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kushtarog symptoms: Kushtarog: कुष्ठ रोग के लक्षण और इलाज के बारे में वो सब जो आपको पता होना चाहिए – what is kushtarog symptoms and treatment

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हमारे समाज में लंबे समय तक कोढ़ की बीमारी को शाप या भगवान द्वारा दिया गया दंड माना जाता रहा है। लेकिन ऐसा है नहीं… भले ही उस काल में ऐसा रहा हो लेकिन आज के समय में कुष्ठ रोग लाइफस्टाइल और पोषण की कमी से जुड़ी एक समस्या है। कोढ़ की बीमारी उन लोगों पर जल्दी हावी हो जाती है, जिनके शरीर में पोषण की कमी होती है…

लेप्रसी को कैसे जानें?

-लेप्रसी एक ऐसी बीमारी है जो हवा के जरिए फैलती है। लेप्रसी को हैनसेन रोग भी कहा जाता है। यह बीमारी बहुत धीमी रफ्तार से ग्रो होनेवाले बैक्टीरिया से फैलती है इसलिए पूरी तरह इसके लक्षण सामने आने में कई बार 4 से 5 साल का समय भी लग जाता है। जिस बैक्टीरिया के कारण यह बीमारी फैलती है, उसे माइक्रोबैक्टीरियम लेप्रै कहा जाता है। इसी कारण इस बीमारी का इंग्लिश नेम लेप्रसी रखा गया।

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-लेप्रसी, कुष्ठ रोग या कोढ़। यह एक ऐसी बीमारी है जिस पर आज दुनिया के अधिकतर देश कंट्रोल कर चुके हैं। लेकिन केन्या जैसे कुछ देशों में आज भी लेप्रसी भयावह स्थिति में देखने को मिलती है। एक वक्त में यह दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारी मानी जाती थी। लेकिन अब इस दिशा में मेडिकली कई सावधानियां और वैक्सीन्स हैं, जो बॉडी को इससे बचाती हैं।

क्या होता है कुष्ठ रोग

-लेप्रसी यानी कोढ़ एक ऐसी बीमारी है जो हवा में मौजूद बैक्टीरिया के जरिए फैलती है। हवा में ये बैक्टीरिया किसी बीमार व्यक्ति से ही आते हैं। इसलिए इसे संक्रामक रोग भी कहते हैं। यानी यह संक्रमण या कहिए कि सांस के जरिए फैलती है। लेकिन यह छुआछूत की बीमारी बिल्कुल नहीं है। अगर आप इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति से हाथ मिलाएंगे या उसे छू लेंगे तो आपको यह बीमारी बिल्कुल नहीं होगी।

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– लेकिन अगर उसके खांसने, छींकने से लेप्रै बैक्टीरिया हवा में मौजूद नमी के साथ ट्यूनिंग करके खुद को डिवेलप कर लेता है और आप उस हवा में सांस लेकर नमी के उन कणों को अपने अंदर ले लेते हैं तो इस तरह की स्थितियां बन जाती हैं कि आप इस बीमारी से संक्रमित हो जाएं।

छुआछूत और संक्रमण का अंतर

-वैसे तो आमतौर पर संक्रमण यानी इंफेक्शन और छुआछूत यानी टचेबिली को एक ही तरह के रोग माना जाता है। लेकिन इनमें जो हेयरलाइन डिफरेंस यानी बहुत बारीक अंतर होता है, वो यह है कि संक्रामक रोग श्वांस और हवा के जरिए फैलते हैं। वहीं, छुआछूत की बीमारी एक-दूसरे को छूने और एक-दूसरे की इस्तेमाल की गई चीजों को उपयोग में लाने से होती है। जबकि कुछ रोग ऐसे होते हैं जो सांस और छुआछूत दोनों से फैलते हैं। यह तभी होता है जब बीमारी फैलानेवाले बैक्टीरिया उस सामान पर अपनी पकड़ बना लेते हैं या ग्रो कर चुके होते हैं, जिसे एक स्वस्थ व्यक्ति इस्तेमाल में ले रहा है।

क्या होता है कुष्ठ रोग

लेप्रसी के लक्षण

– लेप्रसी या कोढ़ के दौरान हमारे शरीर पर सफेद चकत्ते यानी निशान पड़ने लगते हैं। ये निशान सुन्न होते हैं यानी इनमें किसी तरह का सेंसेशन नहीं होता है। अगर आप इस जगह पर कोई नुकीली वस्तु चुभोकर देखेंगे तो आपको दर्द का अहसास नहीं होगा। ये पैच या धब्बे शरीर के किसी एक हिस्से पर होने शुरू हो सकते हैं, जो ठीक से इलाज ना कराने पर पूरे शरीर में भी फैल सकते हैं।

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-सिर्फ चुभन ही नहीं बल्कि लेप्रसी के मरीज को शरीर के विभिन्न अंगों और खासतौर पर हाथ-पैर में ठंडे या गर्म मौसम और वस्तु का अहसास नहीं होता है। प्रभावित अंगों में चोट लगने, जलने या कटने का भी पता नहीं चलता है। जिससे यह बीमारी अधिक भयानक रूप लेने लगती हैं और शरीर को गलाने लगती है।

कुष्ठ रोग के लक्षण

-लेप्रसी के मरीज को पलक झपकने में दिक्कत होने लगती है। क्योंकि लेप्रै बैक्टीरिया मरीज की आंखों की नसों पर हावी होकर उनके सेंसेशन और सिग्नल्स को प्रभावित करता है। ऐसे में पेशंट को पलक झपकने की याद नही आती और पलक झपक भी नहीं पाती। इससे हर समय खुला रहने के कारण आंखें ड्राई होने लगती हैं और हमारी देखने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। आंखों से संबंधित कई रोग पनपने लगते हैं।

ये सावधानियां जरूर बरतें

-अगर आपके घर में या आस-पास कोई इस तरह का व्यक्ति है, जिसकी आंखों में लगातार पानी आ रहा हो, हाथ पैर में छाले हो रहे हों, शरीर के कुछ हिस्से में गर्म-ठंडे का अहसास नहीं हो रहा हो या शरीर में सुन्नता बढ़ रही हो।

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– ऐसी स्थिति में बिना देरी के तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अगर लेप्रसी या कुष्ठ रोग का पता प्रारंभिक अवस्था में ही चल जाता है और इसका सही तरीके से इलाज कराना शुरू कर दिया जाता है तो 6 महीने से लेकर डेढ़ साल के अंदर इस बीमारी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।

कुष्ठ रोग का इलाज

इलाज से जुड़ी बातें

-अपने इलाज के लिए जरूरी नहीं है कि आप उस डॉक्टर का ही चुनाव करें, जो आपकी बीमारी को दूर कर सके।

– बीमारी को लेकर अपनी जानकारी बढ़ाएं और बीमारी से संबंधित मन में उठनेवाली हर शंका को अपने डॉक्टर से सवाल पूछकर दूर करें।

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