दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया जिले में राजस्व न्यायालयों के कामकाज और प्रशासनिक सुस्ती को लेकर वकीलों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। जिला अभिभाषक संघ के पदाधिकारी और तमाम अधिवक्ता गुरुवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और एक कड़ा ज्ञापन सौंपा। वकीलों ने आरोप लगाया कि राजस्व अदालतों में मामलों का समय पर निराकरण न होने की वजह से न्यायिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे आम जनता और वादकारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वे न्यायालयों के बहिष्कार जैसा बड़ा कदम उठाने पर मजबूर होंगे।एसडीओ कोर्ट में करीब 200 मामले लंबित, हस्ताक्षरों का है अकालअभिभाषक संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में सबसे गंभीर मुद्दा एसडीओ न्यायालय दतिया का उठाया गया है। वकीलों का कहना है कि इस अदालत में लगभग 200 प्रकरण केवल अंतिम आदेश के लिए महीनों से लंबित पड़े हैं। स्थिति यह है कि कई मामलों में प्रथम आदेश पत्रिका और नई अपीलों पर पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर तक नहीं हो पा रहे हैं, जिसके चलते प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी है और फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। इसके अलावा, जिन सुधार प्रकरणों में जांच रिपोर्ट आ चुकी है, उनमें भी नियमानुसार समय पर आदेश पारित नहीं किए जा रहे हैं।कर्मचारियों की कमी और चुनाव ड्यूटी से ठप हुआ कामकाजवकीलों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजस्व न्यायालयों के अधिकांश कर्मचारियों और बाबुओं की ड्यूटी चुनाव और अन्य गैर-न्यायिक कार्यों में लगा दी जाती है, जिसका सीधा असर अदालती कामकाज पर पड़ता है। समय पर रिकॉर्ड की नकल न मिलना, नए प्रकरणों को पंजीबद्ध करने में अत्यधिक देरी होना और कानूनी समय-सीमा के भीतर मामलों का निबटारा न होना आम जनता की मुसीबतें बढ़ा रहा है।राजस्व रिकॉर्ड से काश्तकारों के नाम हटाने का सनसनीखेज मामलाज्ञापन में एक और बड़ा आरोप लगाते हुए वकीलों ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में से बड़ी संख्या में वैध काश्तकारों के नाम चुपचाप हटा दिए गए हैं। इन गंभीर त्रुटियों से जुड़े सुधार प्रकरण भी अदालतों में धूल फांक रहे हैं। संघ ने मांग की है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में तुरंत संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई की जाए।सुधार नहीं हुआ तो होगा अदालतों का बहिष्कारजिला अभिभाषक संघ ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली और व्यवस्था में शीघ्र सुधार नहीं लाया गया, तो अधिवक्ता सभी राजस्व न्यायालयों के पूर्ण बहिष्कार का मार्ग चुनेंगे। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने वकीलों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि उनकी सभी समस्याओं का समयबद्ध और उचित समाधान किया जाएगा।


