इस्लामाबाद: पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) को जॉर्डन की सालाना प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘द मुस्लिम 500′ ने ‘मैन ऑफ द ईयर’ सम्मान से नवाजा है. पत्रिका का कहना है कि इमरान दुनिया के 16 वें सबसे प्रभावशाली मुस्लिम हैं. हालांकि, यह बात अलग है कि इमरान के अपने ही देश में उन्हें लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
इमरान को मिले इस टाइटल पर पाकिस्तानी मीडिया ऐसे जश्न मना रहा है जैसे उन्होंने कोई जंग जीत ली है. न्यूज चैनलों पर स्पेशल प्रोग्राम चल रहे हैं. अखबार इमरान की तारीफों वाले शीर्षकों से पटे हुए हैं. गौर करने वाली बात यह है कि ‘द मुस्लिम 500’ का कहना है कि इमरान को यह खिताब अगस्त 2018 में उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत के साथ शांति बनाए रखने के प्रयासों के लिए दिया गया है. जबकि इमरान खान ने पिछले साल UN असेंबली सेशन में परमाणु हमले की धमकी दी थी और अब उनके मंत्री धमकी दे रहे हैं.
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इमरान को ‘मैन ऑफ द ईयर’ घोषित किये जाने के बाद से पाकिस्तानी मीडिया यह बताने में लगा है कि उनके कार्यकाल में पाकिस्तान ने क्या उपलब्धियां हासिल कीं. उदाहरण के तौर पर कहा गया है कि भ्रष्टाचार से लड़ाई में सरकार ने प्रगति की है. हालांकि. ये बात अलग है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की भ्रष्टाचार निरोधी एजेंसी को फटकार लगाई थी. पिछले महीने बलूचिस्तान में सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले एक पाकिस्तानी पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
इमरान का एक मंत्री जो मनी लॉन्ड्रिंग और तस्करी में लिप्त है, अभी भी आजाद घूम रहा है. पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री डॉ जफर मिर्ज़ा पर आरोप लगा था कि उन्होंने चीन गलत ढंग से 20 मिलियन मास्क दिए. पिछले महीने Zee News के सहयोगी चैनल WION ने बताया कि इमरान खान के छह सलाहकारों के पास दोहरी नागरिकता है. उनके पास विदेशों में लाखों डॉलर की संपत्ति थी और उन्होंने अपनी वित्तीय घोषणाओं में हेरफेर की थी.
इतना ही नहीं पाकिस्तानी मीडिया अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर भी इमरान सरकार की सराहना कर रहा है, जबकि पाकिस्तान की आर्थिक सेहत किसी से छिपी नहीं है. देश की GDP नीचे जा रही है और महंगाई लगातार ऊपर. पाकिस्तानी मुद्रा में 35 फीसदी की गिरावट आई है. पाकिस्तान अभी भी अंतरराष्ट्रीय कर्ज पर जीवित है.
मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इमरान खान भारत को छोड़कर दुनिया के दूसरे देशों से अच्छे संबंध विकसित करने में कामयाब रहे हैं. लेकिन शायद मीडिया सऊदी अरब प्रकरण को पूरी तरह भूल गया है. कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तानी रुख से नाराज होकर सऊदी अरब ने उससे रिश्ते तोड़ लिए हैं. खाड़ी के कई देशों के साथ पाकिस्तान का झगड़ा बढ़ रहा है. अमेरिका ने भी उससे निश्चित दूरी बना ली है.
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