काठमांडू: भारत के पड़ोसी देश नेपाल की राजनीति में तब हड़कंप मच गया जब रविवार को देश के दो पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड और माधव कुमार नेपाल मौजूदा प्रधानमंत्री केपी ओली के संसद को भंग करने के फैसले के खिलाफ धरने पर बैठ गए.
पीएम केपी ओली के फैसले से पार्टी में बढ़ी कलह
बता दें कि नेपाल की राजनीति में इस समय घमासान मचा हुआ है. देश में सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता ही एक-दूसरे के खिलाफ हो गए हैं. नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड और माधव कुमार नेपाल ने प्रधानमंत्री केपी ओली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
जान लें कि पिछले साल दिसंबर में जब नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपनी पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की सहमति लिए बिना ही एकतरफा फैसला लेते हुए संसद को भंग करने का फैसला लिया था तो पार्टी में अंदरूनी कलह बढ़ गई थी.
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टूटने की कगार पर पहुंची नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी
गौरतलब है कि पीएम केपी ओली के इस फैसले से पार्टी के टूटने की नौबत भी आ गई है. उसके बाद से ही नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी दो पार्टियों की तरह काम कर रही है. पार्टी के एक गुट का नेतृत्व पीएम केपी ओली कर रहे हैं, वहीं दूसरे ग्रुप का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल और पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड कर रहे हैं.
दोनों ही ग्रुप एक ही बैनर तले पूरे देश में अलग-अलग कार्यक्रम कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अभी चुनाव आयोग की तरफ से कोई आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है.
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पीएम केपी ओली को पार्टी से निकाला गया
इस विवाद के बीच बीते 24 जनवरी को पीएम केपी ओली के विरोधी खेमे की अगुवाई कर रहे पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड और माधव कुमार नेपाल गुट ने केपी ओली के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की और उन्हें पार्टी से निकाल दिया.
(इनपुट- ANI)
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