Jammu Kashmir News: European Union envoy after Kashmir visit: important to lift restrictions swiftly – कश्मीर यात्रा के बाद यूरोपीय संघ के दूत ने कहा, घाटी से पाबंदियां तेजी से हटाए जाने की जरूरत

नई दिल्ली:

घाटी की ताजा यात्रा के बाद यूरोपीय यूनियन ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने जम्मू कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सकारात्मक कदम उठाए हैं, लेकिन पाबंदियों को जल्द से जल्द हटाए जाने की जरूरत है. बीते अगस्त महीने में जम्मू कश्मीर को मिले विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया गया था. साथ ही उसे दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया था. बता दें कि जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने के छह महीने बाद केंद्र शासित प्रदेश की स्थिति का मौके पर जाकर आकलन करने के उद्देश्य से यूरोपीय यूनियन के राजनयिक सहित 25 विदेशी राजनयिकों का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को घाटी पहुंचा था. राजनयिकों के इस दौरे का आयोजन केंद्र सरकार की तरफ से किया गया था. इससे पहले जनवरी में 15 विदेशी राजनयिकों का एक दल जम्मू-कश्मीर गया था और स्थिति का आकलन किया था. इस दल में अमेरिकी राजदूत केनेथ आई जस्टर भी शामिल थे.

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यूरोपीय यूनियन की तरफ से शुक्रवार को जारी बयान में कहा गया, ‘भारत सरकार ने स्थिति को सामान्य बनाने के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं. लेकिन इंटरनेट एक्सेस और मोबाइल सेवाओं पर अभी भी पाबंदी है… साथ-साथ कुछ राजीतिक नेता अभी भी हिरासत में हैं. यूरोपीय संघ के विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के प्रवक्ता वर्जिनी बट्टू हेनरिक्सन के बयान के अनुसार, ‘हालांकि हम गंभीर सुरक्षा चिंताओं को समझते हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि शेष प्रतिबंधों को तेजी से हटाया जाए. 

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विदेशी राजनयिकों के दौरों पर प्रतिक्रिया देते हुए पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि विदेशी राजनयिक अधिकारियों से इंटरनेट पर प्रतिबंध और लोक सुरक्षा अधिनियम के तहत राजनेताओं के हिरासत के बारे में सवाल करेंगे. इल्तिजा ने ट्वीट किया, ‘उम्मीद है कि पांच अगस्त से इंटरनेट पर प्रतिबंध एवं आर्थिक घाटे के बारे में आप सब (विदेशी राजनयिक) भारत सरकार से सवाल करेंगे.

30 से अधिक केंद्रीय मंत्रियों ने PMO को सौंपी रिपोर्ट

पिछले महीने जम्मू-कश्मीर का दौरा करने वाले 30 से अधिक केंद्रीय  मंत्रियों ने वहां कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन को लेकर अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंप दी है. अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी. लगभग 37 केंद्रीय मंत्रियों ने जमीनी सच्चाई का जायजा लेने और विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं को लेकर लोगों से मिलने के लिए जम्मू-कश्मीर का दौरा किया था. एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि उनमें से 30 से अधिक मंत्रियों ने अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपी, जिसने उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के पास भेज दिया.

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