Microplastics found in the placentas of unborn baby for first time | दुनिया में पहली बार अजन्मे बच्चे की नाल में पहुंचा Microplastic, इम्यूनिटी पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली: दुनिया में पहली बार अजन्मे शिशुओं के प्लेसेंटा (नाल) में माइक्रोप्लास्टिक पहुंचने का पता चला है. यकीनन ये एक बड़ी चिंता का विषय है. प्लेसेंटा में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक उसकी सेहत को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं यह साफ नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है माइक्रोप्लास्टिक कण जहरीले पदार्थों के संवाहक के रूप में कार्य कर सकते हैं.

गौरतलब है कि भ्रूण के विकास में प्लेसेंटा की अहम भूमिका होती है. इसके जरिए ही मानव भ्रूण में ऑक्सीजन पहुंचती है. माइक्रोप्लास्टिक के कणों में पैलेडियम, क्रोमियम, कैडमियम जैसी जहरीली भारी धातुएं शामिल होती हैं. शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि ये माइक्रोप्लास्टिक कण भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकते हैं. वहीं, भविष्य में बच्चे के इम्यून सिस्टम पर भी असर पड़ सकता है.

एनवायरनमेंट इंटरनेशनल की रिपोर्ट में खुलासा

इस महीने की शुरुआत में एनवायरनमेंट इंटरनेशनल की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ. शोधकर्ताओं के मुताबिक नाल में मिले माइक्रोप्लास्टिक सिंथेटिक यौगिकों से युक्त हैं. शोध में 18 से 40 वर्ष की आयु की छह स्वस्थ महिलाओं के प्लेसेंटा का विश्लेषण हुआ. जिनमें से 4 में माइक्रोप्लास्टिक कण पाए गए. उनमे कुल मिलकर 5 से 10 माइक्रोन आकार के 12 माइक्रोप्लास्टिक (pm) के टुकड़े मिले.

शोधकर्ताओं के मुताबिक ये कण इतने बारीक थे जो बड़ी आसानी से रक्त के जरिए शरीर में पहुंच सकते थे. इनमें 5 टुकड़े भ्रूण में, 4 मां के शरीर में और 3 कोरियोएम्नियोटिक झिल्ली में पाए गए थे. डॉक्टरों का मानना है कि यह कण मां की सांस और मुंह के जरिए भ्रूण में पहुंचे होंगे.

इन 12 टुकड़ों में से 3 की पहचान पॉलीप्रोपाइलीन के रूप में की गई है, जो प्लास्टिक की बोतलें बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. इस टेस्टिंग में 9 टुकड़ों में सिंथेटिक पेंट सामग्री थी, जिसका इस्तेमाल क्रीम, मेकअप या नेलपॉलिश बनाने में होता है.

ये भी पढ़ें- सुधरने लगे Delhi के हालात, 4 महीने में पहली बार सबसे कम आए कोरोना केस

क्या होता है माइक्रोप्लास्टिक?

प्लास्टिक के बड़े टुकड़े टूटकर छोटे कणों में बदल जाते हैं, तो उसे माइक्रोप्लास्टिक कहते हैं. इसके साथ ही कपड़ों और अन्य वस्तुओं के माइक्रोफाइबर के टूटने पर भी माइक्रोप्लास्टिक्स बनते हैं.  गौरतलब है कि प्लास्टिक के 1 माइक्रोमीटर से 5 मिलीमीटर के टुकड़ों को माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है. जिसका मतलब है कि यह इतने छोटे होते हैं कि आसानी से रक्त के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं.

LIVE TV




Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here