नक्सली कमांडर की मूर्ति का अनावरण हुआ.
नक्सली कमांडर सोमजी इसी साल फरवरी में तब मारा गया था, जब वह सुरक्षा बलों की जान लेने के लिए आईईडी ब्लास्ट के लिए बम प्लांट कर रहा था. उसकी मूर्ति लगाए जाने के पीछे पूरी कहानी और सोच क्या है?

पूर्व नक्सली कमांडर सोमजी की प्रतिमा.
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं महाराष्ट्र की बाहरी माओवादी कैडर की साजिश में फंसकर मनीराम वेदड़ा ने सोमजी की पहचान हासिल की. 17 सालों तक कई ग्रामीणों की हत्या, आगजनी, तोड़फोड़ और अन्य विनाशकारी गतिविधियों में शामिल रहा. सोमजी के परिजनों और ग्रामीणों ने उससे कई बार हिंसा का रास्ता छोड़कर लौटने की गुहार लगाई थी, लेकिन वह लौटा नहीं. अंतत: इसी साल 18 फरवरी को अपनी ही साज़िश का शिकार हो गया. क्यों लगाई गई है मूर्ति? ग्राम आलदण्ड में परिजनों और ग्रामीणों सोमजी की मूर्ति स्थापित की है. उनका मानना है कि क्षेत्र की जनता को यह मूर्ति हमेशा याद दिलाएगी कि हिंसात्मक विचारों का अंजाम दर्दनाक ही होता है. साथ ही, यह मूर्ति यादगार भी बनेगी कि कैसे आदिवासी युवाओं को माओवादी साज़िशन हिंसा के रास्ते पर धकेलते हैं. आईजी सुन्दरराज ने भी कहा कि आलदण्ड में स्थापित सोमजी की मूर्ति को ध्वस्त नहीं किया जाएगा. गौरतलब है कि सोमजी उर्फ सहदेव वेदड़ा के गृह ग्राम आलदण्ड में मूर्ति लगाने के लिए ग्रामीणों ने परिजनों और पुलिस के बीच संपर्क और सामंजस्य बनाकर ही मूर्ति लगाने का कदम उठाया था.