महाकाल मंदिर परिसर मे खुदाई से मिले शिवलिंग पर संस्कृत व ब्राह्मी लिपि के लेख

उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में महाराजवाड़ा से मंदिर तक बनाए जा रहे अंडरपास के लिए की जा रही खुदाई के दौरान शुक्रवार सुबह शिवलिंग प्राप्त हुआ था। इस शिवलिंग पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पुरातत्व वेत्ता तथा इतिहासकार प्रो.डा.रमण सोलंकी ने बताया की महाकाल वन के कंकर-कंकर में शंकर का वास है।

यह संपूर्ण परिक्षेत्र शिव साधकों का गढ़ रहा है। सम्राट विक्रमादित्य जो कि स्वयं परम शिव और शक्ति के भक्त थे, उन्होंने अपने राज्य में अनेक मंदिरों का निर्माण कराया। बाद में आक्रांताओं ने इन मंदिरों को नष्ट भ्रष्ट कर जमींदोज कर दिया। नवनिर्माण के दौरान की जा रही खुदाई में उन प्राचीन मंदिरों के अवशेष, शिवलिंग और मूर्तियां हमें प्राप्त हो रहे हैं।

प्राचीन भारतीय सभ्यता, संस्कृति व इतिहास को जानने व समझने में यह शिवलिंग मील का पत्थर साबित हो सकता है। शिवलिंग पर संस्कृत व ब्राह्मी लिपि में लेख होने का अनुमान है।

पहले भी निकली थी एक हजार साल पुरानी प्रतिमाएंमहाकाल मंदिर में नवनिर्माण के लिए की जा रही खोदाई में पुरातात्विक अवशेषों का मिलना जारी है। पांच साल पहले मंदिर परिसर में खोदाई के दौरान एक हजार साल पुराने शिव मंदिर का आधार भाग, भग्नावशेष, शिवलिंग तथा अनेक मूर्तियां प्राप्त हुई थी। मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग द्वारा प्राप्त भग्नावशेषों से उसी स्थान पर शिव मंदिर का पुर्ननिर्माण कराया जा रहा है।

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