If Najeeb Jung Proved That I Belonged To A Madrasa, Then…, Said Arif Mohammad Khan On The Allegations Of The Former Lt Governor Of Delhi – अगर नजीब जंग ने मुझे मदरसे से जुड़ा साबित कर दिया तो …, दिल्ली के पूर्व LG के आरोपों पर बोले आरिफ मोहम्मद खान 

खास बातें

  • नजीब जंग ने आरिफ मोहम्मद खान पर लगाए थे आरोप
  • आरिफ मोहम्मद खान ने किया NDTV का जिक्र
  • आरिफ मोहम्मद खान ने मदरसों को लेकर दिया था बयान

नई दिल्ली:

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. दरअसल, नजीब जंग ने आरिफ मोहम्मद खान को दिल्ली से सटे बरवाला मदरसे से जुड़ा बताया था. उनके इस आरोप में आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि अगर नजीब जंग के आरोप सही साबित होते हैं तो वो सार्वजनिक जीवन से सन्यास ले लूंगा. बता दें कि उदयपुर और अमरावती की घटना के बाद केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने NDTV से बात करते हुए मदरसा शिक्षा पर सवाल उठाए थे. इसके बाद ही नजीब जंग ने उनपर मदरसे से जुड़े होने का आरोप लगाया था. 

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आरिफ मोहम्मद खान ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने NDTV से बातचीत के दौरान मुझपर ये आरोप लगाया कि बरवाला के एक मदरसे से मैं जुड़ा हूं. बरवाला गांव दिल्ली से सिर्फ 100 किलोमीटर की दूरी है. मैं NDTV की टीम से अनुरोध करता हूं कि वो अपनी एक टीम वहां भेजें और पता लगाएं कि नजीब जंग के आरोपों में कितनी सच्चाई है. अगर नजीब जंग के आरोपों में सच्चाई निकली तो मैं अपने सार्वजनिक जीवन से ले लूंगा और अगर उन्होंने जो आरोप लगाएं हैं वो बेबुनियाद हुए तो मैं ये जानना चाहूंगा कि उन्होंने मुझपर जो झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाएं हैं उसको लेकर वे क्या करेंगे. 

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गौरतलब है कि उदयपुर की घटना के बाद आरिफ मोहम्मद खान ने मदरसा की शिक्षा पर सवाल उठाया था. उन्होंने हर बच्चे को 14 साल की उम्र तक विविधता पूर्ण शिक्षा देने की वकालत करते हुए कहा था कि यह उनका एक मौलिक अधिकार है और इस उम्र से पहले बच्चों को कोई अलग विशिष्ट शिक्षा नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा  था कि मुस्लिम लॉ (Muslim Law) कुरान से नहीं आता. इसे विभिन्न लोगों ने ‘एम्पायर’ के वक्त लिखा और इसमें सिर कलम करने की सजा का जिक्र है.

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उन्होंने कहा था कि अगर सिखाया जाए, उससे वे प्रभावित हों और वैसा ही व्यवहार करें तो इससे निपटना बेहतर होगा. ‘‘पहली बात तो यह कि यह कोई दैवीय कानून नहीं है. इसे लोगों ने ‘एम्पायर’ के वक्त लिखा. बच्चों को वे बताते हैं कि यह ईश्वर का कानून है.”राज्यपाल ने कहा था कि लोग ऐसी चीजों पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं जब ये आस्था की बात बन जाती हैं और उसके लिए वे कुछ भी करने को तैयार रहते हैं.


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