- 30 से अधिक मंत्रियों ने MHA को सौंपी रिपोर्ट
- जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दिया गया है
पिछले महीने 30 से अधिक केंद्रीय मंत्री जम्मू-कश्मीर दौरे पर गए थे. उन सभी के कश्मीर दौरे का मुख्य उद्देश्य राज्य में कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की जानकारी इकट्ठा करना था. बुधवार को सभी मंत्रियों ने इससे संबंधित एक रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय यानी कि पीएमओ को सौंपी है. अधिकारियों ने बुधवार को इस बात की जानकारी दी.
बता दें, लगभग 37 केंद्रीय मंत्री, जमीनी सच्चाई का जायजा लेने और विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं पर लोगों से चर्चा के लिए जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए थे.
वहीं एक सरकारी अधिकारी ने केंद्रीय मंत्रियों द्वारा सौंपे गए रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए कहा कि 30 से अधिक मंत्रियों ने अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी है, जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के पास भेज दिया गया है.
अधिकारी ने बताया कि रिपोर्ट में मुख्य रूप से इस बात का जिक्र है कि वहां कल्याणकारी योजनाओं को कैसे लागू किया जा रहा है. इसके अलावा केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को किन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए.
जाहिर है केंद्रीय मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर जम्मू-कश्मीर की यात्रा की थी. इनमें कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, खेल मंत्री किरन रिजिजू, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किशन रेड्डी और नित्यानंद राय शामिल थे.
25 विदेशी राजनयिकों का प्रतिनिधिमंडल घाटी पहुंचा
उधर, जम्मू-कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत प्राप्त विशेष दर्जा वापस लिए जाने के छह महीने बाद केंद्र शासित प्रदेश की स्थिति का मौके पर जाकर आकलन करने के उद्देश्य से 25 विदेशी राजनयिकों का दूसरा प्रतिनिधिमंडल बुधवार को घाटी पहुंचा. राजनयिकों के इस दौरे का आयोजन केंद्र सरकार ने किया है.
अधिकारियों ने बताया कि राजनयिकों का यह प्रतिनिधिमंडल सुबह करीब 11 बजे श्रीनगर हवाई अड्डे पर पहुंचा, लेकिन खराब मौसम के कारण वे तय कार्यक्रम के अनुरूप उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले के दौरे पर नही जा सके.
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उन्होंने बताया कि ये राजनयिक यहां एक होटल में ठहरे हैं. वे प्रसिद्ध डल झील में शिकारा के लिए भी गए. इससे पहले सरकार ने 15 विदेशी राजनयिकों का एक दल जम्मू कश्मीर के दौरे पर भेजा था, जिसका लक्ष्य उन्हें यह बताना था कि कश्मीर घाटी में सामान्य हालात तेजी से पटरी पर लौट रहा है. कई विपक्षी दलों ने इसे ‘गाइडेड टूर’ बताया था.