Love Jihad Law: Supreme Court refuses to entertain UP govt plea seeking transfer of petitions from Allahabad High Court – लव जिहाद कानून: यूपी सरकार की अर्जी पर CJI ने कहा, हाईकोर्ट को नहीं रोकेंगे, SC को HC के फैसले का फायदा मिलना चाहिए

लव जिहाद कानून: यूपी सरकार की अर्जी पर CJI ने कहा, 'हाईकोर्ट को नहीं रोकेंगे, SC को HC के फैसले का फायदा मिलना चाहिए'

प्रतीकात्‍मक फोटो

खास बातें

  • यूपी सरकार ने याचिकाओं को इलाहाबाद HC से SC ट्रांसफर करने की मांग की है
  • कानून के खिलाफ लंबित याचिकाओं की सुनवाई पर भी की है रोक की मांग
  • सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की इस याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

नई दिल्ली:

Love Jihad law: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने लव जिहाद कानून (Love Jihad law) के खिलाफ याचिकाओं को इलाहाबाद हाईकोर्ट से SC ट्रांसफर करने की यूपी सरकार की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया. मुख्‍य न्‍यायाधीश (CJI) एसए बोबडे ने कहा कि हम हाईकोर्ट को नहीं रोकेंगे. सुप्रीम कोर्ट को हाईकोर्ट के फैसले का फायदा मिलना चाहिए. गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government) ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक अर्जी दायर कर लव जिहाद को लेकर अवैध धर्मांतरण कानून की इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित रिट याचिकाओं की सुनवाई पर रोक लगाए जाने व उन्हें सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की है.

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यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अदालत को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाख़िल किये जाने की जानकारी दी है. उसने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने तक हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई स्थगित किए जाने की भी अपील की. सरकार ने कहा चूंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही मामले का संज्ञान ले चुकी है और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चुकी है, इसलिए हाईकोर्ट के लिए सुनवाई जारी रखना उचित नहीं हो सकता है. उत्तर प्रदेश में लव जिहाद से जुड़े कानून को लेकर 7 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी. पहचान बदलकर लव जिहाद के जरिए धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए बने कानून की वैधता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. कोर्ट में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई का हवाला देते हुए सभी याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है.

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हाईकोर्ट द्वारा याचिकाएं स्थगित करने के इनकार के मद्देनजर सरकार ने अनुच्छेद 139 एए के तहत शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है. याचिकाओं में धर्मांतरण विरोधी कानून को संविधान के खिलाफ व गैरजरूरी बताते हुए उसे चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता ने कहा है कि यह कानून व्यक्ति की निजी पसंद और अपनी शर्तों पर किसी व्यक्ति के साथ रहने व उसे अपनाने के मूल अधिकारों के खिलाफ है. यह लोगों की आजादी के अधिकार का हनन करता है, इसलिए इसे रद्द किया जाए क्योंकि इस कानून का दुरुपयोग किया जा सकता है. वहीं, राज्य सरकार की तरफ से कहा गया है कि शादी के लिए धर्म परिवर्तन से कानून व्यवस्था की स्थिति खराब न हो, इसके लिए कानून लाया गया है, जो पूरी तरह से संवैधानिक है. इससे किसी के मूल अधिकारों का हनन नहीं होता, बल्कि नागरिक अधिकारों की रक्षा की जाती है. इस कानून के जरिए केवल छल-कपट के जरिये धर्मांतरण पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है.

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