भोपाल:
मध्यप्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल मंडलाते हुए नजर आ रहे हैं. राज्य में पार्टी के चार और बाहर से समर्थन दे रहे निर्दयलों और सपा-बसपा के विधायकों सहित आठ विधायकों को गुड़गांव के एक होटल में देखा गया है. इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि भाजपा राज्य सरकार को अस्थिर करने के लिए उनकी पार्टी के विधायकों को रिश्वत देने की कोशिश कर रही है. दिग्विजय सिंह ने दावा किया था कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा 25-35 करोड़ रुपये देकर कांग्रेस के विधायकों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं. बता दें, पिछले साल जुलाई में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव ने राज्य विधानसभा में कमलनाथ सरकार पर हमला करते हुए कहा था, ‘ऊपर से आदेश है. तुम्हारी सरकार नहीं बचेगी.’
24 जुलाई 2019 को भार्गव ने कहा था, ‘हमरे ऊपर वाले नंबर 1 या नंबर 2 का आदेश हुआ तो आपकी सरकार 24 घण्टे भी नहीं चालेगी. हालांकि इसके बाद राज्य विधानसभा में आपराधिक कानून (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2019 पर चर्चा के दौरान कमलनाथ सरकार को पक्ष में 122 वोट पड़े थे जो राज्य राज्य की 231 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत से सात अधिक है.
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उस दौरान भाजपा के दो विधायकों ने कांग्रेस सरकार के पक्ष में मतदान किया था. वर्तमान में राज्य विधानसभा में 228 सदस्य हैं. दो विधायकों की मृत्यु के बाद दो सीटें खाली है. फिलहाल कांग्रेस के पास 114, बीजेपी की 107 विधायक है. शेष नौ सीटों में से दो बसपा के पास हैं जबकि सपा का एक विधायक है. वहीं विधानसभा में चार निर्दलीय विधायक भी हैं.
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