नई दिल्ली: म्यांमार में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में 500 से ज्यादा लोगों की मौत के बाद अब प्रदर्शनकारियों ने गार्बेज स्ट्राइक ‘garbage strike’ की शुरुआत की है. प्रदर्शनकारी मुख्य सड़क पर कचरा छोड़कर जा रहे हैं और लोगों से कह रहे हैं कि वो भी ऐसा ही करें.
विरोध दर्ज कराने का नया तरीका
एक्टिविस्ट्स का ये विरोध प्रदर्शन सेना के खिलाफ है. 1 फरवरी से म्यांमार में सेना का शासन है जिसका प्रदर्शनकारी विरोध कर रहे हैं. म्यांमार में सेना के कब्जे के बाद हिंसक प्रदर्शनों में करीब 500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. इसलिए अब एक्टिविस्ट्स विरोध दर्ज कराने के नए और क्रिएटिव तरीके ढूंढ रहे हैं, जिससे उनकी बात सुनी जा सके.
अब प्रदर्शनकारी सेना के शासन के विरोध में गार्बेज स्ट्राइक कर रहे हैं और इसके तहत सड़कों पर कचरा छोड़कर जा रहे हैं. वे लोगों से भी अपील कर रहे हैं कि वो भी ऐसा ही करें.
सेना की कार्रवाई में मारे गए 14 नागरिक
बता दें कि 29 मार्च सोमवार को करीब 14 नागरिक सेना की कार्रवाई में मारे गए हैं. असीस्टेंस एसोसिएशन ऑफ पॉलिटिकल प्रिजनर्स के मुताबिक, इनमें से आठ यांगून के साउथ डैगन जिले में मारे गए. सोमवार को हुई झड़प में सिक्योरिटी फोर्सेज ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड के पीछे छुपकर किसी तरह अपनी जान बचाई.
Riot Weapons का किया इस्तेमाल
कई रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों पर गेनेड लॉन्चर्स का भी इस्तेमाल किया गया. स्टेट न्यूज़ एजेंसी ने दावा किया है कि प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए सिक्योरिटी फोर्सेज Riot Weapons का इस्तेमाल भी किया गया. सिक्योरिटी फोर्सेज इन प्रदर्शकारियों को हिंसक आतंकवादी बताते हैं.
सोशल मीडिया पर गार्बेज स्ट्राइक
साउथ डैगन क्षेत्र के के स्थानीय लोगों का दावा है कि सिक्योरिटी फोर्सेज ने क्षेत्र में कार्रवाई बढ़ा दी है, जिससे डर है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग मारे जाएंगे. स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां रात भर फायरिंग होती रही और रात को उन्हें बुरी तरह से जला हुआ एक शव मिला. सेना के विरोध में गार्बेज स्ट्राइक का प्रचार सोशल मीडिया पर भी जोर-शोर से किया जा रहा है और यंगून में लोगों से ये अपील की जा रही है कि वो खूब अच्छी तरह से कचरा फैलाएं.

