्छा समय- भोजन के 1 घंटे बाद होता है। बहुत लोग खाने के तुरंत बाद ही बिस्तर को ओर चल पड़ते हैं, जो कि सेहत के लिए हानिकारक होता है।

ध्यान रहे कि आप सोने के लिए सर्वोत्तम मानी गयी दिशा- बायीं पार्श्व में ही सोएं। यह दिशा आयुर्वेद में वामा कुक्षी के रूप में जानी जाती है, जो पाचन क्रिया सहज बनाने में मदद करता है।

​प्राकृतिक रूप से ठंडा पानी और पेय पिएं

डॉक्टर दीक्षा बताती हैं कि आयुर्वेद गर्मियों के दौरान मिट्टी के बर्तन में रखे और प्राकृतिक रूप से ठंडा हुए पानी को पीने की सलाह देता है। गर्मी के दिनों में कमल, गुलाब, वेटिवर, पुदीना, धनिया को पानी में मिलाकर पीने की सलाह दी जाती है। ये सारे उपाय शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखता है और जिससे सनस्ट्रोक की समस्या नहीं होती है।

​चाँद की रोशनी में लेटें

आयुर्वेद जानकार दिक्षा बताती हैं कि अन्य मौसमों के विपरीत, आयुर्वेद गर्मियों के दौरान रात में बाहर (चाँद के नीचे) समय बिताने का सुझाव देता है। गर्मियों के दौरान रात में बाहर समय बिताना (विशेषकर चाँद के नीचे/चाँद की ओर मुंह करके सोना) दिन के दौरान होने वाली थकावट से राहत देता है। चांदनी दिमाग और शरीर को ठंडा करती है और आपको अच्छी नींद लेने में मदद करती है। दिक्षा रात में (यदि सुविधाजनक हो) ठंडा रहने के लिए एसी और कूलर पर प्राकृतिक चांदनी को प्राथमिकता देंने की सलाह देती हैं।

गर्मी के दिनों में क्या खाएं

आयुर्वेद प्राकृतिक रूप से ठंडा रहने के लिए शीतल पेय / शरबत जैसे बिल्व (बेल), सौंफ, पुदीना, नारियल पानी, गन्ने का रस, सत्तू, और अंगूर, तरबूज, अनार जैसे रसदार ठंडे फल खाने का सुझाव देता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।




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