IPS जीपी सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, कहा- पुलिस अधिकारी भूल जाते हैं कि…

दिल्ली/रायपुर. छत्तीसगढ़ के निलंबित आईपीएस अधिकारी गुरजिंदर पाल (जीपी) सिंह की जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी गई है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छतीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने सरकार से 4 सप्ताह में मामले में जवाब प्रस्तुत करने को कहा है. हालांकि जीपी सिंह के वकील ने मामले को दो हफ्ते में लगाने की अपील सुप्रीम कोर्ट में की, लेकिन कोर्ट ने दो हफ्ते की मांग को ठुकरा दिया. इस मामले में चीफ जस्टिस ने एक अहम टिप्पणी भी की है. पुलिस अधिकारियों के व्यवहार और कार्यशैली को लेकर कोर्ट ने गुरुवार को फिर से टिप्पणी की.

चीफ जस्टिस ने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पड़ी करते हुए कहा कि ‘पुलिस अधिकारी सरकार के साथ अच्छे हैं और जब सरकार बदलती है तो आपको यह सामना करना पड़ता है. वे (पुलिस अधिकारी) भूल जाते हैं कि उन्होंने क्या किया.’ बता दें कि इससे पहले भी जीपी सिंह के मामले में कोर्ट इस तरह की टिप्पणी कर चुका है. गौरतलब है कि अवैध संपत्ति और राजद्रोह का केस जीपी सिंह झेल रहे हैं. राज्य की आर्थिक अपराध शाखा और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जुलाई 2021 में छापेमार कार्रवाई की थी. इसमें जीपी सिंह से 15 करोड़ रुपए से अधिक की आय से अधिक संपत्ति का पता लगाने का दावा किया किया गया है.

इसलिए बनाए गए राजद्रोह के आरोपी
जीपी सिंह के ठिकानों में मारे गए छापे के दौरान कंप्यूटर से मिली सामग्री के आधार पर उन पर सरकार के खिलाफ साजिश करने का भी आरोप लगा है. इस सिलसिले में उन पर आईपीसी की धारा 124ए के तहत राजद्रोह का भी मुकदमा दर्ज किया गया है. जनवरी 2022 के पहले सप्ताह में जीपी सिंह को दिल्ली के पास गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया था. पुलिस रिमांड के बाद 18 जनवरी से अब तक वे न्यायिक रिमांड पर जेल हैं. जिला कोर्ट रायपुर और हाई कोर्ट बिलासपुर से उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है. अब जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई है.

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