मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के माध्यम से मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। अभियान के तहत प्रदेशभर में 2 लाख से अधिक जल संरचनाओं पर कार्य किया गया है, जिससे जल संरक्षण को नई दिशा मिली है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बावड़ियों, तालाबों, नहरों, नदी उद्गम स्थलों और अमृत सरोवरों सहित विभिन्न जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का कार्य लगातार किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य भूजल स्तर बढ़ाना, जल उपलब्धता सुनिश्चित करना और सिंचाई क्षमता का विस्तार करना है।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश आज देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। गंगा दशहरा के अवसर पर आयोजित सामूहिक जल संरक्षण अभियान में 8 लाख से अधिक जलदूतों, स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि जल संरक्षण अब जनआंदोलन का स्वरूप ले रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल है तो कल है” के संकल्प के साथ प्रदेश सरकार जल संरचनाओं को बचाने, वर्षा जल के संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने का आह्वान किया।
सरकार का मानना है कि जल गंगा संवर्धन अभियान के सकारात्मक परिणाम आने वाले वर्षों में जल संकट को कम करने, कृषि उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


