jammu kashmir foreign delegation visit over security and stability issues after local body elections – आर्टिकल 370 हटने के बाद आज दूसरी बार घाटी के हालात का जायजा लेने पहुंचे विदेशी राजनयिक

आर्टिकल 370 हटने के बाद आज दूसरी बार घाटी के हालात का जायजा लेने पहुंचे विदेशी राजनयिक

विदेशी राजनयिकों का दल पहले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात करेगा. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

यूरोप और अफ्रीका के राजदूत जम्मू कश्मीर में खासकर जिला विकास परिषद के चुनाव के बाद विकास कार्यों और सुरक्षा स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए बुधवार को इस केंद्रशासित प्रदेश की यात्रा करेंगे. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान विभिन्न देशों के राजदूत जम्मू कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त किये जाने के बाद केंद्रशासित प्रशासन द्वारा किये गये विकास कार्यों के बारे में सीधी जानकारी लेंगे.

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अधिकारियों के अनुसार इन विदेशी दूतों के साथ कुछ मशहूर नागरिकों एवं प्रशासनिक सचिवों की बैठक के अलावा डीडीसी के नवनिर्वाचित प्रतिनिधि भी उनसे मिलेंगे और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र सुनिश्चित करने के केंद्र के प्रयासों को प्रदर्शित किया जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक संगठनों को मजबूत बनाने की बात प्रमुखता से सामने रखी जाएगी तथा उनके सामने प्रजेंटेशन के जरिए बताया जाएगा कि कैसे पंचायतों को वित्तीय अधिकार देकर उन्हें सशक्त बनाया गया.

उन्होंने बताया कि दूसरे दिन विदेशी प्रतिनिधिमंडल जम्मू जाएगा और वहां उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मिलेगा. वह कुछ डीडीसी सदस्यों एवं कुछ सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी मिलेगा. अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान के दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार द्वारा किया जा रहा यह दूसरा राजनयिक प्रयास है. पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर के बारे में दुष्प्रचार फैलाने में लगा है.

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उन्होंने बताया कि कश्मीर घाटी में कानून व्यवस्था से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी विदेशी प्रतिनिधिमंडल को सुरक्षा स्थिति के बारे में बतायेंगे और खासकर वे नियंत्रण रेखा के जरिए भारत में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने और बार बार संघर्षविराम समझौते का उल्लंघन करने की पाकिस्तान की कोशिशों को उसके सामने रखेंगे.

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केंद्र सरकार ने 2019 में पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा वापस ले लिया था और उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांटने का ऐलान किया था.


 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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