वाशिंगटनः अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने अलकायदा के बारे में उजागर हुई अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट को ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने का फैसला किया है. अमेरिका ने यह निर्णय ऐसे वक्त में लिया है, जब कुछ दिन बाद ही वहां पर सत्ता का हस्तांतरण होने वाला है.
ट्रंप कार्यकाल खत्म होने के 8 दिन पहले आया पोम्पियो का बयान
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ( Mike Pompeo) का कहना है कि ईरान ने अल कायदा के नेताओं को अपने देश में पनाह दी और अब भी आतंकियों का समर्थन कर रहा है. पोम्पिओ ने यह बयान वाशिंगटन के नेशनल प्रेस क्लब में दिए अपने भाषण के दौरान दिया. इस मामले में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि पोम्पियो अपने भाषणों में ईरान और अलकायदा के संबंधों को लेकर कितना कुछ कहना चाहते थे.
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ईरान कह चुका, उसकी धरती पर नहीं है अलकायदा के आतंकी
न्यूयॉर्क टाइम्स ने नवंबर 2020 में खबर दी थी कि 1998 में अफ्रीका में स्थित दो अमेरिकी दूतावासों (US embassies) पर बमबारी के मास्टरमाइंड की मदद करने के आरोपी अबू मुहम्मद अल-मसरी को ईरान में इजरायली के एजेंटों ने गोलियों से भून दिया था. हालांकि ईरान ने इस रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा था कि उसकी जमीन पर अलकायदा के ‘आतंकवादी’ नहीं थे.
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ट्रंप प्रशासन में अमेरिका ने बरती ईरान पर सख्ती
मालूम हो कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन (Trump administration) के दौरान अमेरिका हमेशा से ही ईरान को टारगेट करता आया है. माइक पोम्पिओ ने हाल के सप्ताहों में ईरान पर दबावों को कड़ा करके कड़े प्रतिबंधों लगाने की चेतावनी भी दी है. पोम्पिओ ने ईरान पर पहले भी अल कायदा से संबंधों का आरोप लगाए थे लेकिन वे उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं जुटा पाए. अक्टूबर 2017 में CIA के निदेशक रहे माइक पोम्पिओ ने कहा कि कई बार ईरानियों ने अल कायदा के साथ काम किया है.
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ट्रंप प्रशासन पर क्या है बाइडेन के सहयोगियों की राय
अमेरिका का ट्रंप प्रशासन पिछले कई दिनों से ईरान पर विभिन्न प्रतिबंधों को लागू कर रहा है. जिसे देखते हुए निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन के सहयोगी आशंका जता रहे हैं कि जाते-जाते डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ संबंधों को इस हद तक खराब कर देना चाहते हैं, जिससे बाइडेन प्रशासन फिर उससे किसी तरह की बातचीत न कर सके. ऐसे में बाइडेन प्रशासन को ईरान को दोबारा से अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते में शामिल करना मुश्किल हो जाएगा.
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