तेंदुआ शावक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में फिर एक तेंदुआ शावक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला, प्रबंधन ने कहा कि शव परीक्षण में संग्रहीत नमूने से मौत के कारण का चलेगा पता

उमरिया – जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में फिर एक तेंदुआ शावक की मौत ने प्रबंधन पर सवालिया निशान लगा दिया है l पतौर कोर रेंज क्षेत्र अंतर्गत मझौली बीट के कक्ष क्रमांक आर.एफ. 404 तेंदुआ शावक का शव मिलने से हड़कंप मच गया, दिन में ग़स्ती दल को में गस्ती के दौरान बांस के भीरे की ओर से दुर्गंध आने पर पास जाकर देखा गया तो एक तेंदुआ मृत अवस्था मे मिला जिसकी सूचना अधिकारियों को दी गई, सभी वहां पहुंचे तो कई दिन पूर्व मरे तेंदुआ शावक का शव मिला l

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के क्षेत्र संचालक डॉक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि तेंदुआ शावक के शव की सूचना मिलने पर एनटीसीए नई दिल्ली एवं कार्यालय मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक मध्यप्रदेश, भोपाल से जारी दिशा-निर्देश अनुरूप त्वरित कार्यवाही करते हुए घटना स्थल को सुरक्षित किया गया एवं डॉग स्क्वाड की सहायता से घटना स्थल एवं उसके आस-पास के क्षेत्र की छानबीन कर कार्यवाही की गई तथा मेटल डिटेक्टर से भी शव का परीक्षण किया गया।

जिसमें कुछ भी संदेहास्पद नहीं पाया गया। पश्चात तेंदुआ शावक का पोस्टमार्टम विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों डॉ. राजेश तोमर, वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी बा.टा.रि. उमरिया एवं डॉ. विपिन चंद्र आदर्श पशु चिकित्सा अधिकारी मानपुर के द्वारा किया गया। यह तेंदुआ शावक नर था तथा इसकी अनुमानित आयु 1.5 वर्ष के आस पास रही।

शव परीक्षण उपरांत निर्धारित प्रक्रिया अनुसार शवदाह की कार्यवाही डॉ. अनुपम सहाय क्षेत्र संचालक, कु. अंजू वर्मा परिक्षेत्र अधिकारी पतौर, सनत कुमार सिंह तहसीलदार मानपुर, अक्षय दलवी एनटीसीए के प्रतिनिधि, मूलचन्द्र जायसवाल सरपंच ग्राम पंचायत पनपथा व अन्य वन स्टाफ की उपस्थिति में की गई। उपरोक्त समस्त कार्यवाही की फोटोग्राफी एवं वीडियोंग्राफी की गई है। प्रकरण में वन अपराध प्रकरण दर्ज कर अग्रिम कार्यवाही जारी है। प्राथमिक रूप से शिकार की संभावना नहीं पाई गई है तथा समस्त अंग सुरक्षित पाए गए।

मृत्यु का वास्तविक कारण संग्रहीत नमूनों के परीक्षण उपरांत ज्ञात हो पाएगा।गौरतलब है कि बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में जितने भी वन्य जीवों की मौत होती है उन सभी का पोस्टमार्टम और नमूना तो संग्रहीत किया जाता है लेकिन किसी भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती है जो अपने आप में संदेह को जन्म देती है, सभी मामलों की उच्च स्तरीय जांच होना आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके l

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