छतरपुर जिले के बिजावर क्षेत्र में जमीनी मुद्दों को उजागर करने वाले पत्रकार Rakesh Singh पर हुए प्राणघातक हमले ने पूरे जिले में कानून-व्यवस्था और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हमला न केवल निंदनीय माना जा रहा है, बल्कि इससे अपराधियों के बढ़ते हौसलों की भी झलक मिलती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध शराब के धंधे में लिप्त तत्वों को कहीं न कहीं खाकी और सफेदपोश लोगों का संरक्षण मिल रहा है, जिसके चलते वे बेखौफ होकर इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। आरोप यह भी है कि कई मामलों में पुलिस की कार्रवाई संदिग्ध नजर आती है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
घटना के बाद पत्रकार संगठनों और क्षेत्रीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। सभी ने एक स्वर में जिला पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़ित पत्रकार को न्याय दिलाया जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि मामले में लापरवाही बरती गई, तो इस मुद्दे को राजधानी स्तर तक उठाया जाएगा।
धरना प्रदर्शन की चेतावनी:
घटना से नाराज पत्रकार संगठनों ने सोमवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि बिना निष्पक्ष जांच के पत्रकारों पर ही आपराधिक मामले दर्ज करना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला है। साथ ही हमलावरों पर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं लगाने की मांग की जाएगी।
अमित भटनागर ने जताई चिंता:
सामाजिक कार्यकर्ता Amit Bhatnagar ने भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकारों को न्याय नहीं मिला, तो वे भी पत्रकारों के साथ धरने पर बैठेंगे।