कटनी जिले की 28 वर्षीय पर्णिका जैन की रहस्यमय मौत ने परिवार वालों को झकझोर कर रख दिया है। 28 अप्रैल को दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज स्थित उनके ससुराल में कटनी जिले की बेटी पर्णिका की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। लेकिन इस दुखद घटना ने एक और गहरा जख्म तब दिया जब उनके परिवार ने पुलिस पर निष्पक्ष जांच में लापरवाही बरतने और सच को दबाने का आरोप लगाया।Vo 01- पर्णिका के पिता अजय कुमार जैन ने भावुक स्वर में बताया कि वसंत कुंज उत्तर थाने की पुलिस ने शुरुआती दौर में मामल दर्ज करने से इंकार कर दिया और कई अहम साक्ष्यों की अनदेखी की।
उन्होंने कहा, “लगातार आग्रह और दबाव बनाने के बाद ही एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन तब तक कई जरूरी तथ्य मिटाए जा चुके थे।” पर्णिका के परिजन जो दिल्ली से 800 किलोमीटर दूर कटनी में रहते हैं, उन्होंने बताया कि उन्हें बेटी की मौत की जानकारी कई घंटे बाद दी गई, जब वे किसी भी तरह दिल्ली नहीं पहुंच सकते थे। यह देरी, उनके अनुसार, एक साजिश की ओर इशारा करती है। परिवार का कहना है कि पर्णिका जैन लंबे समय से घरेलू हिंसा का शिकार थीं। आरोप है कि पति डॉ. आयुष भदौड़ा अक्सर दहेज की मांग करता था और उस पर शारीरिक हमला करता था। घटना से कुछ घंटे पहले भी पर्णिका ने अपने पिता को फोन कर बताया था कि उसे पूरे शरीर में दर्द हो रहा है और वह डरी हुई है। “उसने कहा – मुझे नहीं लगता मैं बच पाऊंगी”
पर्णिका के पिता अजय जैन ने बताया, “उसकी आवाज कांप रही थी। वह रो रही थी। उसने कहा कि उसे लग रहा है वो अब नहीं बचेगी।” यह कॉल अब एकमात्र गवाही बन गई है उस डर और दर्द की, जिससे पर्णिका गुजर रही थी। पर्णिका के परिवार ने यह भी चिंता जताई कि पोस्टमार्टम उसी सफदरजंग अस्पताल में किया गया जहां डॉ. भदौड़ा कार्यरत हैं। यह एक संभावित हितों के टकराव का मामला है। परिवार ने मांग की है कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा हो और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। पर्णिका जैन का परिवार अब न्याय के लिए अभियान चला रहा है। वे चाहते हैं कि इस मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच हो ताकि एक बेटी को न्याय मिल सके और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।