- पाक आतंक के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं कर रहाः MEA
- विजय माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर संपर्क में सरकारः MEA
पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में बनाए रखने के फैसले पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाक के लगातार ग्रे लिस्ट में बने रहने से हमारी यह स्थिति स्पष्ट हो जाती है कि पाक ने आतंक के वित्तपोषण को दूर करने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की है.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में बना हुआ है. पाक के लगातार ग्रे लिस्ट में बनाए रखने से हमारी स्थिति स्पष्ट हो जाती है कि पाक ने आतंक के वित्तपोषण को दूर करने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की है.
विदेश मंत्रालय ने ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कंट्रीज (OIC) पर कहा कि OIC के पास जम्मू-कश्मीर समेत हमारे किसी भी आंतरिक मसलों पर कोई स्थान नहीं है. OIC को ऐसे अवांछित मुद्दों से बचना चाहिए.
विजय माल्या के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उनके भारत प्रत्यर्पण को लेकर कोई अपडेट नहीं है. हम ब्रिटिश सरकार से उनके जल्द प्रत्यर्पण को लेकर संपर्क में हैं.
FATF में बना रहेगा पाक
इससे पहले बुधवार को कोरोना की मार झेल रहे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और बड़ा झटका लगा. आतंकियों को पनाह देने वाला पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में बना रहेगा.
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अधिकारियों ने बताया कि FATF ने बुधवार को पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखने का फैसला किया है, क्योंकि वह लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठनों को पहुंचने वाली फंडिंग पर नकेल कसने में नाकाम रहा है.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित FATF के अधिवेशन की अध्यक्षता चीन के शियांगमिन लिऊ ने की. इस अधिवेशन में इस पर फैसला किया जाना था कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा जाएगा या ब्लैक लिस्ट में डाला जाएगा.
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इससे पहले फरवरी माह में भी पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने में विफल रहा था. पाक पर आरोप था कि वह लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को फंड देता है. फिर पाकिस्तान को जून 2020 तक का समय दिया गया था. उसे 27 प्वाइंट एक्शन प्लान पर काम करने को कहा गया था. लेकिन वह इसमें नाकाम रहा.
नेपाल से भारत के हाल के तनाव पर भी विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नेपाल के साथ बिना किसी रुकावट के व्यापार चल रहा है. नेपाल के साथ हमारे व्यापक व्यापारिक रिश्ते हैं और ये लगातार बढ़ता जा रहा है.
नेपाल के नक्शे पर विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर कहा कि हमने 13 जून को ही इस पर अपनी राय स्पष्ट कर दी थी, इसमें और कुछ नया जोड़ने की जरूरत नहीं है.