मॉस्को: रूस (Russia) की पहल पर अर्मेनिया (Armenia) और अजरबैजान (Azerbaijan) में युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत जरूर शुरू हुई है, लेकिन दोनों देशों के तेवर अभी भी बरकरार है. अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव (Azerbaijan President Ilham Aliyev) ने कहा है कि शांति स्थापित करने का अर्मेनिया के पास यह आखिरी मौका है.
हम युद्ध जीत रहे हैं
अलीयेव ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि हम अर्मेनिया को शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष के निपटारे का मौका दे रहे हैं. यह उसका अंतिम मौका है. अजरबैजान के राष्ट्रपति के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की युद्ध खत्म करने की कोशिशों को झटका लग सकता है. रूस ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों को मॉस्को में बैठक के लिए बुलाया है. दोनों पक्षों में बातचीत भी चल रही है, लेकिन अजरबैजान की तरफ से आया यह बयान वार्ता की गाड़ी को पटरी से उतार सकता है.
ये भी पढ़ें: दुनिया में सबसे संतुष्ट भारत के मुस्लिम: मोहन भागवत
इल्हाम अलीयेव ने आगे कहा कि इस मुद्दे को हल करने का एकमात्र रास्ता है हमारे क्षेत्रों से कब्जा छोड़कर पीछे हटना. हम युद्ध में जीत रहे हैं, हम अपनी भूमि वापस प्राप्त करेंगे और अपनी क्षेत्रीय अखंडता को बहाल करेंगे.
तुर्की ने डाला आग में घी
इस बीच, तुर्की (Turkey) ने भी आग में घी डालने का काम किया है. तुर्की ने कहा है कि यदि अर्मेनियाई सेना विवादित इलाके से पीछे नहीं हटती, तो शांति के प्रयास विफल हो जाएंगे. तुर्की के राष्ट्रपति के प्रवक्ता इब्राहिम कालिन ने कहा, ‘अगर वे युद्ध विराम चाहते हैं, इस दिशा में काम कर रहे हैं तो उन्हें विवादित इलाकों को लेकर पूर्व के समझौतों को ध्यान में रखना होगा. अगर इस पर गौर नहीं किया जाता तो शांति के प्रयासों का विफल होना तय है’.
पहले भी दिया था भड़काऊ बयान
तुर्की लगातार दोनों देशों के बीच आग भड़काने का काम कर रहा है. तुर्की अजरबैजान की तरफ है और अर्मेनिया को डराने-धमकाने के प्रयास में लगा है. हाल ही में उसके रक्षा मंत्री हुलसी अकर ने कहा था कि जब तक अर्मेनिया नागोर्नो-काराबाख (Nagorno-Karabakh) पर कब्जा नहीं छोड़ देता, तब तक हमारे अजरी भाइयों से युद्ध बंद करने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए. वहीं, संयुक्त राष्ट्र ने एक बार फिर दोनों देशों से युद्ध बंद करने की अपील की है. UN ने कहा है कि युद्ध के चलते नागरिकों पर होने वाले प्रभाव को देखते हुए अर्मेनिया और अजरबैजान को संघर्ष समाप्त करना चाहिए.
यह है पूरे विवाद की जड़
आपको बता दें कि पूर्व सोवियत संघ का हिस्सा रह चुके अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच युद्ध की बड़ी वजह है नागोर्नो-काराबाख (Nagorno-Karabakh) क्षेत्र. इस क्षेत्र के पहाड़ी इलाके को अजरबैजान अपना बताता है, जबकि यहां अर्मेनिया का कब्जा है. 1994 में खत्म हुई लड़ाई के बाद से इस इलाके पर अर्मेनिया का कब्जा है. 2016 में भी दोनों देशों के बीच इसी इलाके को लेकर खूनी युद्ध हुआ था, जिसमें 200 लोग मारे गए थे. अब एक बार फिर से दोनों देश आमने-सामने हैं.तुर्की के रक्षा मंत्री हुलसी अकार ने पहले कहा था,
LIVE TV

